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दावोस में दिखेगा भारत का दम… WEF बैठक में NSA अजीत डोभाल और 6 CM करेंगे देश का प्रतिनिधित्व, जानें किन मुद्दों पर होगी चर्चा

स्विट्जरलैंड के दावोस में WEF की वार्षिक बैठक सोमवार से शुरू हो रही है, जिसमें भारत का मजबूत प्रतिनिधित्व रहेगा. भारत से NSA अजीत डोभाल, चार केंद्रीय मंत्री और छह मुख्यमंत्री हिस्सा लेकर निवेश और विकास की संभावनाएं दुनिया के सामने रखेंगे.

Ajit Doval (File Photo)

स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक सोमवार से शुरू हो रही है. पांच दिनों तक चलने वाले इस वैश्विक आयोजन में दुनिया भर के ताकतवर नेता, नीति निर्माता, उद्योगपति और विशेषज्ञ एक मंच पर नजर आएंगे. इस बार दावोस की सबसे बड़ी खासियत भारत का दमदार और प्रभावशाली प्रतिनिधित्व माना जा रहा है, जिसने पहले ही वैश्विक हलकों में उत्साह पैदा कर दिया है.

इस बैठक में सरकार, व्यापार, शिक्षा, नागरिक समाज और श्रम संघों से जुड़े 3000 से अधिक नेता हिस्सा ले रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी अपने मंत्रिमंडल के पांच सदस्यों के साथ दावोस पहुंच रहे हैं. ऐसे में यह मंच वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने वाला साबित हो सकता है.

NSA अजीत डोभाल के गए हैं कई मंत्री 

भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ चार केंद्रीय मंत्री दावोस में मौजूद रहेंगे. इनमें अश्विनी वैष्णव, शिवराज सिंह चौहान, प्रल्हाद जोशी और के राम मोहन नायडू शामिल हैं. इसके अलावा छह राज्यों के मुख्यमंत्री भी इस वैश्विक बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व करेंगे. महाराष्ट्र के देवेंद्र फडणवीस, आंध्र प्रदेश के एन चंद्रबाबू नायडू, असम के हिमंत विश्व शर्मा, मध्य प्रदेश के मोहन यादव, तेलंगाना के ए रेवंत रेड्डी और झारखंड के हेमंत सोरेन का शामिल होना राज्यों की निवेश संभावनाओं को वैश्विक मंच पर रखने का बड़ा अवसर है. इसके साथ ही गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष रमेशभाई संघवी और उत्तर प्रदेश का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी दावोस की यात्रा कर रहा है. इसका सीधा संदेश है कि भारत केंद्र और राज्यों दोनों स्तरों पर दुनिया से साझेदारी के लिए तैयार है.

क्या भारत बनेगा दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था?

भारतीय नेता इस शिखर सम्मेलन के दौरान कई अहम समूह चर्चाओं में हिस्सा लेंगे. इनमें सबसे अहम विषय है, क्या भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है. इस चर्चा में भारत की तेज आर्थिक वृद्धि, डिजिटल क्रांति, इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और युवा आबादी जैसे पहलुओं पर गहन मंथन होगा. इसके अलावा भारतीय प्रतिनिधि कई द्विपक्षीय बैठकों के जरिए निवेश और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने की कोशिश करेंगे. पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति जुबिन इरानी भी दावोस में खास भूमिका में नजर आएंगी. वह अलायंस फॉर ग्लोबल गुड: जेंडर इक्विटी एंड इक्वालिटी की संस्थापक और चेयरपर्सन के रूप में बैठक में शामिल होंगी. यह पहल कुछ साल पहले दावोस में ही शुरू हुई थी, जो लैंगिक समानता को वैश्विक एजेंडे का हिस्सा बनाती है.

भारतीय उद्योग जगत की मजबूत मौजूदगी?

दावोस में भारत का उद्योग जगत भी पूरी ताकत के साथ उतरा है. रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी, टाटा समूह के एन चंद्रशेखरन, बजाज समूह के संजीव बजाज, जुबिलेंट भरतिया समूह के हरि एस भरतिया और टीवीएस मोटर के सुदर्शन वेणु जैसे दिग्गज इस बैठक में हिस्सा ले रहे हैं. इनके अलावा कई भारतीय कंपनियों के सीईओ भी मौजूद रहेंगे, जो भारत की कारोबारी ताकत को दुनिया के सामने रखेंगे.

इंडिया पवेलियन का संदेश और एआई की धूम

दावोस की गलियों में हर ओर एक ही संदेश नजर आ रहा है, भारत के साथ पार्टनरशिप करें और भविष्य को सब्सक्राइब करें. यही इंडिया पवेलियन का मुख्य संदेश है. प्रमुख उद्योग संगठन सीआईआई के पवेलियन में भी इसी सोच को आगे बढ़ाया गया है. भारत की बड़ी आईटी कंपनियों ने अपने पवेलियन और लाउंज को खास तौर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई थीम पर सजाया है. विप्रो और टीसीएस के लाउंज आमने सामने हैं, जबकि इंफोसिस, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा भी आसपास मौजूद हैं. आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, झारखंड, उत्तर प्रदेश, केरल और तेलंगाना जैसे राज्यों के पवेलियन भी निवेशकों का ध्यान खींच रहे हैं.

दावोस में अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम

इस बार दावोस में सुरक्षा व्यवस्था भी ऐतिहासिक मानी जा रही है. पांच हजार से अधिक सशस्त्र बलों के जवान, अहम जगहों पर स्नाइपर्स, एआई से लैस ड्रोन और जासूसी से निपटने के लिए खास उपकरण तैनात किए गए हैं. स्विट्जरलैंड के इस छोटे से शहर में पहले कभी इतनी कड़ी सुरक्षा नहीं देखी गई. हर एंट्री पॉइंट पर और कई रैंडम जगहों पर सख्त जांच हो रही है.

बहरहाल, WEF की यह बैठक भारत के लिए सिर्फ एक सम्मेलन नहीं, बल्कि वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ता एक मजबूत कदम है, जहां दुनिया भारत को सुन भी रही है और समझ भी रही है.

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