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नक्सल आंदोलन की भूमि पर लहरा रहा भगवा... 34 सालों तक वामपंथियों ने सत्ता में किया एकछत्र राज, जानिए कैसे भाजपा ने किया खेल?
जिस पश्चिम बंगाल में भगवा लहरा रहा है. उसी पश्चिम बंगाल में 34 वर्षों तक वामपंथी लहर के साथ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट की सरकार रही.
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साल 1967 जब माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी में नक्सलवाद की चिंगारी भड़की थी. इस आंदोलन के जरिए पूरे पश्चिम बंगाल में वामपंथियों ने कदम रखा. पश्चिम बंगाल में एक समय जहां वामपंथियों द्वारा लाल सलाम की गूंज होती थी. आज उसी धरती का रंग पूरी तरीके से बदल चुका है. पूरे बंगाल में भगवा लहरा रहा है. जो बंगाल कभी नक्सलवादी आंदोलन की भूमि हुआ करता था. आज उसी पश्चिम बंगाल की धरती पर भारतीय जनता पार्टी अपना परचम लहरा चुकी है. पश्चिम बंगाल में सबसे ज्यादा और लंबे समय तक वामपंथी लहर चली, लेकिन बंगाल अब बदलाव की एक नए दौर से गुजर रहा है.
34 वर्षों तक बंगाल में रही वामपंथी सरकार
जिस पश्चिम बंगाल में भगवा लहरा रहा है. उसी पश्चिम बंगाल में 34 वर्षों तक वामपंथी लहर के साथ मार्क्सवादी कम्युनिस्ट की सरकार रही. साल 1977 से लेकर 2011 तक रविंद्र नाथ टैगोर और स्वामी विवेकानंद की धरती पर लाल सलाम का झंडा लहराता रहा. पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत सिर्फ एक जीत ही नहीं है बल्कि एक खास और बड़े बदलाव का प्रतीक है.
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बंगाल में भाजपा और आरएसएस की विचारधारा स्थापित
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जिस पश्चिम बंगाल में 34 सालों तक वामपंथी विचारधार रही. आज उसी क्षेत्र में भाजपा आरएसएस की विचारधारा स्थापित हो रही है.
कैसा रहा नक्सलबाड़ी का सीयासी सफर?
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साल 1967 में नक्सलबाड़ी के बेंगाईजोट गांव में एक आंदोलन शुरू हुआ. कानू सान्याल के नेतृत्व में शुरू हुआ यह सशस्त्र किसान आंदोलन कुछ ही दिनों में भारत के वामपंथी आंदोलन की नींव बन गया. उसके बाद इस आंदोलन को चारु मजूमदार जैसे वामपंथी नेताओं ने आगे बढ़ाया, इसी आंदोलन के जरिए CPI (ML) का गठन हुआ, जिसके बाद पूरे देश भर में नक्सलवाद फैला. इसी आंदोलन की ही देन रही, जब CPM ने पश्चिम बंगाल में 34 साल (1977-2011) तक लगातार सत्ता पर राज किया. ऐसे में कहा जाए, तो माटीगाड़ा-नक्सलबाड़ी लंबे समय तक वामपंथियों की एक मजबूत जमीन बनी रही.
समय के साथ बदलती रही विचारधारा
34 सालों तक वामपंथी सरकार के हाथों पश्चिम बंगाल की सत्ता रही, लेकिन समय के साथ एक बड़ा परिवर्तन हुआ और 2011 में ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सरकार बनी. यह सिलसिला लगातार चलता रहा और 2016 और 2021 में भी ममता बनर्जी की सरकार रही. कुल 15 सालों तक पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने सत्ता संभाली, वहीं विपक्षी दल भाजपा का 2011 में जहां वोट प्रतिशत 4.47 प्रतिशत था, तो 2016 में बढ़कर यह 21 प्रतिशत हुआ.
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लाल झंडे से मुक्त हुआ यह क्षेत्र
आपको बता दें कि साल 2021 के विधानसभा चुनाव में आनंदमय बर्मन ने तृणमूल के राजेन सुंदरास को करीब 71 हजार वोटों से हराया था, लेकिन 2026 में उन्होंने अपनी जीत को और भी मजबूत किया. उन्होंने इस चुनाव में रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल कर यह संदेश दिया कि अब यह झेत्र 'लाल झंडे' से मुक्त हो चुका है. यह क्षेत्र अब भगवामय हो चुका है.
बीते एक दशक में भाजपा और आरएसएस मजबूत
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उत्तर बंगाल की बात की जाए, तो यहां पर बीते एक दशक में भाजपा और आरएसएस संगठनात्मक रूप से काफी मजबूत हुई है. दोनों ने मिलकर जमीन पर खूब काम किया है. यही वजह रही कि 2026 में पार्टी को प्रचंड जीत मिली. पार्टी के लोगों ने जमीन पर उतरकर खुद को आम लोगों से जोड़ा. भाजपा पश्चिम बंगाल में चाय बागान, विकास कार्य, सीमा सुरक्षा और सांस्कृतिक पहचान जैसे स्थानीय मुद्दों पर काम करती रही. इससे संगठन के साथ पार्टी को मजबूती मिली. वामपंथ के पतन के बाद ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों ने भी यहां के वोटर को भाजपा के पाले में जाने पर मजबूर किया. उसी का परिणाम है कि प्रदेश में भाजपा की सरकार पहली बार बनने जा रही है. बता दें कि पश्चिम बंगाल में नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह 9 मई को होगा.