हाईवे किनारे खुली रहेंगी शराब दुकानें! ठेकों से जुड़े हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
24 नवंबर 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने सरकार को निर्देश जारी किए थे. जिसमें कहा गया था कि हाईवे 500 मीटर के दायरे में बनी शराब की दुकानों को हटा दिया जाए.
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सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राजस्थान हाई कोर्ट (Rajasthan High Court) के उस आदेश पर रोक लगा दी. जिसमें सड़क किनारे बनीं एक हजार से ज्यादा शराब दुकानों को शिफ्ट करने के ऑर्डर दिए गए थे. जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने मामले में सुनवाई की.
दरअसल, 24 नवंबर 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर बेंच ने सरकार को निर्देश जारी किए थे. जिसमें कहा गया था कि हाईवे के 500 मीटर के दायरे में बनी शराब की दुकानों को हटा दिया जाए. हाई कोर्ट ने 1,102 शराब की दुकानों को हटाने और शिफ्ट करने के निर्देश दिए थे, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के इस आदेश पर रोक लगा दी है. हालांकि, कोर्ट ने शराब पीकर गाड़ी चलाने से होने वाले हादसे की बात से इंकार नहीं किया.
क्या है पूरा मामला?
बात साल 2023 की है. जब चूरू के रहने वाले कन्हैया लाल सोनी और मनोज नाई ने हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की. उन्होंने आरोप लगाया कि हाईवे के किनारे चल रहीं शराब दुकानें ‘आबकारी एक्ट’ के खिलाफ हैं.
कन्हैया लाल और मनोज की याचिका पर हाईकोर्ट में लंबी सुनवाई चली,. कोर्ट ने नवंबर, 2025 को अपना फैसला सुनाया. अदालत ने आदेश दिया कि हाईवे किनारे की दुकानों को अंदर किया जाए या हटाया जाए. कोर्ट ने दो महीने के अंदर आदेश का पालन करने के निर्देश दिए. हाईकोर्ट के निर्देशों की पालना से पहले ही मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया. राम स्वरूप यादव नाम के शख्स जनहित याचिका लगाई. राम स्वरूप ने तर्क दिया कि हाई कोर्ट ने स्टेक होल्डर्स को सुनवाई का मौका दिए बिना ही दुकानों को हटाने के निर्देश जारी कर दिए.
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ?
19 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने राम स्वरूप की जनहित याचिका पर सुनवाई की. उनकी तरफ से मामले की पैरवी वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने की. जबकि राजस्थान सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा मौजूद रहे. सुप्रीम कोर्ट में मुकुल रोहतगी ने कहा, अगर हाई कोर्ट के आदेश लागू होंगे तो परिणाम गंभीर होंगे. उन्होंने बताया हाईकोर्ट उस समय चूरू के एक गांव से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहा था, लेकिन निर्देश पूरे राज्य के लिए जारी कर दिए. जबकि राज्य हाई कोर्ट के फैसले का समर्थन नहीं करता है. वहीं, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया, राज्य के कई शहर और कस्बे नेशनल और स्टेट हाईवेज पर बने हैं. ऐसे में अगर हाई कोर्ट के आदेश को लागू किया गया तो शहरी क्षेत्रों के बड़े हिस्से से शराब की दुकानें हट जाएंगी. उन्होंने तर्क दिया कि फिर तो चंडीगढ़ जैसे शहरों में सभी शराब की दुकानें हटानी पड़ेंगी, जो हाईवेज पर ही बने हैं.
सभी पक्षकारों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के संचालन पर रोक लगा दी है. इस आदेश के बाद राज्य सरकार और प्रभावित लाइसेंस धारकों को अंतरिम राहत मिली. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि हाई कोर्ट की चिंताएं बिल्कुल जायज थीं, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा, यहां दिखाई गई चिंता बिल्कुल जायज है. सच्चाई यह है कि वास्तव में कई मौतें हुई हैं. लोगों की जान बचाने के लिए कोई न कोई निर्णय या नीति लागू करनी होगी, लेकिन राज्य सरकार को जारी इन निर्देशों को अभी न्यायिक जांच की जरूरत है. यानी मामले के सभी पहलुओं और परिणाम को ध्यान रखने की जरूरत है.
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