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कहां हैं अभिजीत दीपके, रांका और सौरव दास? दिल्ली पुलिस ने दिया बड़ा अपडेट, मजिस्ट्रेट के सामने किया पेश
दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से पहले पार्टी के तीन शीर्ष नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को पुलिस ने एयरपोर्ट से हिरासत में ले लिया. दिल्ली पुलिस के मुताबिक, तीनों को CrPC की धारा 107/151 के तहत एहतियातन हिरासत में रखा गया है.
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देश की राजधानी दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लकर शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन से पहले ही पार्टी के टॉप 3 नेता अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पुलिस ने शनिवार को एयरपोर्ट से हिरासत में ले लिया था. इसके बाद किसी को पता नहीं चल पा रहा था कि पुलिस ने इन तीनों नेताओं को कहां रखा है. इस बीच दिल्ली पुलिस ने इस मामले पर बड़ा अपडेट दिया है. पुलिस के मुताबिक़ इन तीनोंको गिरफ़्तार नहीं बल्कि हिरासत में रखा गया है. और इन तीनों दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने आज पुलिस किया. यह सभी दिल्ली पुलिस की हिरासत में है.
सूत्रों के मुताबिक, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को CrPC की धारा 107/151 के तहत एहतियाती कार्रवाई करते हुए हिरासत में रखा गया है. पुलिस उन्हें कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया है. आजतक की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, दिल्ली पुलिस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि शांति व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है. पुलिस के अनुसार, इस कार्रवाई को नियमित या औपचारिक गिरफ्तारी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.
हिरासत को लेकर क्या है कानूनी प्रावधान?
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कानून के मुताबिक, किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने के बाद पुलिस को तय कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होता है. सामान्य तौर पर बिना मजिस्ट्रेट की अनुमति के 24 घंटे से अधिक हिरासत में नहीं रखा जा सकता और निर्धारित समय के भीतर उसे मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना जरूरी होता है. इसी प्रक्रिया के तहत पुलिस अभिजीत समेत अन्य नेताओं को भी संबंधित मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया है. शांति व्यवस्था बिगड़ने की आशंका में की जाने वाली ऐसी कार्रवाई को एहतियाती कार्रवाई के तौर पर देखा जाता है. अगर पुलिस को आशंका हो कि कोई व्यक्ति संज्ञेय अपराध कर सकता है या उसकी गतिविधियों से शांति भंग होने का खतरा है, तो कानून में उसे रोकने के लिए निवारक कार्रवाई का प्रावधान है. ऐसी स्थिति में संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत पुलिस बिना वारंट भी कार्रवाई कर सकती है. हालांकि, हिरासत की अवधि और आगे की प्रक्रिया कानून के अनुसार ही तय होती है. इसके बाद व्यक्ति को कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जा सकता है, जहां शांति बनाए रखने के लिए उससे बांड भरने को कहा जा सकता है. आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने पर उसे रिहा किया जा सकता है.
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CJP ने पुलिस से मांगा नेताओं की स्थिति का ब्योरा
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तीनों नेताओं की हिरासत को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने पहले ही दिल्ली पुलिस आयुक्त को पत्र भेजकर जानकारी मांगी थी. पार्टी के संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे ने पत्र में बताया कि राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके और सह-संयोजक सौरव दास व आशुतोष रांका शनिवार सुबह मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे. आरोप है कि राजधानी पहुंचने के बाद पुलिस ने उन्हें विमान से बाहर आने के दौरान ही हिरासत में ले लिया. पार्टी ने यह भी दावा किया कि हिरासत में लिए जाने के करीब 12 घंटे बाद तक उनके परिवारों को उनकी स्थिति के बारे में कोई सूचना नहीं मिली थी. इसके अलावा, CJP ने आरोप लगाया कि उनके वकीलों को भी इस संबंध में जानकारी नहीं दी गई.
CJP ने भी दी जानकारी
रत्ना सिंह ने ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, 'अभिजीत, आशुतोष और सौरव को आज सुबह 9 बजे दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन में कार्यकारी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा. दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी ने मुझे सुबह इस बारे में जानकारी दी. सीजेपी के लीगल हेड के तौर पर मैं हमारी तरफ से पेश होने वाले दूसरे वकीलों के साथ पुलिस स्टेशन में मौजूद रहूंगी.'
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बताते चलें कि अभिजीत दिपके, सौरव दास और आशुतोष को शनिवार को इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर तब हिरासत में लिया गया था, जब वे भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने के लिए राजधानी पहुंचे थे. यह घटनाक्रम सीजेपी द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है, जो मतदाता सूची के 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर किया जाना था.