Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...

योगी सरकार में अवैध वित्तीय गतिविधियों पर शिकंजा, मथुरा से गिरोह के सरगना समेत तीन गिरफ्तार

तीनों आरोपियों के खिलाफ मथुरा के थाना हाईवे में मुकदमा संख्या 990/2026 दर्ज किया गया है. मामले में भारतीय न्याय संहिता, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और ऑनलाइन गेमिंग के नियमन से संबंधित कानूनों की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है. आगे की विधिक कार्रवाई स्थानीय पुलिस कर रही है.

Image Credit: Facebook/MYogiAdityanath
Loading Ad...

योगी सरकार में संगठित अपराध और अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है. उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने ऑनलाइन गेमिंग, वीडियो कॉलिंग और लाइव होस्टिंग ऐप के माध्यम से अवैध वित्तीय गतिविधियां संचालित करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए उसके सरगना समेत तीन आरोपियों को मथुरा से गिरफ्तार किया है. आरोपियों की पहचान प्रवीण कुमार उर्फ प्रकाश, विपिन कुमार और अर्जुन दिवाकर के रूप में हुई है. एसटीएफ और मथुरा पुलिस की संयुक्त टीम ने यह कार्रवाई की. टीम ने आरोपियों से कार्रवाई के दौरान मोबाइल फोन, एक सीपीयू, तीन चेकबुक, एक पासबुक, एक आधार कार्ड, तीन डेबिट कार्ड, 58 स्क्रीनशॉट के प्रिंटआउट समेत अन्य सामान बरामद किया है.

एसटीएफ को लंबे समय से चैमेट ऐप के जरिए संदिग्ध वित्तीय गतिविधियां संचालित किए जाने की सूचनाएं मिल रही थीं. इसके बाद एसटीएफ मुख्यालय की साइबर टीम ने तकनीकी विश्लेषण, मुखबिरों से मिली जानकारी और अन्य माध्यमों से साक्ष्य जुटाए. जांच में सामने आया कि मथुरा में कुछ लोगों ने संगठित गिरोह बनाकर ऐप के जरिए कथित तौर पर अवैध धन अर्जित करने की व्यवस्था विकसित की थी.

गोरखनाथ मंदिर में शारदीय नवरात्र के विशेष अनुष्ठान का शुभारंभ, CM योगी ने की कलश स्थापना

Loading Ad...

लड़कियों से करा रहे थे लाइव होस्टिंग
एसटीएफ के मुताबिक गिरोह के सदस्य कथित तौर पर फर्जी तस्वीरों और पहचान का इस्तेमाल करके ऐप पर खाते बनाते थे. इन खातों के माध्यम से लड़कियों से लाइव होस्टिंग, वीडियो कॉलिंग और ऑनलाइन गेमिंग जैसी गतिविधियां कराई जाती थीं. आरोप है कि भुगतान और कमीशन की रकम प्राप्त करने के लिए बैंक खातों को ऐप से जोड़ा गया था. जांच में विदेशी संस्था फुलियाओ हांगकांग लिमिटेड से भुगतान मिलने की बात भी सामने आई है.

Loading Ad...

गिरफ्तार आरोपियों के बयानों के मुताबिक, गिरोह की गतिविधियों में लाइव होस्टिंग के साथ ऑनलाइन गेमिंग भी शामिल थी. एसटीएफ को संदेह है कि इस माध्यम का इस्तेमाल पेड वीडियोकॉल, अश्लील सामाग्री दिखाने समेत अवैध वित्तीय लेन-देन के लिए किया जा रहा था.

हैकर से मिलकर बनाया प्लान
पूछताछ में आरोपी प्रवीण कुमार ने बताया कि वर्ष 2023 में उसकी मुलाकात एक हैकर से हुई थी. हैकर ने उसे चैमेट वीडियो कॉलिंग ऐप के बारे में बताया और समझाया कि इस पर किसी दूसरे व्यक्ति की फोटो लगाकर फर्जी पहचान से खाता बनाया जा सकता है. खाते को यूपीआई, क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड से रिचार्ज किया जाता है. आरोपी के मुताबिक 300 रुपये में करीब 10 हजार कॉइन मिलते हैं. ऐप पर लड़कियां लाइव होस्टिंग करती हैं और उपयोगकर्ता उन्हें कॉइन के रूप में उपहार भेजते हैं. उपहार में मिले कॉइन का 50 प्रतिशत होस्ट को और बाकी 50 प्रतिशत कंपनी को मिलता है. 

Loading Ad...

वीडियो कॉलिंग से होने वाली कमाई में 60 प्रतिशत होस्ट और 40 प्रतिशत कंपनी का हिस्सा होता है. कॉइन जमा होने पर वे डॉलर के रूप में दिखाई देते हैं, जिन्हें अरी पे या ई-पे ऐप के जरिए बैंक खाते में स्थानांतरित किया जा सकता है. ऐप पर रंग का अनुमान लगाने, कार रेसिंग और लकीबॉल जैसे ऑनलाइन खेल भी उपलब्ध थे.

होटल में काम करने वाली लड़कियों को रखा
प्रवीण ने बताया कि ऐप की कार्यप्रणाली समझने के बाद उसने अपने होटल में काम करने वाली एक युवती के साथ मिलकर होस्टिंग के लिए लड़कियों की तलाश शुरू की. वह लड़कियों को 12 से 15 हजार रुपये मासिक वेतन देता था और उनके नाम से चैमेट पर फर्जी खाते बनाता था, जिन पर होस्ट अपनी असली पहचान छिपाकर काम करती थीं. कमाई प्राप्त करने के लिए उसने अपने, विपिन और सोनिया के बैंक खाते ऐप से जोड़ रखे थे. 

नवरात्रि पर CM योगी का महिलाओं को लेकर बड़ा संदेश, बोले- विकास की धुरी बनी नारी शक्ति

Loading Ad...

इन खातों में कमीशन की रकम ‘फुलियाओ हांगकांग लिमिटेड’ के नाम से आती थी. पूछताछ में बताया गया कि चैमेट ऐप का नाम बदलकर अब चिलचैट हो गया है और यह प्ले स्टोर पर इसी नाम से पंजीकृत है. प्रवीण ने इस ऐप के माध्यम से अपने और गिरोह के अन्य सदस्यों के बैंक खातों में करोड़ों रुपये अवैध रूप से अर्जित किए.

कई गिरोह ने अपनाया यही रास्ता
पूछताछ में अर्जुन दिवाकर ने बताया कि उसने वर्ष 2023 में यूट्यूब पर चैमेट ऐप के बारे में जानकारी देखी थी. इसके बाद उसने मथुरा के मोतीकुंज में एक ऑफिस किराये पर लिया, लड़कियों को काम पर रखा और ऐप पर होस्टिंग का काम शुरू कराया. वह फर्जी तस्वीरों और गलत नामों से खाते बनाता था, जिन पर उसके ऑफिस की होस्ट काम करती थीं. अर्जुन के अनुसार, ऐप का नाम बदलकर चिलचैट होने के बाद भी वे इस पर काम कर रहे हैं. आरोपियों ने यह भी बताया कि उनके अलावा देश और प्रदेश में अन्य गिरोह भी नियमों के विरुद्ध ऑनलाइन गेमिंग और वीडियो कॉलिंग के माध्यम से धन अर्जित कर रहे हैं.

यह भी पढ़ें

तीनों आरोपियों के खिलाफ मथुरा के थाना हाईवे में मुकदमा संख्या 990/2026 दर्ज किया गया है. मामले में भारतीय न्याय संहिता, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और ऑनलाइन गेमिंग के नियमन से संबंधित कानूनों की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है. आगे की विधिक कार्रवाई स्थानीय पुलिस कर रही है.

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...