Advertisement

Loading Ad...

मुसलमान बच्ची को गोद लेने में हिंदू धर्म बना अड़चन...हाई कोर्ट ने तोड़ी सारी सीमाएं, धार्मिक बाधाओं से ऊपर उठकर दिया बड़ा फैसला!

Muslim Child Adopt Case: एक दंपत्ति जब किसी बच्चे या बच्ची को गोद लेने का निर्णय लेते हैं, तो उन्हें  ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता. कानून और समाज दोनों ही ऐसे मामलों को सामान्य तौर पर स्वीकार करते हैं

Image Source: Canva /AI (Representative Image)
Loading Ad...

Muslim Child Adopt Case: आमतौर पर, एक दंपत्ति जब किसी बच्चे या बच्ची को गोद लेने का निर्णय लेते हैं, तो उन्हें  ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता. कानून और समाज दोनों ही ऐसे मामलों को सामान्य तौर पर स्वीकार करते हैं..लेकिन कभी कभी कुछ मामलों में चीजें जटिल हो जाती हैं , और तब यह क़ानूनी लड़ाई बन जाती हैं. तमिलनाडु से ऐसा ही एक मामला सामने आया हैं, जिसमें एक हिंदू दंपत्ति को अपनी पड़ोसी की बेटी को गोद लेने में एक बड़े धार्मिक अड़चन का सामना करना पड़ा.

धर्म की दीवारों को तोड़ते हुए बच्ची का भविष्य

यह मामला सिर्फ एक गोद लेने की प्रक्रिया का नहीं था, बल्कि इसमें धर्म और कानून की दो बड़ी दीवारें थीं. एक हिंदू दंपत्ति, जो खुद बच्चे की कमी महसूस कर रहे थे, अपनी मुस्लिम पड़ोसी की बेटी को गोद लेने की कोशिश कर रहे थे. लेकिन धर्म के अंतर ने मामला काफी उलझा दिया था. दोनों परिवारों के धर्म अलग थे, और यह सवाल उठने लगा कि क्या धर्म के अंतर के कारण बच्ची को गोद लेने में कोई रुकावट आ सकती है. हालांकि, इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया कि धर्म को बच्ची के भले के रास्ते में आने से नहीं रोका जा सकता. कोर्ट ने बच्ची के हित को प्राथमिकता दी और यह सुनिश्चित किया कि बच्ची के लिए सही माहौल हो. अदालत ने यह भी माना कि बच्ची का भला सिर्फ और सिर्फ उस दंपत्ति के साथ है, जिन्होंने उसे अपनी संतान की तरह पाला और उससे प्यार किया.

Loading Ad...

कोर्ट ने लिया बच्ची के भले का पक्ष

Loading Ad...

मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस एन आनंद वेंकटेश और जस्टिस के के रामकृष्णन की पीठ ने इस पूरे मामले की गहरी छानबीन की. कोर्ट ने इस पर निर्णय लेने से पहले बच्ची की जैविक मां और परिवार को भी तलब किया. उन्होंने खुद अदालत में यह बयान दिया कि यह उनकी मर्जी से था कि बच्ची को हिंदू दंपत्ति को गोद दिया गया था. और यही नहीं, बच्ची भी अपनी जैविक मां को "आंटी" कहकर संबोधित करती थी, जबकि हिंदू दंपत्ति को उसने अपने असली माता-पिता के रूप में स्वीकार किया था.. कोर्ट ने इस मामले में यह भी कहा कि "हम पूरी तरह से संतुष्ट हैं कि दंपत्ति वास्तव में बच्ची को अपनी संतान की तरह पाल रहे हैं. इसके अलावा बच्ची भी उन्हें अपने माता-पिता के रूप में पहचानती है." कोर्ट ने गार्जियन्स एंड वार्ड्स एक्ट का हवाला देते हुए यह भी कहा कि बच्चे के भले के लिए कोई भी व्यक्ति या दंपत्ति कानूनी प्रक्रिया के तहत उसका अभिभावक बन सकता है, और इसमें धर्म कोई बाधा नहीं है.

बच्चे की भलाई से बढ़कर कुछ नहीं

Loading Ad...

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चों के कल्याण से बढ़कर कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं है. चाहे मामला धर्म का हो या फिर किसी और कारण का, अगर बच्चे का भला एक खास दंपत्ति के साथ है, तो समाज और कानून को उस रास्ते पर चलना चाहिए. इस फैसले में धर्म की कोई अहमियत नहीं थी, बल्कि बच्ची के भविष्य और उसके सुरक्षित पालन-पोषण की अहमियत थी.

मामला कैसे उलझा था?

यह पूरा मामला 2012 में शुरू हुआ था, जब इस हिंदू दंपत्ति ने शादी की थी, लेकिन लंबे समय तक उनका बच्चा होने में कोई सफलता नहीं मिली. फिर, उन्होंने अपनी मुस्लिम पड़ोसी की बेटी को गोद लेने का फैसला किया. यह बच्ची एक गरीब महिला की संतान थी, जिसका पति पहले ही गुजर चुका था, और वह खुद भी दिहाड़ी मजदूरी करने वाली थी. परिवार के पास बच्चों का पालन-पोषण करने की स्थिति नहीं थी, इसलिए इस महिला ने अपनी तीसरी बेटी को स्वेच्छा से हिंदू दंपत्ति को गोद दे दिया. फिर, जब दंपत्ति ने इस गोदनामी प्रक्रिया को कानूनी रूप देने के लिए फैमिली कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, तो वहां से उनका आवेदन खारिज कर दिया गया। फैमिली कोर्ट ने यह कहा कि दंपत्ति बच्ची के लिए पूरी तरह से अजनबी हैं. लेकिन दंपत्ति ने हार मानने के बजाय हाई कोर्ट का रुख किया, और यहां जाकर उन्हें बच्ची का कानूनी अभिभावक माना गया.

Loading Ad...

बच्चे के भविष्य को प्राथमिकता देनी चाहिए

यह भी पढ़ें

इस पूरे मामले से एक बड़ा संदेश यह निकलता है कि हम जब भी किसी बच्चे के भविष्य के बारे में सोचते हैं, तो हमें उसे केवल अपने धर्म या परंपराओं के हिसाब से नहीं देखना चाहिए. सबसे पहले हमें यह देखना चाहिए कि उस बच्चे के लिए कौन सबसे बेहतर है, और उसका पालन-पोषण किस माहौल में हो सकता है.

LIVE
अधिक →

Advertisement

Loading Ad...
Loading Ad...
Loading Ad...