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आंखें नम, चेहरे पर जान बचने की खुशी...श्रीलंका में चक्रवात दितवाह के बीच देवदूत बनी IAF, जर्मनी, UK...सबने कहा शुक्रिया

श्रीलंका में चक्रवात ‘दितवाह’ के कारण मची भारी तबाही के बीच भारतीय वायुसेना देवदूत बनकर उभरी है. जान बचने की खुशी, "पड़ोसी पहले" की भारत की भावना और मानवीय कार्यों को देखकर लोगों का दिल भर आया है. करीब 10 देशों के नागरिकों ने दिल खोलकर भारत और भारतीय वायुसेना की सराहना की है. अब इसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं.

आंखें नम, चेहरे पर जान बचने की खुशी...श्रीलंका में चक्रवात दितवाह के बीच देवदूत बनी IAF, जर्मनी, UK...सबने कहा शुक्रिया
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चक्रवात ‘दितवाह’ से श्रीलंका में व्यापक विनाश हुआ है. संकट की इस घड़ी में भारत ने तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया. भारतीय वायुसेना ने श्रीलंका में फंसे दुनिया के कई देशों के नागरिकों के लिए देवदूत की तरह काम किया है. उसने बांग्लादेश, श्रीलंका, नेपाल के लोगों के साथ जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका, स्लोवेनिया और यूनाइटेड किंगडम जैसे देशों के नागरिकों महिलाओं और बच्चों को सुरक्षित निकाला. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में साफ दिखाई देता है कि कैसे मुश्किल में फंसे बच्चे, बुजुर्ग और विदेशी नागरिकों को भारतीय वायुसेना बचा रही है और लोग दिल खोलकर उसका आभार व्यक्त कर रहे हैं. एक अन्य वीडियो में लोग रेस्क्यू के बाद ‘भारत माता की जय’ के नारे भी लगाते दिखे.

बांग्लादेश से लेकर UK तक, जो भी फंसा, IAF ने सबको बचाया

भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ के तहत भारतीय वायुसेना ने श्रीलंका में फंसे कई देशों के नागरिकों को निकाला. मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ‘एक्स’ पर बताया कि IAF के MI-17 हेलीकॉप्टरों ने जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका, स्लोवेनिया और यूके के नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकाला.

भारतीय वायुसेना ने बताया कि उसने श्रीलंकाई अधिकारियों के साथ मिलकर भूस्खलन से प्रभावित कोटमाले क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बचाव अभियान चलाया, जो पूरी तरह सड़क मार्ग से कटा हुआ है.

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IAF की वजह से बची कई देशों के नागरिकों की जान

दिनभर चले अभियानों में भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टरों ने कुल 45 फंसे यात्रियों को निकाला, जिनमें 6 गंभीर रूप से घायल और 4 शिशु शामिल थे. इन्हें सुरक्षित कोलंबो पहुंचाया गया. इनमें 12 भारतीय और जर्मनी, दक्षिण अफ्रीका, स्लोवेनिया, यूके, पोलैंड, बेलारूस, ईरान, ऑस्ट्रेलिया, पाकिस्तान और बांग्लादेश के 30 से अधिक विदेशी नागरिक शामिल थे. साथ ही कई श्रीलंकाई नागरिकों को भी सुरक्षित निकाला गया.

श्रीलंकाई सेना के जवानों को भी वायुसेना ने पहुंचाई मदद

जमीनी राहत कार्यों को तेज करने के लिए भारतीय वायुसेना ने 57 श्रीलंकाई सेना के जवानों को भी प्रभावित क्षेत्रों में एयरलिफ्ट कर पहुंचाया.

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श्रीलंका में फंसे भारतीयों के लिए अतिरिक्त हेल्पलाइन

कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग ने श्रीलंका में फंसे भारतीय नागरिकों के लिए अतिरिक्त आपातकालीन हेल्पलाइन शुरू की है. फंसे हुए भारतीय इन नंबरों पर संपर्क कर सकते हैं:
+94 77 372 7832 (व्हाट्सऐप उपलब्ध)
+94 77 122 9026 (व्हाट्सऐप उपलब्ध)

उच्चायोग ने बताया कि फंसे भारतीयों को हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है.

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भारत ने भेजी बड़ी मात्रा में राहत सामग्री

एक दिन पहले वायुसेना के C-130 और IL-76 विमान हिंडन एयरबेस से श्रीलंका के लिए रवाना हुए. इन विमानों में 21 टन राहत सामग्री, 80 से अधिक NDRF कर्मी और 8 टन उपकरण थे. रविवार को भारतीय वायुसेना ने बताया कि यह सामग्री कोलंबो पहुंच चुकी है. भारतीय दल फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने में भी जुटा है.

तमिलनाडु में भी राहत कार्य तेज कर दिए गए हैं, जहां वायुसेना के विमान आवश्यक उपकरण और राहतकर्मी लेकर पहुंचे हैं.

भारत ने दोहराई ‘नेबर फर्स्ट’ की भावना

भारत ने पड़ोसी देशों की मदद के लिए तुरंत मानवीय सहायता पहुंचाकर ‘नेबर फर्स्ट’ नीति को बखूबी निभाया है. पूरे अभियान को ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ नाम दिया गया है. इसमें बचाव दलों की तैनाती के साथ राहत सामग्री की आपूर्ति निरंतर जारी है.

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ऑपरेशन सागर बंधु में पूरी ताकत से जुटी भारतीय वायुसेना

राहत कार्यों को और तेज करने के लिए भारतीय वायुसेना ने कोलंबो में MI-17 V5 हेलीकॉप्टर तैनात किए हैं, जिससे प्रभावित इलाकों तक तेजी से मदद पहुंच सके. साथ ही बड़े पैमाने पर निकासी अभियान के लिए C-17, C-130 और IL-76 विमान तैयार रखे गए हैं.

वायुसेना के अनुसार भेजी गई सामग्री में राशन, दवाइयां, मेडिकल किट, बिस्कुट क्यूब्स और अन्य आपदा सामग्री शामिल है. C-17 ग्लोबमास्टर ने पुणे से चेन्नई तक एक और NDRF टीम व भारी उपकरण पहुंचाए हैं ताकि दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्रों में राहत कार्य तेज हो सके.

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यह पूरा अभियान मानवता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है. भारतीय वायुसेना ने साफ कहा है कि वह जीवन बचाने और पड़ोसी देशों की किसी भी संकट की घड़ी में मदद करने के लिए सदैव तैयार है. ‘ऑपरेशन सागर बंधु’ भारत–श्रीलंका की मित्रता और क्षेत्रीय सहयोग का एक मजबूत और संवेदनशील उदाहरण बनकर सामने आया है.

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