Advertisement

Loading Ad...

ईरान-US के बीच भीषण होगी जंग! मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने उतारे 3500 सैनिक, USS Tripoli पहुंचा ऑपरेशन जोन

अमेरिका ने ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य ताकत बढ़ा दी है. करीब 3,500 सैनिकों के साथ लड़ाकू विमान और युद्धपोत USS त्रिपाली तैनात किया गया है, जो F-35 और ओस्प्रे ऑपरेट करने में सक्षम है. इसके अलावा USS Boxer समेत अन्य नौसैनिक यूनिट्स भी क्षेत्र में भेजी जा रही हैं.

Source: X/ @CENTCOM
Loading Ad...

मिडिल ईस्ट में जारी जंग अब और तेज हो सकती है और हालात हर दिन नए मोड़ ले रहे हैं. अमेरिका और ईरान के बीच चल रही टकराव अब सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसका असर जमीन, आसमान और समुद्र तीनों मोर्चों पर साफ नजर आ रहा है. अब अमेरिका अपनी सैन्य मौजूदगी लगातार बढ़ाते जा रहे है. 

अमेरिका की बढ़ती सैन्य तैनाती

ताजा जानकारी के मुताबिक, अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत को बड़े स्तर पर बढ़ा दिया है. करीब 3,500 नौसैनिक और मरीन सैनिकों की तैनाती के साथ-साथ एडवांस लड़ाकू और परिवहन विमान भी भेजे गए हैं. इस कदम को सीधे तौर पर ईरान के साथ बढ़ते तनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (United States Central Command) ने भी पुष्टि की है कि आधुनिक युद्धपोत यूएसएस त्रिपोली (USS Tripoli) अपने ऑपरेशनल जोन में पहुंच चुका है.

Loading Ad...

यूएसएस त्रिपोली की ताकत

Loading Ad...

यूएसएस त्रिपोली कोई सामान्य युद्धपोत नहीं है. यह F-35 स्टील्थ फाइटर जेट और MV-22 ओस्प्रे जैसे अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट को ऑपरेट करने में सक्षम है. पहले इसे जापान में तैनात किया गया था, लेकिन हालात की गंभीरता को देखते हुए इसे मिडिल ईस्ट भेजा गया. इसके अलावा USS Boxer समेत कई अन्य नौसैनिक यूनिट्स भी इस क्षेत्र की ओर बढ़ रही हैं.

ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का असर

Loading Ad...

इस बीच, 28 फरवरी से शुरू हुए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने हालात को और गंभीर बना दिया है. CENTCOM के अनुसार, अब तक 11,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमले किए जा चुके हैं. यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि संघर्ष अब सीमित नहीं रहा, बल्कि बड़े स्तर पर फैल चुका है.

ईरान का जवाबी हमला

तनाव तब और बढ़ गया जब ईरान ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया. इस हमले में कम से कम 10 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं. इसके बाद पूरे क्षेत्र में सुरक्षा और सख्त कर दी गई है.

Loading Ad...

अमेरिका की रणनीति

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्कों रुबियो ने साफ कहा है कि अमेरिका बिना जमीनी सैनिक उतारे अपने लक्ष्य हासिल करना चाहता है. हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि डोनाल्ड ट्रंप को बदलते हालात के लिए हर विकल्प तैयार रखना होगा.

हूती विद्रोहियों की एंट्री

Loading Ad...

इसी बीच यमन के हूती विद्रोहियों की एंट्री ने इस संघर्ष को और जटिल बना दिया है. हूती समूह ने इजरायल की ओर मिसाइल दागने का दावा किया है. इसके चलते बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट और Suez Canal जैसे अहम समुद्री रास्तों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.

वैश्विक व्यापार पर असर

इस जंग का असर अब वैश्विक व्यापार पर भी पड़ने लगा है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) लगभग बंद होने की स्थिति में है, जिससे तेल सप्लाई और शिपिंग रूट प्रभावित हो रहे हैं. कई देशों को अब वैकल्पिक रास्ते तलाशने पड़ रहे हैं, जिससे लागत और समय दोनों बढ़ रहे हैं.

Loading Ad...

कूटनीतिक प्रयास नाकाम

कूटनीतिक प्रयास भी फिलहाल सफल होते नहीं दिख रहे हैं. अमेरिका की ओर से दूत स्टीव विटकॉफ (Steve Witkoff) ने सीजफायर का प्रस्ताव दिया था, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक और समुद्री रास्ते खोलने की बात शामिल थी. लेकिन ईरान ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया और अपनी संप्रभुता की मान्यता के साथ मुआवजे की मांग रखी. जानकारों का मानना है कि यूएसएस त्रिपोली की तैनाती सिर्फ ताकत दिखाने के लिए नहीं है, बल्कि इसके जरिए अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाने, ईरानी गतिविधियों पर नजर रखने और जरूरत पड़ने पर जमीनी ऑपरेशन को सपोर्ट करने की तैयारी कर रहा है.

यह भी पढ़ें

बहरहाल, यह संघर्ष अब अपने चौथे सप्ताह में पहुंच चुका है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. अमेरिका और ईरान दोनों ही पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे हैं. ऐसे में पूरी दुनिया की नजरें इस क्षेत्र पर टिकी हैं, क्योंकि इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर भी गहरा प्रभाव डाल सकता है.

अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...