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क्या सचमुच पाकिस्तान में हो रहा रेडिएशन लीक? अमेरिका का रिएक्शन आया सामने
भारतीय सेना की तरफ से चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की अकड़ टूट गई है. पाकिस्तान अपने यहां भारतीय सेना द्वारा की गई कार्रवाई के बाद हुई बर्बादी को छिपाने में लगा हुआ है. इसी बीच एक दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान में रेडिएशन लीक हो रहा है जिसे पाकिस्तान दुनिया के सामने छिपाने की कोशिश कर रहा है.
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के जरिए बम और मिसाइलों से हमला किया, इसके बाद से ही वहां से बर्बादी की खबरे सामने आ रही है. इन सब के बीच सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा कि पाक में न्यूक्लियर रेडिएशन रिसाव हो रहा है.
न्यूक्लियर रेडिएशन रिसाव पर अमेरिका का आया जवाब
बीते कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर लगातार ऐसी खबरें चल रही है जिसमें दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान के सरगोधा के पास से न्यूक्लियर रेडिएशन रिसाव हो रहा है. सोशल मीडिया पर लोग दावा कर रहे हैं कि सरगोधा एयरबेस के पास किराना हिल्स पर पाकिस्तान के परमाणु हथियार हैं. ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सरगोधा पर हमले के बाद से न्यूक्लियर रेडिएशन रिसाव हो रहा है.
इसके बाद खबर आई कि अमेरिका ने इसकी जांच के लिए अपनी टीम भी पाकिस्तान भेजी है. इस संबंध में जब अमेरिकी विदेश विभाग के प्रिंसिपल डिप्टी स्पोक्सपर्सन टॉमी पिगॉट से पूछा गया कि क्या न्यूक्लियर रेडिएशन लीक की जांच के लिए अमेरिकी टीम पाकिस्तान गई है? तो इस पर उन्होंने कहा कि मेरे पास इस समय इस पर बात करने के लिए कुछ भी नहीं है.
भारत सरकार ने खबर का किया खंडन
भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान और पीओके में आतंक के अड्डों को निशाना बनाकर हमला किया था. इस दौरान पाकिस्तान के सरगोधा और नूर खान एयरबेस पर भी हमले किए गए थे. दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तानी सेना ने इन दो जगहों के आसपास परमाणु हथियार रखे हुए हैं. भारत के हमलों की वजह से यहां रेडिएशन लीक हो रही है. लेकिन भारत सरकार ने ऐसी तमाम खबरों का खंडन किया है.
10 मई को भारतीय सेना की तरफ से किए गए हमले में आठ पाकिस्तानी सैन्य ठिकानों पर सटीक वार किया गया. जिसके बाद सैटेलाइट तस्वीरों से इंफ्रास्ट्रक्चर और ग्राउंड पर काफी नुकसान होने की पुष्टि हुई. इनमें रफ़ीकी, मुरीदके, चकलाला, रहीम यार खान, सकर, चुनियन, पसरूर और सियालकोट में रडार सेंटर, कमांड और कंट्रोल सेंटर और गोला-बारूद डिपो शामिल थे.
किराना हिल्स और आसपास के क्षेत्रों को 2023 की एक रिपोर्ट में सबक्रिटिकल न्यूक्लियर टेस्ट साइट के रूप में पहचाना गया था, जो बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स नामक एक NGO द्वारा पब्लिश की गई थी. इस रिपोर्ट में कहा गया था कि इस साइट पर गोला-बारूद स्टोरेज एरिया, टीईएल (ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर) गैरेज और कम से कम दस अंडरग्राउंड स्टोरेज फैसिलिटी मौजूद हैं.