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'नौकरियों का रेट तय करते थे शिवपाल चाचा...', अखिलेश यादव पर बरसे ओपी राजभर; संजय निषाद ने अयोध्या दौरे पर घेरा
ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सुभासपा के सिंबल पर सपा ने अपने 12 प्रत्याशी चुनाव लड़ाए थे. उन्होंने सपा में शामिल नेताओं को लेकर भी तीखा तंज कसा.
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समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयानों को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर और डॉ. संजय निषाद ने तीखा पलटवार किया है. दोनों मंत्रियों ने 2017 से पहले की सपा सरकार और 2017 के बाद की योगी सरकार के कार्यकाल की तुलना करते हुए अखिलेश यादव पर निशाना साधा. दोनों वरिष्ठ मंत्रियों ने अखिलेश यादव द्वारा मोबाइल के इस्तेमाल, निवेश, रोजगार, सरकारी भर्ती, कानून-व्यवस्था और गठबंधन की राजनीति पर दिये गये बयानों को लेकर पलटवार किया है. इसके साथ ही मंत्री डॉ. संजय निषाद ने अखिलेश यादव के संभावित अयोध्या दौरे पर तीखा कटाक्ष किया है.
हमारे सिंबल पर सपा ने लड़ाये थे अपने 12 प्रत्याशी
ओम प्रकाश राजभर ने सपा मुखिया पर धोखा देने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में सुभासपा का सिंबल इस्तेमाल करते हुए अखिलेश यादव ने अपने 12 प्रत्याशियों को चुनाव लड़ाया था. उन्होंने शनिवार को सपा में शामिल हुए नेताओं के बारे में पूछे गये सवाल पर कहा कि वो सब के सब दगे हुए कारतूस हैं. कभी बसपा में रहते हैं, कभी सपा, तो कभी किसी दूसरी पार्टी में चले जाते हैं. उन्होंने कहा कि केवल ऐसे नेताओं से गठबंधन करने से वोट नहीं मिलता.
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मोबाइल और शिक्षा पर राजभर ने किया पलटवार
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बच्चों द्वारा मोबाइल के इस्तेमाल और शिक्षा के मुद्दे पर अखिलेश यादव की टिप्पणियों का जवाब देते हुए ओम प्रकाश राजभर ने कहा कि बच्चों को मुख्य रूप से अपनी पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने कहा कि बेहतर शिक्षा के बिना बच्चों को नौकरी और रोजगार नहीं मिल सकता. अगर उनका पूरा ध्यान केवल मोबाइल में रहेगा, तो वे आगे कैसे बढ़ेंगे? बच्चों के पास मोबाइल रहे, लेकिन उससे जो शैक्षणिक जानकारी मिलती है, वे उसी पर अमल करें.
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निवेश और रोजगार को लेकर घेरा
प्रदेश में निवेश के मुद्दे पर बोलते हुए राजभर ने कहा कि अखिलेश यादव की सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश में कोई भी निवेशक आने को तैयार नहीं था. उन्होंने दावा किया कि योगी सरकार के दौरान स्थिति बदली है. राजभर ने कहा कि आज सैमसंग जैसी बड़ी मोबाइल कंपनियां उत्तर प्रदेश में आकर अपना कारोबार स्थापित कर रही हैं, जिससे हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है. अखिलेश यादव को सपा के चश्मे से यह सब दिखाई नहीं दे रहा.
भर्ती आयोगों और पारदर्शिता पर सवाल
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सरकारी नौकरियों और भर्ती प्रक्रियाओं पर बात करते हुए राजभर ने सपा सरकार के कार्यकाल को याद दिलाया. उन्होंने कहा कि तत्कालीन सपा सरकार में यूपीपीएससी में पक्षपात करते हुए अयोग्य व्यक्ति को अध्यक्ष पद पर बिठा दिया था, जिसपर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की थी और तत्कालीन अध्यक्ष को पद से हटाने के लिए कहा था. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सपा सरकार में नौकरियों के विज्ञापनों के साथ बोलियां लगती थीं और बिना पैसों के नौकरी नहीं मिलती थी. कहा कि सपा सरकार में शिवपाल चाचा एंड कंपनी सक्रिय हो जाती थी और जैसी नौकरी होती उस हिसाब से 10 लाख, 15 लाख, 20 लाख, 25 लाख रुपये तक की बोली लगती. आज योगी सरकार में बिना किसी भ्रष्टाचार और पक्षपात के पारदर्शी प्रक्रिया के तहत 10 लाख योग्य युवाओं को नौकरियां दी गई हैं. इसके अलावा, जिलों, ब्लॉकों और तहसीलों में रोजगार मेले आयोजित कर तथा बैंकों के माध्यम से बिना गारंटी और ब्याज मुक्त ऋण देकर छोटे व्यापारियों और युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है.
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सपा के समय में हुए एक हजार दंगे, योगी शासन में शून्य
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प्रदेश की कानून-व्यवस्था की तुलना करते हुए राजभर ने कहा कि अखिलेश सरकार के 5 साल के शासनकाल में प्रदेश में एक हजार से अधिक दंगे हुए थे, जबकि योगी आदित्यनाथ के 10 साल के शासन में एक भी दंगा नहीं हुआ है. उन्होंने कहा कि सपा सरकार के समय गुंडे और माफिया सड़कों पर खुलेआम हथियार लहराते हुए घूमते थे, लेकिन योगी सरकार में कोई गैंगवार नहीं हुआ और माफिया पूरी तरह से खत्म हो चुके हैं.
अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर कसा तंज
कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय निषाद ने अखिलेश यादव के अयोध्या दौरे पर तंज कसते हुए कहा कि देर से ही सही, कम से कम वे अयोध्या आ तो रहे हैं. उन्हें भगवान श्रीराम के साथ-साथ निषादराज के भी दर्शन करने चाहिए और अपनी पिछली गलतियों के लिए माफी मांगनी चाहिए. माफी मांगने से गलती सुधर जाती है.
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2017 से पहले और बाद के कार्यकाल की तुलना
डॉ. संजय निषाद ने कहा कि विपक्ष का काम सरकार पर आरोप लगाना है, लेकिन जनता को 2017 से पहले और 2017 के बाद की स्थितियों की तुलना करनी चाहिए. चाहे नौकरी का मामला हो, भर्ती आयोगों की पारदर्शिता हो, कानून-व्यवस्था हो या घोटाले, तुलना करने पर स्थिति साफ हो जाएगी.
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बताते चलें कि अखिलेश यादव के बयानों पर ओम प्रकाश राजभर और डॉ. संजय निषाद के पलटवार के बाद यूपी की सियासत में जुबानी जंग तेज हो गई है. दोनों मंत्रियों ने 2017 से पहले और बाद की सरकारों के कामकाज की तुलना करते हुए अपनी-अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं और सपा प्रमुख पर निशाना साधा.