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योगी सरकार का ‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’, UP में स्मार्ट पुलिसिंग को नई ताकत, 12.85 लाख CCTV कैमरों से बढ़ी निगरानी
महिला सुरक्षा योगी सरकार की प्राथमिकता है. इसलिए हर थाने में हेल्प डेस्क और 8,694 महिला बीट हैं. अपराधियों के खिलाफ सख्त अभियान और पुलिस कार्रवाई में 316 अपराधी मुठभेड़ में मारे गए हैं.
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उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाने और आम नागरिकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के लिए योगी सरकार ने पुलिसिंग को तकनीक, जनसहभागिता और त्वरित कार्रवाई से जोड़ने पर जोर दिया है. ऑपरेशन त्रिनेत्र के तहत प्रदेश में 12.85 लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरों की स्थापना स्मार्ट पुलिसिंग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.
वहीं, महिला सुरक्षा के लिए प्रत्येक थाने में महिला हेल्प डेस्क, 8,694 महिला बीटों का संचालन और एंटी रोमियो अभियान के तहत व्यापक कार्रवाई ने सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ किया गया है.
ऑपरेशन त्रिनेत्र से स्मार्ट पुलिसिंग को नई पहचान
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योगी सरकार ने पुलिस व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया है. इसी दिशा में शुरू किया गया ऑपरेशन त्रिनेत्र अपराध नियंत्रण, संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी और घटनाओं की जांच में सीसीटीवी कैमरों की उपयोगिता बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम बनकर उभरा है.
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10 जुलाई 2023 से 30 सितंबर 2026 तक प्रदेश में 12.85 लाख से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए है. इतने बड़े पैमाने पर कैमरों की स्थापना से सार्वजनिक स्थानों और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी व्यवस्था को व्यापक आधार मिला है.
सीसीटीवी कैमरों की उपलब्धता अपराध की घटनाओं के बाद साक्ष्य जुटाने, संदिग्धों की पहचान करने और पुलिस जांच को दिशा देने में मददगार हो सकती है. तकनीक आधारित इस पहल के साथ सरकार का उद्देश्य पुलिस की पहुंच और निगरानी क्षमता को मजबूत करना है.
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महिला सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता, हर थाने में महिला हेल्प डेस्क
महिलाओं की सुरक्षा और उनकी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई योगी सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है. प्रदेश के सभी थानों में महिला हेल्प डेस्क स्थापित की गई हैं, ताकि महिलाएं अपनी समस्याएं सहजता से पुलिस के सामने रख सकें. इसके साथ ही महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती और महिला बीट व्यवस्था के जरिए पुलिस और महिलाओं के बीच संवाद को मजबूत करने का प्रयास किया गया है.
प्रदेश में 19,045 महिला पुलिसकर्मियों की नियुक्ति के साथ 8,694 महिला बीटों का आवंटन किया गया है. इससे महिलाओं तक पुलिस की पहुंच बढ़ाने, उनकी समस्याओं को समझने और स्थानीय स्तर पर सुरक्षा संबंधी शिकायतों पर ध्यान देने की व्यवस्था को बल मिला है. महिला हेल्प डेस्क और महिला बीटों का संयोजन पुलिसिंग को अधिक संवेदनशील और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है.
एंटी रोमियो अभियान से महिलाओं की सुरक्षा पर जोर
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महिलाओं और युवतियों की सुरक्षा के लिए एंटी रोमियो अभियान के तहत व्यापक स्तर पर जांच और कार्रवाई की गई. एक अप्रैल 2022 से 30 सितंबर 2026 तक अभियान के दौरान 87,45,228 स्थानों पर जांच की गई और 4.83 करोड़ से अधिक व्यक्तियों की जांच हुई. इस अवधि में 19,554 मुकदमे दर्ज किए गए, 24,434 व्यक्तियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की गई और 1.71 करोड़ से अधिक व्यक्तियों को चेतावनी दी गई.
माफिया और संगठित अपराध पर प्रहार
उत्तर प्रदेश में माफिया और संगठित अपराध के खिलाफ आर्थिक कार्रवाई को भी पुलिस रणनीति का अहम हिस्सा बनाया गया है. 25 सितंबर 2026 तक प्रदेश स्तर पर चिह्नित 68 माफिया और उनके गिरोहों के सदस्यों और सहयोगियों के विरुद्ध कार्रवाई की निगरानी की जा रही थी.
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यूपी पुलिस के मुताबिक, इन कार्रवाइयों के तहत 4,558 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त या ध्वस्त की गई अथवा अवैध कब्जे से मुक्त कराई गई. माफिया गिरोहों के लगभग 1,508 सदस्यों और सहयोगियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए 923 मुकदमे दर्ज किए गए और 653 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. गैंगस्टर अधिनियम, गुंडा अधिनियम और राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई.
पुलिसकर्मियों ने दिखाया साहस और उठाया जोखिम
20 मार्च 2017 से 30 सितंबर 2026 तक विभिन्न कार्रवाइयों में 316 अपराधी मुठभेड़ में मारे गए और 12,821 घायल हुए. इसी अवधि में पुलिस बल के 18 जवानों ने अपने प्राण गंवाए, जबकि 1,949 पुलिसकर्मी घायल हुए.
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योगी सरकार के कार्यकाल में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ पुलिस बल की सक्रियता और जवाबदेही पर जोर दिया गया है. कानून का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है कि प्रत्येक कार्रवाई निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और जवाबदेही के अनुरूप हो. अपराध नियंत्रण की सफलता का आकलन नागरिकों की सुरक्षा, अपराध की रोकथाम और न्यायिक प्रक्रिया के प्रभावी संचालन के आधार पर भी किया जाना चाहिए.
नशे के कारोबार और जहरीली शराब के खिलाफ व्यापक कार्रवाई
मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए प्रदेश में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स गठित की गई है. गाजीपुर, बाराबंकी, गोरखपुर, मेरठ, सहारनपुर और झांसी में छह एंटी नारकोटिक्स थाने स्थापित किए गए हैं. इसके अतिरिक्त आठ क्षेत्रीय परिचालन इकाइयां और नोएडा में एक उप-इकाई स्थापित की गई है.
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एक जनवरी 2022 से 27 सितंबर 2026 तक मादक पदार्थों के विरुद्ध चलाए गए अभियान में 38,625 मुकदमे दर्ज किए गए. बरामद मादक पदार्थों का अनुमानित मूल्य 3,565 करोड़ रुपये से अधिक बताया गया है. वहीं, अवैध और जहरीली शराब के खिलाफ अभियान में 2,89,282 मुकदमे दर्ज किए गए और बरामदगी का अनुमानित मूल्य 576 करोड़ रुपये से अधिक रहा. शराब संबंधी मामलों में 13,257 मामलों में सजा भी दिलाई गई.
सी-प्लान ऐप से 21.32 लाख नागरिक जुड़े
सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावी बनाने में पुलिस और आम नागरिकों के बीच संवाद की भी महत्वपूर्ण भूमिका बन चुकी है. इसी उद्देश्य से सी-प्लान ऐप के माध्यम से 21,32,467 संभ्रांत नागरिकों से नियमित संवाद किया गया. इसमें 1,88,532 पुलिसकर्मी जुड़े हैं.
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चिकित्सा सहायता से बीमा तक बढ़ाई गई सुविधाएं
कानून-व्यवस्था संभालने वाले पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए भी सरकार ने विभिन्न मदों में सहायता बढ़ाई है. सुख-सुविधा निधि का अनुदान 3.50 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5.50 करोड़ रुपये और कल्याण निधि का अनुदान आठ करोड़ रुपये से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये किया गया है. पुलिस शिक्षा निधि के तहत मेधावी बच्चों की छात्रवृत्ति के लिए अनुदान 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 75 लाख रुपये किया गया है.
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चिकित्सा प्रतिपूर्ति के लिए 340.92 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया. गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए 127 पुलिसकर्मियों को जीवन रक्षक निधि से 4.70 करोड़ रुपये की अग्रिम सहायता स्वीकृत की गई. पुलिसकर्मियों और उनके आश्रित परिवारों के लिए नकदरहित उपचार की सुविधा के तहत 4,97,992 कार्ड बनवाए जाने की प्रक्रिया पूरी की गई. पुलिस वेतन पैकेज में दुर्घटना बीमा की अधिकतम राशि 2.30 करोड़ रुपये और जीवन बीमा की राशि 20 लाख रुपये तक निर्धारित किया गया है.