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बागी विधायकों पर क्यों खामोश कांग्रेस-RJD? एक्शन में देरी के पीछे बड़ा खेल!
बिहार राज्यसभा चुनाव में एनडीए ने पांचों सीटें जीतकर महागठबंधन को बड़ा झटका दिया है. विपक्ष की हार की वजह विधायकों की गैर-हाजिरी और अंदरूनी कलह मानी जा रही है.
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बिहार की राजनीति में हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव ने बड़ा उलटफेर कर दिया है. पांच सीटों पर हुए इस चुनाव में एनडीए ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सभी सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि महागठबंधन (INDIA) को करारी हार का सामना करना पड़ा. यह नतीजा सिर्फ एक चुनावी हार नहीं, बल्कि विपक्षी एकता पर बड़ा सवाल भी खड़ा कर गया है. इस हार के बाद महागठबंधन के भीतर बेचैनी साफ नजर आ रही है. खासकर कांग्रेस और आरजेडी के बीच तालमेल और अनुशासन को लेकर नई बहस शुरू हो गई है.
हार की बड़ी वजह बनी गैर-हाजिरी और अंदरूनी खींचतान
राज्यसभा चुनाव में विपक्ष के कुछ विधायकों की अनुपस्थिति ने पूरा गणित बिगाड़ दिया. जिन वोटों के दम पर जीत की उम्मीद थी, वही वोट नहीं मिल पाए. इसके साथ ही भितरघात की आशंका ने महागठबंधन की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इन बागी या गैर-हाजिर विधायकों पर क्या कार्रवाई की जाए. यही मुद्दा कांग्रेस और आरजेडी दोनों के लिए सिरदर्द बना हुआ है.
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कांग्रेस का नरम रुख
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कांग्रेस ने अपने तीन विधायकों सुरेंद्र मेहता, मनोज विश्वास और मनोहर प्रसाद सिंह को कारण बताओ नोटिस जरूर भेजा है, लेकिन कार्रवाई को लेकर स्थिति अभी साफ नहीं है. पार्टी नेताओं का कहना है कि राज्यसभा चुनाव में दल-बदल कानून सीधे तौर पर लागू नहीं होता, इसलिए फैसला सोच-समझकर लिया जाएगा. पार्टी के अंदर यह डर भी है कि अगर सख्त कार्रवाई की गई तो ये विधायक अलग समूह बना सकते हैं. ऐसे में विधानसभा में कांग्रेस की ताकत और कमजोर हो सकती है. यही वजह है कि पार्टी फिलहाल संतुलन बनाकर चलने की कोशिश कर रही है.
कांग्रेस में अंदरूनी डर
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कांग्रेस के भीतर यह भी चर्चा है कि जिन विधायकों पर सवाल उठ रहे हैं, वे पूरी तरह से पार्टी की विचारधारा से जुड़े नहीं रहे हैं. कुछ नेताओं का मानना है कि इन विधायकों को बाहरी प्रभाव के चलते टिकट मिला था. ऐसे में कार्रवाई का फैसला और भी पेचीदा हो गया है.
दुविधा में RJD
आरजेडी की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है. पार्टी के विधायक फैसल रहमान के वोटिंग में शामिल न होने पर सवाल उठ रहे हैं. हालांकि उनकी ओर से मां की गंभीर बीमारी को कारण बताया गया है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, तेजस्वी यादव के पटना लौटने के बाद इस मामले में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी. फिलहाल आरजेडी ने कोई औपचारिक नोटिस जारी नहीं किया है और वह इस मुद्दे पर सावधानी से कदम बढ़ा रही है. कांग्रेस के गैर-हाजिर विधायकों ने आरोप लगाया है कि उन्हें आरजेडी की ओर से नजरअंदाज किया गया. उनका कहना है कि उम्मीदवार चयन में उनकी राय नहीं ली गई. वहीं, आरजेडी विधायक फैसल रहमान ने साफ कहा है कि वह पारिवारिक कारणों की वजह से वोटिंग में शामिल नहीं हो सके.
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एनडीए ने साधा निशाना
एनडीए ने इस पूरे घटनाक्रम पर विपक्ष को घेरने का मौका नहीं छोड़ा. बीजेपी और जेडीयू नेताओं ने महागठबंधन की एकजुटता पर सवाल उठाए. उनका कहना है कि यह जीत एनडीए की मजबूती और विपक्ष की कमजोरी का नतीजा है. बता दें कि 16 मार्च को 5 सीटों के लिए हुए चुनाव में जीत के लिए 41 वोट जरूरी थे. एनडीए के पास पर्याप्त संख्या बल था, लेकिन विपक्ष भी मजबूत स्थिति में था. हालांकि, चार विधायकों की अनुपस्थिति ने पूरा समीकरण बदल दिया. न तो विपक्ष का उम्मीदवार जरूरी आंकड़ा हासिल कर पाया और न ही शुरुआती दौर में एनडीए के सभी उम्मीदवार. अंत में द्वितीय वरीयता के वोटों के आधार पर एनडीए ने बाजी मार ली.
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बहरहाल, इतना तय है कि राज्यसभा चुनाव ने बिहार की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है. विपक्ष के लिए यह सिर्फ हार नहीं, बल्कि आत्ममंथन का वक्त भी है. वहीं एनडीए के लिए यह जीत आत्मविश्वास बढ़ाने वाली साबित हुई है.