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बंगाल के रण में कौन किस पर भारी? जानें BJP और ममता के बीच छिड़ी सियासी जंग की 10 मुख्य बातें

यह चुनाव ममता बनर्जी के लिए अपनी राजनीतिक जमीन बचाने की 'अंतिम परीक्षा' है, तो भाजपा के लिए बंगाल फतह करने का 'ऐतिहासिक मौका’. अब देखना होगा कि 4 मई को कौन किस पर भारी पड़ता है.

Image Source: IANS/Kuntal Chakrabarty
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पश्चिम बंगाल की अपनी एक अलग पहचान है और इस पहचान की बुनियाद पर ही बंगाल की राजनीति टिका हुआ है. जिसने भी इस राज्य की सियासत को समझा है, उसी ने सत्ता की कुर्सी संभाली है. साल 2011 से ममता बनर्जी बंगाल की मुख्यमंत्री हैं. हर पांच साल में चुनावी मुद्दों में थोड़ा-बहुत बदलाव हुआ है. बात चाहे हिंदू पलायन की हो, बांग्लादेशी घुसपैठियों की हो, दंगों की हो या फिर SIR जैसे मुद्दों की हो. ये तमाम मुद्दे चुनाव दर चुनाव राज्य की सियासत के केंद्र रहे हैं. 


वहीं, इस बार का बंगाल चुनाव ममता बनर्जी के लिए ‘परीक्षा’ और बीजेपी के लिए एक ‘बड़े मौके’ के तौर पर देखा जा रहा है. आइए आपको 10 पॉइंट्स में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का पूरा सियासी समीकरण समझाते हैं. 

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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की 10 मुख्य बातें-

  1.  ऐतिहासिक मतदान- इस बार के बंगाल विधानसभा चुनाव में सबसे अहम आंकड़ा मतदान प्रतिशत रहा है. बंगाल की जनता ने इस बार खुलकर वोट किया है. पहले चरण के 152 निर्वाचन क्षेत्रों में लगभग 93% वोटिंग हुई. दूसरे चरण के 142 निर्वाचन क्षेत्रों में भी यह आंकड़ा 90% के करीब रहा, जिसने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए.
  2. SIR पर विवाद- 2026 के चुनाव में 'विशेष सघन संशोधन'  यानी एसआईआर (SIR) सबसे विवादास्पद मुद्दा रहा. मतदान से पहले सूची से लगभग 90 लाख नाम हटा दिए गए. इनमें से 60 लाख से अधिक को मृत या अनुपस्थित श्रेणी में रखा गया, जबकि करीब 27 लाख मामलों पर अभी भी संशय बरकरार है.
  3. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का आरोप- SIR की प्रक्रिया को सीएम ममता बनर्जी ने एकतरफा कार्रवाई करार देते हुए बीजेपी पर मतदाताओं के एक बड़े वर्ग को मताधिकार से वंचित करने का आरोप लगाया. हालांकि, SIR प्रक्रिया से बीजेपी का कोई लेनादेना नहीं है. इसे चुनाव आयोग ने अंजाम दिया है.
  4. एग्जिट पोल (Exit Poll)- इतिहास रहा है कि पश्चिम बंगाल में एग्जिट पोल के अनुमान अक्सर सटीक साबित नहीं होते हैं.  2021 में कई एजेंसियों ने कांटे की टक्कर या बीजेपी की बढ़त बताई थी, लेकिन अंतिम नतीजे तृणमूल (TMC) की शानदार जीत (215 बनाम 77 सीटें) के रूप में सामने आए.
  5. 2026 के एक्जिट पोल- 2026 को लेकर एक्जिट पोल के आंकड़े बंटे हुए हैं. कुछ बीजेपी को स्पष्ट बहुमत दिखा रहे हैं, तो कुछ तृणमूल की मामूली जीत या त्रिशंकु विधानसभा की संभावना जता रहे हैं.
  6. बंगाल चुनाव में क्षेत्र का प्रभाव- बंगाल का चुनावी भूगोल स्पष्ट रूप से बंटा हुआ है. उत्तर बंगाल जैसे जलपाईगुड़ी और कूचबिहार जैसे क्षेत्र 2019 से ही बीजेपी के प्रभाव में हैं. साल 2021 में भी बीजेपी ने यहां से बेहतर प्रदर्शन किया था.
  7. दक्षिण बंगाल का क्षेत्र- कोलकाता और उसके आसपास के जिले टीएमसी का गढ़ माने जाते हैं. सत्ता की राह दक्षिण बंगाल से होकर गुजरती है. बीजेपी को राज्य में बहुमत के लिए यहां सेंध लगानी होगी, जबकि उत्तर 24 परगना के मतुआ बहुल इलाकों पर दोनों दलों की कड़ी नजर है.
  8. भवानीपुर का हॉट सीट- भवानीपुर सीट का प्रतीकात्मक महत्व बहुत ज्यादा है, क्योंकि यह ममता बनर्जी का गढ़ है. साल 2021 में नंदीग्राम में हारने के बाद वे यहीं से उपचुनाव जीतकर मुख्यमंत्री बनी थीं. 2026 के चुनाव में भी बीजेपी ने फिर से सुवेंदु अधिकारी को उनके विरुद्ध खड़ा किया है, जिससे यह मुकाबला काफी रोमांचक हो गया है.
  9. उम्मीदवारों का आपराधिक रिकॉर्ड- एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 के चुनाव में करीब 23% उम्मीदवारों ने अपने विरुद्ध आपराधिक मामले घोषित किए हैं. इनमें से हर पांचवां उम्मीदवार गंभीर आरोपों का सामना कर रहा है, जिसमें हत्या और महिलाओं के विरुद्ध हिंसा जैसे मामले शामिल हैं.
  10. क्या इस बार होगा सत्ता परिवर्तन?- 2026 विधानसभा चुनाव का सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या बंगाल में कोई बड़ा ढांचागत राजनीतिक बदलाव आ रहा है या यह सत्ता विरोधी लहर का सामान्य चक्र है. इतिहास गवाह है कि बंगाल में जब भी बदलाव हुआ है, वह निर्णायक रहा है. भाजपा मानती है कि 2026 सत्ता परिवर्तन का साल है, जबकि ममता बनर्जी स्वयं को बंगाली अस्मिता की रक्षक बता रही हैं. अब सबको इंतजार 4 मई का है, जब इन तमाम सवालों के जवाब मिल जाएंगे. 
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