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भारत में कम होंगे घरेलू गैस के दाम! मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच ‘सर्व शक्ति’ का सफल सफर जारी, 45,000 टन LPG लेकर पार किया हॉर्मुज

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत को राहत मिली है. LPG टैंकर ‘सर्व शक्ति’ सफलतापूर्वक स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पार कर 45,000 टन गैस लेकर भारत आ रहा है. इससे देश में गैस सप्लाई सुधरने और बढ़ती कीमतों पर लगाम लगने की उम्मीद है.

Image Source: Canva
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मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और समुद्री नाकेबंदी के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है. एलपीजी टैंकर (LPG) ‘सर्व शक्ति’ ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज जैसे संवेदनशील और खतरनाक समुद्री मार्ग को सफलतापूर्वक पार कर लिया है. ऐसे समय में जब अमेरिका की नाकेबंदी और ईरान से बढ़ते तनाव के कारण इस रास्ते से जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो चुकी है, इस जहाज का सुरक्षित पारगमन भारत के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.

जानकारी के मुताबिक, ‘सर्व शक्ति’ करीब 45,000 टन एलपीजी गैस लेकर भारत की ओर बढ़ रहा है. यह गैस मुख्य रूप से घरेलू रसोई में इस्तेमाल होती है, इसलिए इसकी आपूर्ति सीधे आम लोगों से जुड़ी हुई है. जहाज में 18 भारतीय चालक दल के सदस्य भी सवार हैं, जो इस चुनौतीपूर्ण सफर को पूरा कर रहे हैं. MarineTraffic के आंकड़ों के अनुसार, यह जहाज ईरान के लारक द्वीप के करीब से गुजरते हुए तेहरान द्वारा तय किए गए सुरक्षित मार्ग का पालन करते हुए आगे बढ़ा. उम्मीद है कि LPG के टैंकर आने से भारत में बढ़ रहे LPG के दाम में ना सिर्फ़ ठहराव आएगा बल्कि दाम अपने पुराने स्तर पर भी आएंगे.

संकट के बीच दुर्लभ 

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स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री मार्गों में से एक है. लेकिन हालिया तनाव के कारण यहां जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई थी. ऐसे में ‘सर्व शक्ति’ का इस रास्ते से गुजरना एक दुर्लभ घटना मानी जा रही है. शनिवार को यह जहाज लारक और क़ेश्म द्वीपों के पास से गुजरते हुए ओमान की खाड़ी में प्रवेश करता देखा गया. यह जहाज पहले भी पर्शियन गल्फ और भारत के बीच आवाजाही करता रहा है, लेकिन इस बार का सफर कहीं ज्यादा चुनौतीपूर्ण और जोखिम भरा था. खास बात यह भी है कि जहाज पर भारतीय चालक दल की मौजूदगी को सुरक्षा रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जो इस तरह के तनावपूर्ण हालात में अपनाई जाती है.

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इंडियन ऑयल बना खरीदार

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, इस कार्गो का खरीदार भारत की सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन है. हालांकि कंपनी की ओर से इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन यह साफ है कि इस सप्लाई से देश में एलपीजी की कमी को कुछ हद तक कम किया जा सकेगा. ‘सर्व शक्ति’ की यह यात्रा इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि अमेरिका द्वारा ईरान से जुड़े जहाजों पर नाकेबंदी के बाद यह भारत से जुड़ा पहला दर्ज पारगमन है. इस नाकेबंदी के बाद हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की संख्या लगभग शून्य हो गई थी.

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भारत में बढ़ा ऊर्जा संकट, लोगों में चिंता

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और दूसरा सबसे बड़ा एलपीजी उपभोक्ता है. ऐसे में मिडिल ईस्ट से सप्लाई बाधित होने का सीधा असर देश की ऊर्जा व्यवस्था पर पड़ा है. हालात ऐसे बन गए थे कि कई जगहों पर एलपीजी की कमी के कारण लंबी कतारें और घबराहट देखने को मिली. सरकार ने इस स्थिति से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं. बंदरगाहों को निर्देश दिए गए हैं कि एलपीजी टैंकरों को प्राथमिकता दी जाए और तेजी से अनलोडिंग की जाए. इसके साथ ही घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है, ताकि सप्लाई और डिमांड के बीच संतुलन बनाया जा सके.

तनाव के कारण बाधित हुआ था ट्रांजिट

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अप्रैल के महीने में स्थिति तब और बिगड़ गई थी जब ईरान ने पहले जहाजों को गुजरने की अनुमति दी, लेकिन बाद में उसकी सेना ने कुछ जहाजों पर फायरिंग कर दी. इससे कई जहाजों को बीच रास्ते से ही वापस लौटना पड़ा. हालांकि ‘देश गरिमा’ नाम का एक भारतीय टैंकर किसी तरह ट्रांसपोंडर बंद करके निकलने में सफल रहा था. इस घटना के बाद हॉर्मुज में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई थी. लेकिन भारत ने कूटनीतिक स्तर पर सक्रियता दिखाते हुए ईरान के साथ बातचीत की और अब तक आठ एलपीजी जहाजों को इस रास्ते से निकालने में सफलता पाई है.

तकनीकी चुनौतियां और रणनीतिक प्रबंधन

‘सर्व शक्ति’ की यात्रा सिर्फ राजनीतिक ही नहीं, बल्कि तकनीकी रूप से भी चुनौतीपूर्ण रही है. इस क्षेत्र में इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप के कारण जहाजों की लोकेशन ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है. कई बार जहाज अपनी लोकेशन छिपाने के लिए ट्रांसपोंडर बंद कर देते हैं, जिससे उनकी गतिविधियों पर नजर रखना और भी कठिन हो जाता है. बताया जा रहा है कि इस जहाज का प्रबंधन दुबई स्थित फोरसाइट ग्रुप सर्विसेज लिमिटेड के पास है. वहीं इसका मालिकाना हक एक विदेशी कंपनी के पास बताया गया है. हालांकि इस पर किसी भी कंपनी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है.

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बताते चलें कि ‘सर्व शक्ति’ का सफल पारगमन भारत के लिए राहत का संकेत जरूर है, लेकिन संकट अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. हॉर्मुज में अब भी जहाजों की आवाजाही सामान्य नहीं हो पाई है. ऐसे में भारत को ऊर्जा सुरक्षा के लिए वैकल्पिक रास्तों और घरेलू उत्पादन पर लगातार ध्यान देना होगा. फिलहाल इस जहाज के भारत पहुंचने से देश में एलपीजी की सप्लाई को थोड़ी मजबूती मिलने की उम्मीद है. आम लोगों के लिए यह खबर राहत देने वाली है, क्योंकि इससे रसोई गैस की उपलब्धता में सुधार हो सकता है और बढ़ती कीमतों पर भी कुछ हद तक नियंत्रण लग सकता है.

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