देश में धान खरीद में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ेगी योगी सरकार, इस बार 65 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य
भारत सरकार ने सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2441 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का 2461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है. पिछले वर्ष की तुलना में समर्थन मूल्य में लगभग तीन प्रतिशत की वृद्धि की गई है. सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों से इसी दर पर धान खरीदा जाएगा.
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धान की सरकारी खरीद में पिछले वर्ष देश में पहला स्थान हासिल करने वाली योगी सरकार इस बार देश में अपना ही रिकॉर्ड तोड़ने की तैयारी में है.मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 की धान क्रय नीति को मंजूरी दी गई.पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में देश में सर्वाधिक 62 लाख मीट्रिक टन धान खरीदा गया था.इस बार सरकार ने 65 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है.इसके लिए आठ क्रय एजेंसियों के माध्यम से प्रदेश में 4500 क्रय केंद्र संचालित किए जाएंगे.किसानों को उनकी उपज का बढ़ा न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलेगा.खरीद के बाद यथासंभव 48 घंटे के भीतर भुगतान सीधे बैंक खातों में कराया जाएगा।
कैबिनेट बैठक के बाद खाद्य एवं रसद मंत्री मनोज पांडेय ने बताया कि पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश ने 62 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद कर देश में पहला स्थान प्राप्त किया था.इस बार उससे तीन लाख मीट्रिक टन अधिक धान खरीदने का लक्ष्य रखा गया है.सरकार ने किसानों की सुविधा के लिए क्रय केंद्रों की व्यवस्था के साथ भुगतान और धान की ढुलाई की निगरानी के भी प्रावधान किए हैं।
पश्चिमी यूपी में 15 अक्टूबर, पूर्वी यूपी में एक नवंबर से खरीद
धान खरीद के लिए प्रदेश में दो अलग-अलग अवधि निर्धारित की गई हैं.पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 15 अक्टूबर 2026 से 15 फरवरी 2027 तक खरीद होगी.पूर्वी उत्तर प्रदेश में एक नवंबर 2026 से 28 फरवरी 2027 तक धान खरीदा जाएगा.जिलों में धान की पैदावार और आवक के आधार पर क्रय केंद्रों का स्थान तय किया जाएगा।
धान के समर्थन मूल्य में तीन प्रतिशत की बढ़ोतरी
भारत सरकार ने सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2441 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का 2461 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है.पिछले वर्ष की तुलना में समर्थन मूल्य में लगभग तीन प्रतिशत की वृद्धि की गई है.सरकारी क्रय केंद्रों पर किसानों से इसी दर पर धान खरीदा जाएगा।
आठ एजेंसियां करेंगी खरीद, डीएम तय करेंगे केंद्रों का स्थान
खाद्य विभाग, पीसीएफ, पीसीयू, यूपीएसएस, मंडी परिषद एवं उससे संबद्ध एफपीओ-एफपीसी, एनसीसीएफ, नैफेड तथा भारतीय खाद्य निगम के माध्यम से धान की खरीद होगी.कुल 4500 क्रय केंद्र प्रस्तावित हैं.संबंधित जिलाधिकारी जिले में धान की पैदावार, आवक और स्थानीय परिस्थितियों को देखते हुए क्रय संस्थाओं के बीच केंद्रों का स्थल आवंटन करेंगे।
फार्मर आईडी वाले किसानों को पंजीकरण से छूट
धान की सरकारी खरीद के लिए इस बार फार्मर आईडी वाले किसानों को अलग से ऑनलाइन पंजीकरण नहीं कराना होगा.भारत सरकार की एग्रीस्टैक योजना के तहत प्रदेश में बनाई गई किसान पहचान के आधार पर ही उनकी उपज खरीदी जाएगी.इससे किसानों को विभागीय पोर्टल पर दोबारा पंजीकरण कराने की आवश्यकता नहीं होगी।
48 घंटे में भुगतान, देरी पर तय होगी जिम्मेदारी
किसानों से खरीदे गए धान का भुगतान सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) पोर्टल के माध्यम से किया जाएगा.बैंक खातों के सत्यापन के बाद यथासंभव 48 घंटे के भीतर धनराशि किसानों के खातों में भेजने की व्यवस्था की गई है.भुगतान में देरी होने पर संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
जीपीएस से धान की ढुलाई, क्यूआर कोड से निगरानी
धान खरीद में पारदर्शिता के लिए प्रदेश के सभी जिलों में क्रय केंद्रों से संबंधित चावल मिलों तक धान भेजने के लिए जीपीएस युक्त वाहनों का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है.इसके अलावा पायलट परियोजना के तहत चिह्नित जिलों में चावल के बोरों पर क्यूआर कोड के माध्यम से खाद्यान्न की आवाजाही और बिलिंग की निगरानी की जाएगी।
धान खरीद के लिए बोरों की भी व्यवस्था
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धान खरीद के दौरान बोरों की कमी न हो, इसके लिए भी तैयारी की गई है.उपलब्ध कराई गई जानकारी के अनुसार, 80 हजार बोरों की व्यवस्था पहले ही की जा चुकी है.कुल 12.25 लाख बोरे उपलब्ध कराने की तैयारी है.सरकार ने खरीद के दौरान पैकिंग सामग्री की उपलब्धता बनाए रखने पर जोर दिया है।