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बिहार में पेंशन को लेकर गरमाई सियासत, गिरिराज बोले– गरीबों के नाम पर राजनीति बंद करें लालू-तेजस्वी

बिहार विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा पेंशन बढ़ोतरी का श्रेय खुद को दिए जाने पर केंद्रीय मंत्री और बेगूसराय से सांसद गिरिराज सिंह ने तीखा पलटवार किया है. गिरिराज सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि तेजस्वी और लालू यादव को इस बात से परेशानी हो रही है कि बिहार में गरीबों, दिव्यांगों और विधवाओं की चिंता करने वाली एनडीए की सरकार है.

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बिहार की सियासत में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव द्वारा पेंशन बढ़ोतरी का श्रेय खुद को दिए जाने पर केंद्रीय मंत्री और बेगूसराय से सांसद गिरिराज सिंह ने तीखा पलटवार किया है.

बेगूसराय दौरे पर पहुंचे गिरिराज सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि तेजस्वी और लालू यादव को इस बात से परेशानी हो रही है कि बिहार में गरीबों, दिव्यांगों और विधवाओं की चिंता करने वाली एनडीए की सरकार है. उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव को अपने 15 वर्षों के शासन पर नजर डालनी चाहिए, जब उन्होंने गरीबों के उत्थान के नाम पर सिर्फ जुमलेबाजी की. गिरिराज सिंह ने कहा, "तेजस्वी कहते हैं कि उनके दबाव में सरकार ने पेंशन बढ़ाई, लेकिन सच्चाई यह है कि एनडीए सरकार शुरू से ही समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध रही है. तेजस्वी को बर्दाश्त नहीं हो रहा कि अब बिहार में एक मजबूत और गरीबों की सुध लेने वाली सरकार है."

पेंशन बढ़ोतरी पर तेजस्वी-गिरिराज आमने-सामने
गिरिराज सिंह ने तेजस्वी और लालू यादव को "गरीब विरोधी" करार देते हुए कहा कि "ये लोग सिर्फ जुमलेबाजी का पोस्टर हैं." गिरिराज सिंह ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा,
"मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में बिहार सरकार ने दिव्यांगजनों, वृद्धजनों और विधवाओं की सामाजिक सुरक्षा पेंशन 400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रुपये कर दी है. यह सिर्फ आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और सामाजिक न्याय का संकल्प है." उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "लालटेन युग ने जिन सपनों को अंधेरे में छोड़ा, एनडीए सरकार ने उन्हें रोशनी दी है." गिरिराज ने कहा कि जब सरकार गरीबों के लिए ठोस फैसले लेती है तो राजद नेताओं को "टेंशन" होने लगती है, क्योंकि वे सिर्फ सत्ता के लालच में गरीबों के नाम पर राजनीति करते हैं. वहीं, तेजस्वी यादव ने शनिवार को दावा किया था कि पेंशन बढ़ोतरी का फैसला राजद के दबाव में लिया गया है. उन्होंने कहा कि "यह साफ़ दिखता है कि नीतीश कुमार और भाजपा की सरकार का ध्यान सिर्फ चुनाव जीतने पर है, न कि जनता की सेवा पर." तेजस्वी के अनुसार, यदि विपक्ष ने सरकार पर दबाव न बनाया होता, तो यह फैसला कभी नहीं लिया जाता.

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बताते चलें कि बिहार की राजनीति को समझने वाले जानकारों का मानना है कि इस साल के अंत में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव को देखते हुए दोनों पक्ष गरीबों, वृद्धों और वंचित वर्ग के हितों को लेकर अपनी-अपनी ‘जन हितैषी’ छवि गढ़ने की होड़ में जुट गए हैं. पेंशन बढ़ोतरी जैसे फैसले अब केवल जनकल्याण नहीं, बल्कि आगामी चुनावी समीकरणों का हिस्सा बनते जा रहे हैं.

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