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गंगा, लक्ष्मण झूला और वो एहसास... ऋषिकेश में क्यों रो पड़ीं नीदरलैंड की फिल्ममेकर ईशा ब्रैंडरहॉर्स्ट?
नीदरलैंड की फिल्ममेकर ईशा ब्रैंडरहॉर्स्ट ऋषिकेश पहुंचकर भावुक हो गईं. लक्ष्मण झूला पर चलते हुए उनके आंसू छलक पड़े. उन्होंने बताया कि गंगा, मंदिरों की घंटियों और ऋषिकेश के माहौल ने उन्हें भीतर तक छू लिया.
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क्या आप कभी किसी ऐसी जगह गए हैं जहां पहुंचते ही आंखें भर आई हों. ऐसा ही कुछ हुआ नीदरलैंड की जानी मानी फिल्ममेकर ईशा ब्रैंडरहॉर्स्ट के साथ. उत्तराखंड की वादियों में बसा ऋषिकेश उनके लिए सिर्फ एक शहर नहीं बल्कि एक एहसास बन गया.
हाल ही में ईशा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में वह ऋषिकेश के लक्ष्मण झूला पुल पर चलते हुए फूट फूट कर रोती हुई नजर आ रही हैं. उन्होंने खुद बताया कि इस जगह ने उनके दिल को कुछ इस तरह छुआ कि वह खुद को रोक नहीं पाईं.
कौन हैं ईशा ब्रैंडरहॉर्स्ट?
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ईशा ब्रैंडरहॉर्स्ट पेशे से एक कहानीकार और फिल्म निर्माता हैं. वह दुनिया भर में घूम घूम कर अलग अलग लोगों की कहानियां कैमरे में कैद करती हैं. भारत उनकी बकेट लिस्ट में लंबे समय से था. जब वह अपनी भारत यात्रा के दौरान ऋषिकेश पहुंचीं तो उन्हें लगा जैसे उनकी तलाश पूरी हो गई.उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि भारत ने उनकी सोचने की दिशा ही बदल दी है. ऋषिकेश की हवा, गंगा का बहता पानी और मंदिरों की घंटियों ने उन्हें अंदर तक शांत कर दिया.
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पुल पर चलते हुए क्यों रो पड़ीं ईशा?
वीडियो में ईशा ने अपने दिल की बात खुलकर कही है. उन्होंने कहा कि ऋषिकेश के पुल पर चलने से पहले तक उन्हें कभी भी अपनापन महसूस नहीं हुआ था. उन्होंने बताया कि मैं अपनी जिंदगी में बहुत मजबूत बनने की कोशिश कर रही थी. मैंने अपने चारों तरफ एक दीवार बना ली थी ताकि कोई मुझे दुख न पहुंचा सके.जैसे ही वह पुल पर आगे बढ़ीं, उनके अंदर रुका हुआ दर्द आंसुओं के रूप में बाहर आ गया. ईशा कहती हैं कि मैं जोर जोर से रोने लगी. मैं लंबे समय से खुलकर रोई नहीं थी. उस पल मुझे लगा जैसे मैं आखिरकार घर आ गई हूं. मुझे यहां एक सच्चा जुड़ाव महसूस हुआ.
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सोशल मीडिया पर क्यों हो रहा है वीडियो वायरल
ईशा के इस वीडियो को लाखों लोग देख चुके हैं. कमेंट सेक्शन में लोग अपने अपने अनुभव लिख रहे हैं. एक यूजर ने लिखा कि ऋषिकेश की एनर्जी ही अलग है. यहां जो शांति मिलती है वह दुनिया में कहीं नहीं मिलती. दूसरे यूजर ने लिखा कि आपका इस जगह से पुराना नाता रहा होगा. तभी ऐसा गहरा एहसास हुआ.कई भारतीय यूजर्स ने उनका स्वागत करते हुए लिखा कि भारत सभी को अपनाता है. कुछ विदेशी यूजर्स ने भी कहा कि वह भी ऋषिकेश जाकर ऐसी ही शांति महसूस करना चाहते हैं. एक यूज़र ने लिखा 'ऋषिकेश का माहौल और वाइब्स बहुत अलग और ज़बरदस्त हैं... जब भी मैं वहाँ जाता हूँ, मुझे ऐसा ही महसूस होता है.'
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बताते चलें कि ऋषिकेश को दुनिया योग कैपिटल के नाम से जानती है. यहां हर साल हजारों विदेशी सैलानी आंतरिक शांति की तलाश में आते हैं. गंगा आरती, योग और पहाड़ों की खामोशी लोगों को भीतर से जोड़ती है. ईशा की कहानी भी इसी बात का सबूत है कि ऋषिकेश सिर्फ घूमने की जगह नहीं बल्कि खुद को खोजने की जगह है