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भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, विभागीय जांच को योगी सरकार ने बनाया पारदर्शी और जवाबदेह

योगी सरकार ने जांच अधिकारी की भूमिका भी स्पष्ट कर दी है. जांच अधिकारी उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर आरोपों के सिद्ध, आंशिक रूप से सिद्ध या असिद्ध होने का निष्कर्ष देंगे.

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10 Oct 2026
( Updated: 10 Oct 2026
04:14 PM )
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, विभागीय जांच को योगी सरकार ने बनाया पारदर्शी और जवाबदेह
Image Credit: UPID
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जीरो टॉलरेंस की नीति और पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासन के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने विभागीय जांच व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया है. समाज कल्याण विभाग ने उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 1999 के नियम-7 के तहत होने वाली विभागीय जांचों के लिए मानकीकृत प्रारूप और 10 बिंदुओं की अनिवार्य जांच सूची लागू की है. विशेष सचिव प्रवीण मिश्र ने इस संबंध में शासनादेश जारी किया है. 

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जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता

योगी सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए विभागीय जांच प्रक्रिया को स्पष्ट एवं व्यवस्थित किया है. नए मानकीकृत प्रारूप के तहत जांच अधिकारियों को निर्धारित प्रक्रिया के प्रत्येक चरण का विधिवत अभिलेखीकरण करना होगा. इससे जांच आख्या की गुणवत्ता बेहतर होगी और शासन स्तर पर मामलों के परीक्षण में भी स्पष्टता आएगी.

प्रत्येक आरोप का होगा स्वतंत्र और साक्ष्य आधारित परीक्षण

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नई व्यवस्था की खास बात यह है कि आरोपपत्र में दर्ज प्रत्येक आरोप का अलग-अलग परीक्षण किया जाएगा. जांच अधिकारी को आरोप, संबंधित अधिकारी के उत्तर, उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के परीक्षण के साथ मौखिक सुनवाई का विवरण भी दर्ज करना होगा. इसके आधार पर प्रत्येक आरोप के संबंध में स्पष्ट और कारणयुक्त निष्कर्ष दिया जाएगा. इससे विभागीय जांच प्रक्रिया अधिक तथ्यपरक और निष्पक्ष बनेगी.

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10 बिंदुओं की अनिवार्य जांच सूची से मजबूत होगी व्यवस्था

जांच आख्या के साथ 10 बिंदुओं की अनिवार्य जांच सूची और अनुपालन प्रमाण-पत्र संलग्न करना जरूरी होगा. इसमें आरोपपत्र की तामीली, लिखित उत्तर, अभिलेखों के निरीक्षण का अवसर, गवाहों की जिरह और मौखिक सुनवाई सहित आवश्यक प्रक्रियाओं का विवरण शामिल होगा. निर्धारित प्रक्रियाओं का पूरा पालन नहीं होने पर जांच आख्या को पूर्णता के लिए वापस भेजा जा सकेगा. इससे जांच प्रक्रिया में गुणवत्ता और जिम्मेदारी दोनों सुनिश्चित होंगी.

जांच और दंड निर्धारण की भूमिका स्पष्ट, निष्पक्षता को मिलेगा बल

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योगी सरकार ने जांच अधिकारी की भूमिका भी स्पष्ट कर दी है. जांच अधिकारी उपलब्ध साक्ष्यों और सुनवाई के आधार पर आरोपों के सिद्ध, आंशिक रूप से सिद्ध या असिद्ध होने का निष्कर्ष देंगे. दंड के संबंध में निर्णय सक्षम प्राधिकारी द्वारा नियमों के अनुसार लिया जाएगा. इससे विभागीय जांच में निष्पक्षता और संस्थागत प्रक्रिया मजबूत होगी.

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