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भारत में आमने-सामने भिड़े ईरान और UAE, BRICS की बैठक में गरमाया माहौल, जानें किसने किया बीच-बचाव
नई दिल्ली में चल रही BRICS बैठक में उस समय तनाव बढ़ गया, जब ईरान और UAE के प्रतिनिधियों के बीच पश्चिम एशिया संकट को लेकर तीखी बहस हो गई. ईरान के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने UAE पर ईरान विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया, जिसके बाद माहौल इतना गर्म हो गया कि रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को बीच-बचाव करना पड़ा.
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भारत की राजधानी नई दिल्ली में चल रही ब्रिक्स (BRICS) देशों की अहम बैठक उस वक्त अचानक सुर्खियों में आ गई, जब ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के प्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस शुरू हो गई. पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ रहे तनाव को लेकर दोनों देशों ने एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद बैठक का माहौल बेहद गर्म हो गया. हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को खुद बीच में आकर मामला संभालना पड़ा.
ईरान ने UAE पर लगाए गंभीर आरोप
दरअसल, ब्रिक्स देशों की इस बैठक में पश्चिम एशिया संकट और क्षेत्रीय सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा बना हुआ है. इसी दौरान ईरान के कानूनी और अंतरराष्ट्रीय मामलों के उप-विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी (Kazem Gharibabadi) ने UAE पर बेहद गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान के खिलाफ सैन्य आक्रामकता को बढ़ावा देने और उसे आसान बनाने में अहम भूमिका निभाई है. उनका कहना था कि जो देश खुद तनाव फैलाने में शामिल हो, उसे ईरान पर आरोप लगाने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है.
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UAE ने भी ईरान को घेरा
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बैठक में मौजूद सूत्रों के मुताबिक, जैसे ही UAE के विदेश राज्य मंत्री अल मारर की बोलने की बारी आई, उन्होंने सीधे ईरान को निशाने पर ले लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान पड़ोसी देशों के खिलाफ आक्रामक रवैया अपना रहा है और क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल रहा है. इस बयान के बाद माहौल और ज्यादा तनावपूर्ण हो गया.
अमेरिका को लेकर ईरान का बड़ा दावा
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ईरान की तरफ से तुरंत जवाब दिया गया. ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने दावा किया कि UAE अपनी जमीन का इस्तेमाल अमेरिका को ईरान विरोधी गतिविधियों के लिए करने दे रहा है. ईरान ने यहां तक कहा कि UAE केवल सहयोगी नहीं बल्कि खुद इस पूरे संघर्ष में एक सक्रिय पक्ष बन चुका है.
संयुक्त राष्ट्र का हवाला देकर पेश किए सबूत
काजेम गरीबाबादी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 1974 के प्रस्ताव का हवाला देते हुए कहा कि ईरान के पास हर उस लड़ाकू विमान का रिकॉर्ड मौजूद है जो UAE से उड़ान भरकर ईरान विरोधी मिशन में शामिल हुआ. उन्होंने दावा किया कि समय, तारीख और उड़ान मार्ग तक का पूरा ब्यौरा ईरान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को भेजा है.
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ईरानी दूतावास का बड़ा बयान
भारत में ईरानी दूतावास ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बयान जारी करते हुए कहा कि ईरान ने अब तक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को 120 आधिकारिक डिप्लोमैटिक नोटिस भेजे हैं. इनमें उन सभी घटनाओं का जिक्र है जिनमें ईरान के मुताबिक UAE की भूमिका सामने आई है. ईरान ने यह भी कहा कि उसके नागरिकों और बुनियादी ढांचे को लगातार निशाना बनाया जा रहा है, इसलिए आत्मरक्षा के तहत जवाब देना उसकी मजबूरी बन गया.
आत्मरक्षा के अधिकार की बात
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ईरान ने साफ कहा कि अगर किसी देश की जमीन का इस्तेमाल उसके खिलाफ सैन्य गतिविधियों के लिए होगा, तो वह उसे केवल सहयोग नहीं बल्कि प्रत्यक्ष आक्रामकता मानेगा. यही वजह है कि ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों और उनसे जुड़ी सुविधाओं को निशाना बनाने की बात कही. ईरान का दावा है कि उसकी यह कार्रवाई संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत आत्मरक्षा के अधिकार के दायरे में आती है.
BRICS के सामने खड़ी हुई नई चुनौती
इस पूरे घटनाक्रम ने ब्रिक्स संगठन के सामने नई मुश्किल खड़ी कर दी है. ब्रिक्स में किसी भी फैसले के लिए सभी सदस्य देशों की सहमति जरूरी होती है. ऐसे में ईरान और UAE के बीच खुली टकराव की स्थिति संगठन के लिए सिरदर्द बन गई है. अब तक वेस्ट एशिया संकट पर कोई साझा बयान तैयार नहीं हो पाया है.
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तेल और गैस सप्लाई पर भी असर
भारत की मेजबानी में हो रही यह बैठक इसलिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव का असर पूरी दुनिया की तेल और गैस सप्लाई पर पड़ रहा है. जानकारों का मानना है कि अगर ईरान और UAE अपने-अपने रुख पर अड़े रहे, तो ब्रिक्स बैठक किसी ठोस निष्कर्ष तक पहुंचने में मुश्किल महसूस कर सकती है.
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बहरहाल, दिल्ली में हुई इस तीखी बहस ने साफ कर दिया है कि वेस्ट एशिया का संकट अब केवल क्षेत्रीय मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि इसका असर वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है.