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बेंगलुरु डेकेयर केस : मासूमों को टॉर्चर करने वाली विजयलक्ष्मी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में

बेंगलुरु के चर्चित डेकेयर सेंटर में मासूम बच्चों के साथ कथित मारपीट और प्रताड़ना के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है. मुख्य आरोपियों में शामिल विजयलक्ष्मी को अदालत में पेश किया गया.

Image Credits: IANS
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बेंगलुरु के चर्चित डेकेयर सेंटर में मासूम बच्चों के साथ कथित मारपीट और प्रताड़ना के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपियों में शामिल विजयलक्ष्मी को अदालत में पेश किया, जहां 29वें अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) कोर्ट ने उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया. गिरफ्तारी के बाद उसे बेंगलुरु सेंट्रल जेल भेज दिया गया है.

बेंगलुरु डेकेयर प्रताड़ना केस में बड़ी कार्रवाई

पुलिस ने बताया कि वीडियो फुटेज में विजयलक्ष्मी को छोटे बच्चों के साथ मारपीट करते हुए देखा गया था, जिसके आधार पर उसे गिरफ्तार किया गया. वहीं मामले में एक अन्य आरोपी को भी हिरासत में लिया गया है और उसकी औपचारिक गिरफ्तारी की प्रक्रिया जारी है. बाकी फरार आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस की विशेष टीम लगातार छापेमारी कर रही है.

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जांच के दौरान पुलिस ने बताया कि यह मामला तब सामने आया जब डेकेयर सेंटर की कर्मचारी सुजाता को नौकरी से हटाया गया. पूछताछ के लिए उसे भी बुलाया गया है. पुलिस ने उसका मोबाइल फोन जब्त कर लिया है और उसमें मौजूद डेटा को रिकवर कर अहम सबूत जुटाने की कोशिश कर रही है.

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डेकेयर सेंटर के आठ से दस कर्मचारियों से पूछताछ जारी 

पुलिस डिजिटल साक्ष्यों की जांच, सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल और गवाहों के बयान दर्ज कर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है. अब तक डेकेयर सेंटर के आठ से दस कर्मचारियों से पूछताछ की जा चुकी है. इसके अलावा वहां पढ़ने वाले तीन बच्चों के अभिभावकों के भी बयान दर्ज किए गए हैं.

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इस बीच कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खड़गे ने घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बच्चों के खिलाफ अपराधों को लेकर सरकार की "जीरो टॉलरेंस" नीति है. उन्होंने संबंधित विभाग से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है.

प्रियंक खड़गे ने कहा कि डेकेयर सेंटर और क्रेच संचालकों को तय मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) का पालन करना होगा. उन्होंने कहा कि बच्चों की देखभाल करने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति से पहले उनका बैकग्राउंड वेरिफिकेशन अनिवार्य रूप से किया जाना चाहिए. खासकर पांच से दस वर्ष तक के बच्चों की देखभाल करने वाली संस्थाओं से कहीं अधिक जिम्मेदारी और उच्च मानकों की अपेक्षा की जाती है.

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने ने मचा बवाल

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यह मामला तब सामने आया जब सोशल मीडिया पर कुछ चौंकाने वाले वीडियो वायरल हुए. इन वीडियो में ब्रूकफील्ड स्थित एक निजी कंपनी के परिसर में संचालित सोसायटी जनरल बेबी केयर सेंटर में छोटे बच्चों के साथ कथित मारपीट और अमानवीय व्यवहार होता दिखाई दिया. वीडियो बाद में बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) तक भी पहुंचाए गए.

मामले में पांच आरोपियों की पहचान मंजुला, विजयलक्ष्मी, भवानी, सिंधु और बिंदु के रूप में हुई है.

बेंगलुरु पुलिस आयुक्त सीमांत कुमार सिंह ने वीडियो देखने के बाद इस घटना को "गंभीर" और "जघन्य" बताया. मामले की जांच के लिए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की गई है, जिसने डेकेयर सेंटर का निरीक्षण किया है और सीसीटीवी फुटेज की गहन जांच की जा रही है.

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आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज़

एचएएल पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 351(2) तथा किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम की धारा 75 के तहत मामला दर्ज किया गया है.

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शिकायतकर्ता तिलकेश कुमार के अनुसार, आरोपियों ने मासूम बच्चों के साथ शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना की. आरोप है कि बच्चों को पीटा जाता था, बाथरूम में बंद किया जाता था, डराने के लिए वॉशिंग मशीन में बैठाया जाता था, जबरन वेस्टर्न टॉयलेट पर बैठाया जाता था और उनके मुंह में पानी की पाइप डालकर उन्हें प्रताड़ित किया जाता था.

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