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‘पहले डर लगता था, अब भरोसा है...’, महिला सुरक्षा पर योगी सरकार की तारीफ कर रहीं माताएं, बोलीं- अब नहीं रही कोई चिंता

उत्तर प्रदेश में बदले सुरक्षा माहौल ने मांओं के चेहरे पर भरोसा और बेटियों के मन में आत्मविश्वास बढ़ाया है. यही वजह है कि आज प्रदेश की महिलाएं अपनी बेटियों के भविष्य और सुरक्षा को लेकर पहले से ज्यादा निश्चिंत नजर आ रही हैं.

Image Source: IANS
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माहौल खराब हो तो एक मां की सबसे बड़ी चिंता अपनी बेटी की सुरक्षा को लेकर होती है. जब तक बेटी घर न लौटे, मां का मन आशंकाओं से घिरा रहता है. वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश में हर मां इसी कष्ट से गुजर रही थी, लेकिन योगी सरकार बनने के बाद बहन-बेटियों की सुरक्षा के मुद्दे पर प्रदेश की तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है. शाम ढलते ही बेटियों को घर बुला लेने वाली माताएं योगी सरकार में चिंतामुक्त हैं. उनका कहना है कि बेटी जल्दी घर लौटे या देर से, योगी सरकार में इस बात का पक्का भरोसा है कि बेटी सुरक्षित है. सड़क से लेकर स्कूल-कालेज, बाजार व अन्य तमाम सार्वजनिक स्थानों तक पुलिस की सक्रिय मौजूदगी हमारी बेटियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है.

रात 10 बजे भी बेटी को अकेले भेजने में डर नहीं

लखनऊ की रजनी त्रिपाठी ने बताया कि उनकी 15 वर्षीय बेटी निजी स्कूल में पढ़ती है. स्कूल में सांस्कृतिक और शैक्षिक कार्यक्रमों के कारण कई बार उसे घर लौटने में देर हो जाती है, लेकिन योगी सरकार में पहले जैसी चिंता नहीं होती. पिछली सपा सरकारों में हमारे लिए भी शाम 7 बजे के बाद घर से बाहर निकलना आसान नहीं था. माता-पिता हमेशा डरे रहते थे, लेकिन अब माहौल पूरी तरह बदल चुका है. पुलिस की सक्रियता और सख्ती के कारण मनचलों में डर दिखाई देता है. योगी सरकार में मैं अपनी बेटी को रात 10 बजे भी किसी जरूरी काम से अकेले भेजने में नहीं झिझकती.

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योगी सरकार में अपराधियों में कार्रवाई का डर

त्रिवेणी नगर में रहने वाली कंचन दीक्षित ने कहा कि महिलाओं से जुड़े अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने प्रभावी कदम उठाए हैं. हमने किशोरावस्था में जो माहौल देखा, वैसा हमारी बेटियों को नहीं झेलना पड़ रहा. 2017 से पहले सड़कों पर निकलते ही डर बना रहता था, लेकिन योगी सरकार में कार्रवाई का डर अपराधियों में दिखाई देता है. यही वजह है कि आज हम अपनी बेटियों को ज्यादा आत्मविश्वास के साथ बाहर भेज पाते हैं. ममता निगम ने बताया कि उनकी 17 वर्षीय बेटी पढ़ रही है और शाम को कोचिंग भी जाती है. पहले लौटने में देर होने पर लगातार चिंता बनी रहती थी, लेकिन अब पुलिस की नियमित गश्त और मौजूदगी से कोई डर नहीं लगता. हर मां की सबसे बड़ी चिंता उसकी बेटी की सुरक्षा होती है, लेकिन योगी सरकार में हमारी यह चिंता समाप्त हो चुकी है. हम इसके लिए मुख्यमंत्री के आभारी हैं.

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कहीं भी जरूरत पर आ जाती है पुलिस

अयोध्या निवासी ज्योतिमा सिंह भी कानून-व्यवस्था में आए बदलाव को महसूस करती हैं. उन्होंने कहा कि 2017 से पहले इसी कोशिश में रहती थी कि किसी तरह बेटी शाम होने से पहले घर लौट आए. लेकिन अब ऐसा कोई तनाव नहीं रहता. कहीं भी जरूरत पड़ने पर पुलिस सहायता उपलब्ध हो जाती है. पिछली सरकारों में अपराधियों के हौसले बढ़े हुए थे, इसलिए डर बना रहता था, लेकिन अब अपराधों पर नियंत्रण महसूस होता है.

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बेटियों को सम्मान से बदला नजरिया भी

लखनऊ की ललिता प्रदीप ने कहा कि महिलाओं और बेटियों की सुरक्षा को लेकर प्रदेश में निश्चित रूप से सुरक्षा की भावना पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है. किसी भी समाज में महिलाओं की सुरक्षा केवल कानून व्यवस्था या पुलिसिंग तक सीमित नहीं होती, बल्कि यह सामाजिक मूल्यों और सोच पर भी निर्भर करती है. जिस समाज में बेटियों और महिलाओं को सम्मान की दृष्टि से देखा जाता है, वहां सुरक्षा का वातावरण स्वतः मजबूत होता है. वहीं यदि महिलाओं को केवल उपभोग की वस्तु समझा जाए, तो वह समाज कभी पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जा सकता. योगी सरकार ने दोनों मोर्चों पर काम किया। बहन-बेटियों को सम्मान दिया तो पुरुष प्रधान समाज के पैरोकारों का भी नजरिया बदला. गुडों-बदमाशों पर सख्त कार्रवाई की तो बेटियों को बेखौफ बाहर निकलने का मौका मिला.

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सुरक्षित माहौल से बढ़ा आत्मविश्वास

प्रदेश में महिला सुरक्षा को लेकर चलाए गए अभियान, सड़कों पर बढ़ी पुलिस की मौजूदगी, एंटी रोमियो स्क्वॉड जैसी व्यवस्थाओं और त्वरित कार्रवाई ने समाज में सकारात्मक बदलाव आया है. यही कारण है कि योगी सरकार में प्रदेश की माताएं अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर निश्चिंत हैं. सुरक्षित माहौल ने बेटियों के आत्मविश्वास को भी मजबूत किया है और वे शिक्षा, करियर और अपने सपनों की ओर बेखौफ कदम बढ़ा रही हैं.

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बताते चलें कि आज उत्तर प्रदेश में बदले माहौल का असर सिर्फ सड़कों पर नहीं, बल्कि मांओं के भरोसे और बेटियों के आत्मविश्वास में भी दिखाई दे रहा है. सुरक्षित वातावरण ने जहां माताओं की चिंता कम की है, वहीं बेटियों को अपने सपनों की उड़ान भरने का हौसला भी दिया है. यही वजह है कि प्रदेश की कई महिलाएं आज खुद को पहले से ज्यादा सुरक्षित और निश्चिंत महसूस कर रही हैं.

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