उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस के साथ कर दिया खेला! चंद्रपुर में एक वोट से पलटी बाजी, मेयर की सीट पर BJP का कब्जा
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में महाविकास अघाड़ी की हार के बाद बीजेपी लगातार मजबूत हुई है. चंद्रपुर नगर निगम में भी कांग्रेस को झटका लगा, जहां कथित तौर पर शिवसेना (यूबीटी) के समर्थन से बीजेपी की संगीता खंडेकर ने महज एक वोट से महापौर पद जीत लिया.
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महाराष्ट्र में पिछले वर्ष हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) के साथ मिलकर महाविकास अघाड़ी गठबंधन के दम पर एनडीए को हराने का दावा किया था. हालांकि, जब चुनावी नतीजे सामने आए तो महायुति को प्रचंड जीत मिली. इस जीत में केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं और राज्य स्तर पर तत्कालीन उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की रणनीति को अहम माना गया. चुनाव में भारतीय जनता पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी.
चुनाव परिणामों के बाद महाराष्ट्र में बीजेपी लगातार मजबूत होती दिखाई दे रही है, जबकि कांग्रेस को अपने सहयोगियों से झटके मिल रहे हैं. ताजा मामला चंद्रपुर नगर निगम से सामने आया है, जहां गुटबाजी से जूझ रही कांग्रेस को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा. आरोप है कि उसके सहयोगी शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) ने बीजेपी के साथ गठजोड़ कर लिया. इसका नतीजा यह रहा कि महापौर पद पर बीजेपी की उम्मीदवार संगीता खंडेकर ने कांग्रेस की उम्मीदवार वैशाली महाडुले को महज एक वोट से हराकर जीत दर्ज की. माना जा रहा है कि कांग्रेस इस पद पर दावा मजबूत स्थिति में कर रही थी, लेकिन अंतिम क्षणों में समीकरण बदल गए और बीजेपी ने बाजी मार ली.
#WATCH | Chandrapur, Maharashtra: Sangeeta Khandekar gets elected as the mayor and Prashant Danav as the deputy mayor as the BJP wins closely contested Chandrapur mayoral elections. pic.twitter.com/AvDvJFfTdW
— ANI (@ANI) February 10, 2026
शिवसेना (यूबीटी) को मिला उपमहापौर पद
इस चुनाव में एक अहम राजनीतिक मोड़ देखने को मिला, जब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने भारतीय जनता पार्टी को समर्थन देने का फैसला किया. इसके बाद शिवसेना (उद्धव गुट) के पार्षद प्रशांत दानव को उपमहापौर पद के लिए चुना गया. इस पूरे घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. खासकर विपक्षी एकता और महा विकास आघाड़ी की मजबूती को लेकर सवाल उठने लगे हैं. गौरतलब है कि शिवसेना (उद्धव गुट) महा विकास आघाड़ी के साथ-साथ इंडिया गठबंधन में भी कांग्रेस की प्रमुख सहयोगी मानी जाती है. ऐसे में बीजेपी को दिया गया यह समर्थन राजनीतिक समीकरणों में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है.
कांग्रेस बनी थी सबसे बड़ी पार्टी
चंद्रपुर उन चुनिंदा नगर निगमों में से एक रहा, जहां कांग्रेस सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई थी और महापौर की कुर्सी तक पहुंचने की मजबूत स्थिति में थी. हालांकि, विजय वडेट्टीवार और प्रतिभा धनोरकर खेमों के बीच चली अंदरूनी रस्साकशी ने हालात बदल दिए और इसका सीधा फायदा बीजेपी को मिल गया. इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि वह पहले पूरी जानकारी जुटाएंगे, उसके बाद ही इस मुद्दे पर विस्तार से बात करेंगे.
कांग्रेस ने लगाया ख़रीद-फरोख्त का आरोप
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने चुनाव परिणाम पर कड़ी नाराजगी जताई और आरोप लगाया कि पूरी प्रक्रिया में सौदेबाजी हुई है. उन्होंने इस हार के लिए शिवसेना (उद्धव गुट), एआईएमआईएम और वंचित बहुजन आघाड़ी को जिम्मेदार ठहराया. सपकाल के मुताबिक, चंद्रपुर महापौर चुनाव में बीजेपी को 32 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के खाते में 31 वोट आए. उनका कहना था कि शिवसेना (उद्धव गुट) के छह पार्षदों से कांग्रेस को समर्थन की उम्मीद थी, लेकिन उन्होंने अंतिम समय में बीजेपी का साथ दे दिया. सपकाल ने यह भी चेतावनी दी कि इस घटनाक्रम के दूरगामी राजनीतिक परिणाम राज्य की सियासत में देखने को मिल सकते हैं.
चंद्रपुर नगर निगम में कैसे रहे नतीजे
पिछले महीने हुए 66 सदस्यीय नगर निगम चुनाव में कांग्रेस 27 सीटें जीतकर सबसे बड़े दल के रूप में उभरी थी। वहीं, भारतीय जनता पार्टी को 23 सीटों पर सफलता मिली थी. शिवसेना (उद्धव गुट) ने छह सीटें अपने नाम की थीं, जबकि भारतीय शेतकरी कामगार पक्ष को तीन सीटें मिली थीं। वंचित बहुजन आघाड़ी को दो सीटों पर जीत हासिल हुई थी. इसके अलावा, एआईएमआईएम, बहुजन समाज पार्टी और शिवसेना के खाते में एक-एक सीट आई थी. चुनाव में दो निर्दलीय उम्मीदवार भी विजयी रहे थे.
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बताते चलें कि चंद्रपुर नगर निगम का यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति में बदलते समीकरणों का संकेत देता है. एक ओर बीजेपी अपनी पकड़ मजबूत करती दिख रही है, तो दूसरी ओर कांग्रेस को सहयोगियों और अंदरूनी खींचतान से जूझना पड़ रहा है. अब सबकी नजर इस बात पर है कि महाविकास आघाड़ी इस झटके से कैसे उबरती है और आने वाले चुनावों में विपक्ष अपनी रणनीति किस तरह तय करता है.
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