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मछली के जाल से हमले रोकेगा पाकिस्तान! बलूच आर्मी और तालिबानी अटैक के बीच मजाक बना मुनीर का ‘सस्ता’ डिफेंस कवच
ड्रोन हमलों से बचने के लिए पाकिस्तान की पुलिस और सेना मछली पकड़ने वाले जाल का इस्तेमाल कर रही है. जाल का इस्तेमाल बेहद ही संवेदनशील इलाकों में किया जा रहा है.
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पाकिस्तानी सेना दोहरी मार से घिरी हुई है. एक तरफ बलूच आर्मी ने नाक में दम कर रखा है, दूसरी ओर तालिबान के लड़ाकों का आसिम मुनीर की सेना पर ताबड़तोड़ वार जारी है. दोतरफा मुसीबत से घिरे पाकिस्तान ने अपनी सुरक्षा में ऐसा कदम उठाया जिसने एक बार फिर पाकिस्तान की इंटरनेशनल बेइज्जती करवा दी.
ड्रोन हमलों से बचने के लिए पाकिस्तान की पुलिस और सेना मछली पकड़ने वाले जाल का इस्तेमाल कर रही है. अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के संवेदनशील इलाकों में पुलिस चौकियों और सुरक्षा ठिकानों के ऊपर कई मीटर की ऊंचाई पर ये जाल लगाए जा रहे हैं. बलूच आर्मी के लगातार हमलों के बीच पाक आर्मी की सुरक्षा का ये सस्ता तरीका काफी चर्चा में है.
ड्रोन को मात देने के लिए जाल बिछाया
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वैसे तो यह काफी हास्यास्पद बात है कि घातक ड्रोन को मात देने के लिए मछली के जाल का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन पाकिस्तान तो जाना ही मजाक के लिए जाता है. यहां की सेना और पुलिस का मानना है कि हमलावर ड्रोन इन जालों में फंस सकते हैं. इससे ड्रोन हमले में होने वाला नुकसान 40 से 50% तक कम किया जा सकता है.
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पाकिस्तानी सेना और पुलिस ने क्या दलील दी?
सुरक्षा के इस सस्ते और अनोखे तरीके के बाद चर्चा में आई मुनीर की सेना ने दलील भी दी है. उनका कहना है कि जाल लगाने की जरूरत इसलिए पड़ी क्योंकि दुश्मनों ने हमले का तरीका बदल दिया है. अब वे गोलीबारी और मोर्टार के साथ ड्रोन का भी इस्तेमाल कर रहे हैं.
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ऐसे में पाकिस्तानी सीमा पर चौकियों और थानों की छत और चारदीवारी पर मछली के जाल लगे हुए दिखाई दे रहे हैं.
बलूच आर्मी की महिला ब्रिगेड ने किया था जवानों पर हमला
पाकिस्तान तालिबान और बलूच बिलरेशन फ्रंट के हमलों से घिरा है. दो दिन पहले ही बलूचिस्तान के वाशुक जिले के मशकेल इलाके में फ्रंटियर कॉर्प्स (एफसी) के एक कैंप पर हुए हमले में 18 सुरक्षाकर्मी मारे गए. जबकि कई घायल हो गए.
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मीडिया को दिए गए बयान में बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट (बीएलएफ) के प्रवक्ता मेजर ग्वाहराम बलोच ने कहा कि यह हमला एक अक्टूबर को मशकेल के गोरिंदर इलाके में एफसी की 58वीं विंग के कैंप पर किया गया था. बड़ी बात ये है कि बलूच सेना की महिला विंग ने पाकिस्तानी आर्मी के खिलाफ मोर्चा संभाला और इस बड़े हमले को अंजाम दिया. जिसमें 18 सैनिकों की मौत हुई थी.
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पुलिस के मुताबिक, इस साल खैबर पख्तूनख्वा के कई इलाकों में 16 से ज्यादा हमले किए जा चुके हैं. इस तनाव भरी स्थिति में पाकिस्तानी सेना और पुलिस को बचने का बेहद ही सस्ता तरीका सुझा है.