वेनेजुएला में बढ़ी भारत की भूमिका! मादुरो की जगह लेने वालीं राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज का आया PM मोदी को फोन, जानें क्या बात हुई

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वेनेजुएला गणराज्य की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी एलोइना रोड्रिग्ज गोमेज का फोन आया. दोनों नेताओं ने बातचीत के दौरान दोनों देशों के बीच साझेदारी को और मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा की. कहा जा रहा है कि इस दौरान विभिन्न मुद्दों पर सहमति बनी.

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31 Jan 2026
( Updated: 31 Jan 2026
01:06 PM )
वेनेजुएला में बढ़ी भारत की भूमिका! मादुरो की जगह लेने वालीं राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज का आया PM मोदी को फोन, जानें क्या बात हुई
Delcy Rodriguez & PM Modi (File Photo)

अमेरिका द्वारा निकोलस मादुरो के कब्जे के बाद वेनेजुएला में पैदा हुए संकट के बीच प्रधानमंत्री मोदी की वेनेजुएला गणराज्य की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी एलोइना रोड्रिग्ज से बात हुई. खबर के मुताबिक पीएम को गोमेज का फोन आया. दोनों नेताओं ने बातचीत के दौरान दोनों देशों के बीच साझेदारी को और मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा की. 

फोन पर बातचीत के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने पोस्ट किया, "वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी एलोइना रोड्रिग्ज से बात हुई. हम सभी क्षेत्रों में अपनी द्विपक्षीय साझेदारी को और मजबूत और विस्तारित करने पर सहमत हुए, और आने वाले वर्षों में भारत-वेनेजुएला संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के साझा दृष्टिकोण का पालन करने लगे."

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश, ऊर्जा, डिजिटल प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, कृषि और जन-जन संबंधों सहित सभी क्षेत्रों में भारत-वेनेजुएला साझेदारी को और विस्तारित और मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की. “दोनों नेताओं ने आपसी हित के विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया और वैश्विक दक्षिण के लिए अपने घनिष्ठ सहयोग के महत्व पर जोर दिया. प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि दोनों नेता संपर्क में रहने पर सहमत हुए.

वहीं PM मोदी द्वारा से हुई बातचीत के बारे में खुद डेल्सी एलोइना रोड्रिग्ज ने भी जानकारी दी. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स उन्होंने कहा कि मैंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक सौहार्दपूर्ण टेलीफोन वार्ता की. यह संवाद गहरी मानवीय और आध्यात्मिक जुड़ाव से परिपूर्ण रहा, जिसमें हमने सभी क्षेत्रों में अपनी द्विपक्षीय साझेदारी को और अधिक गहरा तथा विस्तृत करने पर सहमति व्यक्त की.

वेनेजुएला ने भारत का जताया आभार

उन्होंने आगे लिखा कि, "मैंने हमारे देश के प्रति भारत सरकार और भारत की जनता के एकजुट एवं सहयोगात्मक समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया. प्रधानमंत्री मोदी ने शांति, संप्रभुता और स्वतंत्रता की रक्षा में वेनेज़ुएला की जनता के साथ खड़े रहने की अपनी इच्छा दोहराई.

हमने ऊर्जा, कृषि, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, औषधि उद्योग, खनन, ऑटोमोबाइल क्षेत्र और पर्यटन में रणनीतिक सहयोग पर चर्चा की तथा वर्ष 2026 में अपने संबंधों को पुनर्जीवित करने के लिए एक साझा रोडमैप पर आगे बढ़ने पर सहमति बनी."

विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रमुख अंतरराष्ट्रीय, राजनीतिक और आर्थिक मुद्दों पर विचारों की समानता के कारण भारत और वेनेजुएला के बीच हमेशा सौहार्दपूर्ण संबंध रहे हैं. द्विपक्षीय संबंधों को सक्रिय रूप से बढ़ावा देने के अलावा, दोनों देश बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग करते हैं. दोनों देशों ने 2023 में राजनयिक संबंधों की स्थापना की 64वीं वर्षगांठ मनाई. कराकास और नई दिल्ली में चार दशकों से अधिक समय से स्थायी दूतावास हैं.

वेनेजुएला भारत के सबसे बड़े तेल आपूर्तिकर्ताओं में से एक बनकर उभरा है. आईटीईसी कार्यक्रम के तहत हर साल वेनेजुएला के विशेषज्ञों को भारत भेजा जाता है. आईसीसीआर ने शैक्षणिक वर्ष 2017 से शुरू होने वाले वेनेजुएला के लिए 4 छात्रवृत्तियों को मंजूरी दी है. वेनेजुएला में लगभग 50 अनिवासी भारतीय और 30 व्यक्तिगत प्रवासी रहते हैं.

वेनेजुएला के साथ तेल व्यापार में होगा भारत का फायदा

आपको बताएं कि वेनेजुएला के खिलाफ अमेरिका की कार्रवाई के बाद से दुनिया में पेट्रो डॉलर और तेल व्यापार को लेकर बहस छिड़ गई है. इसके साथ ही इस मुद्दे को लेकर चिंता भी उजागर हो रही है कि आखिर दुनिया में तेल के व्यापार पर क्या असर पड़ेगा.

इस संबंध में भारत के पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने कहा था कि, "भारत ने वेनेजुएला में लगभग छह बिलियन डॉलर निवेश किए थे; वेनेजुएला का क्रूड इंडिया में आयात किया जा रहा था. अमेरिका के प्रतिबंध की वजह से, यह जारी नहीं रह सका. इसलिए भारत, ओएनजीसी और भारतीय कंपनियों की वेनेजुएला में दिलचस्पी है."

उन्होंने आगे कहा, "यह कैसे काम करेगा? हमारी कंपनियों और हमारे इंटरेस्ट के लिए क्या विकल्प है? उस पर भी हमें ध्यान से देखना होगा. लेकिन यह साफ है कि वेनेजुएला बड़े तेल उत्पादक के नजरिए से एक जरूरी देश है, जिसके पास दुनिया में सबसे बड़ा तेल रिजर्व है, सऊदी अरब से भी ज्यादा. तो हम उस कनेक्शन को फिर से कैसे बना सकते हैं और बैन हटने का इंतजार कैसे कर सकते हैं, सही हालात बनने का इंतजार कैसे कर सकते हैं, यह हमें देखना होगा."

ONGC का 500 मिलियन डॉलर का बिल चुकता करेगा वेनेजुएला!

बता दें, ब्रोकरेज रिपोर्ट में कहा गया है कि वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन के कारण भारत की सरकारी तेल कंपनी ओएनजीसी को बकाया 500 मिलियन डॉलर मिलने की संभावना है. ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने कहा कि अमेरिकी हमले के बाद वेनेजुएला की बदलती स्थिति के कारण वेनेजुएला ऑयल प्रोजेक्ट में अटका ओएनजीसी का 500 मिलियन डॉलर का बकाया डिविडेंड मिल सकता है.

वेनेजुएला से प्रतिबंध हटाएगा अमेरिका!

जानकारों का कहना है कि वेनेजुएला की तेल इंडस्ट्री पर अमेरिकी नियंत्रण के बाद वेनेजुएलियन क्रूड निर्यात पर प्रतिबंध हट सकता है. हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वेनेजुएला के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध जारी रहेंगे और अगर भविष्य में कोई छूट दी जाती है तो वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ जाएगी और इससे कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा.

ओएनजीसी को हो सकता है लाभ!

रिपोर्ट में बताया गया कि यदि स्थिति में सुधार होता है तो ओएनजीसी को लाभ हो सकता है, क्योंकि कंपनी को सैन क्रिस्टोबल परियोजना से 2014 तक की अवधि के लिए लगभग 500 मिलियन डॉलर का बकाया डिविडेंड प्राप्त होना है. हालांकि, 2014 के बाद इस क्षेत्र में उत्पादन बंद हो गया, जिसके परिणामस्वरूप बाद के वर्षों में कोई डिविडेंड प्राप्त नहीं हुआ.

ओएनजीसी की अपनी विदेशी इकाई ओएनजीसी विदेश लिमिटेड (OVL) के माध्यम से वेनेजुएला के तेल क्षेत्र में हिस्सेदारी है. कंपनी वेनेजुएला में सैन क्रिस्टोबल परियोजना में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है. इसके अलावा, ओवीएल, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और ऑयल इंडिया के साथ मिलकर काराबोबो 1 तेल क्षेत्र में 11 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है.

वेनेजुएला में बड़े खिलाड़ी के तौर पर उभर सकता है भारत!

इसके अतिरिक्त, ओवीएल, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और ऑयल इंडिया के साथ मिलकर काराबोबो-1 तेल क्षेत्र में 11 प्रतिशत हिस्सेदारी रखती है. ब्रोकरेज फर्म जेफरीज ने चेतावनी दी है कि हालांकि छोटी अवधि में कुछ सकारात्मक पहलू दिख सकते हैं, लेकिन वेनेजुएला में तेल उत्पादन में संभावित पुनरुत्थान ओएनजीसी के लिए मध्यम अवधि का जोखिम है.

देश से अधिक उत्पादन वैश्विक आपूर्ति को बढ़ा सकता है और कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव डाल सकता है, जिससे अपस्ट्रीम तेल कंपनियों पर असर पड़ेगा. हालांकि, कमोडिटी विशेषज्ञों का मानना ​​है कि अमेरिका-वेनेजुएला संघर्ष ने तेल की कीमतों में भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम जोड़ दिया है, भले ही वैश्विक आपूर्ति पर इसका तात्कालिक प्रभाव सीमित ही क्यों न हो.

हर दिन 1.1 करोड़ बैरल तेल का उत्पादन करता है वेनेजुएला

चॉइस ब्रोकिंग के कमोडिटी और करेंसी विश्लेषक आमिर मकदा के अनुसार, वेनेजुएला वर्तमान में प्रतिदिन 8 लाख से 1.1 करोड़ बैरल तेल का उत्पादन करता है, जो वैश्विक आपूर्ति का लगभग एक प्रतिशत है.

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उन्होंने कहा, “वैश्विक तेल आपूर्ति पर तात्कालिक प्रभाव सीमित होने के बावजूद, वेनेजुएला के विशाल तेल भंडार पर नियंत्रण में बदलाव से कच्चे तेल की कीमतों और दीर्घकालिक आपूर्ति पूर्वानुमानों पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है.”

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