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हरियाणा सरकार ने लिया बड़ा फैसला, स्टूडेंट्स बनाएंगे रोबोट, सरकारी स्कूलों में खुलेंगी हाई-टेक लैब्स
Haryana: शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इन अटल टिंकरिंग लैब्स का मुख्य उदेश्य छात्रों में छिपी जिज्ञासा को प्रोजेक्ट और अनुभव का रूप देना है. छात्र अब सिर्फ किताबों में पढ़ेंगे, बल्कि हाथों -हाथ अनुभव भी करेंगे.
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Haryana: हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था में अब एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है. अब तक जिन तकनीकों और उपकरणों का इस्तेमाल केवल निजी स्कूलों या बड़े शहरों के इंजीनियरिंग कॉलेजों में होता था. वे अब सरकारी स्कूलों की लैब का हिस्सा बनेंगे. शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, इन अटल टिंकरिंग लैब्स का मुख्य उदेश्य छात्रों में छिपी जिज्ञासा को प्रोजेक्ट और अनुभव का रूप देना है. छात्र अब सिर्फ किताबों में पढ़ेंगे, बल्कि हाथों -हाथ अनुभव भी करेंगे. यह पहल उन्हें अपने विचारों को व्यावहारिक रूप देने का मौका देगी और बच्चों के अंदर नई खोज और रचनात्मक सोच को बढ़ावा देगी.
रोबोटिक्स और 3D प्रिंटिंग से सीखेंगे बच्चे
इन लैब्स में बच्चों को केवल थ्योरी नहीं पढ़ाई जाएगी. उन्हें सीधे उपकरण दिए जाएंगे ताकि वे खुद छोटे-छोटे रोबोट बना सकें. साथ ही 3D प्रिंटर की मदद से अपने डिज़ाइन को वास्तविक रूप में बदल सके.
बच्चे इलेक्ट्रॉनिक्स के जटिल सर्किट को भी समझेंगे और कोडिंग तथा मेकाट्रॉनिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों से परिचित होंगे. सरकार का मानना है कि बचपन से ही इन चीजों का एक्सपोजर मिलने से बच्चे भविष्य में वैश्विक प्रतियोगिताओं में निजी स्कूलों के बच्चों के बराबर प्रदर्शन कर सकेंगे.
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सिरसा और करनाल बने तकनीकी हब
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इस योजना के तहत लैब्स का भौगोलिक वितरण भी किया गया है. सिरसा जिला इसमें सबसे आगे है, जहां 26 स्कूलों में लैब खोली जाएंगी. वहीं मुख्यमंत्री के गृह जिले करनाल के 20 स्कूलों में लैब्स की शुरुआत होगी.
शिक्षा विभाग का प्रयास है कि राज्य के हर जिले को इस योजना में शामिल किया जाए ताकि किसी क्षेत्र में असंतुलन न रहे. इसके लिए फंड और विशेषज्ञों की टीम भी तैनात की जा रही है, जो शिक्षकों को ट्रेनिंग देंगे और बच्चों का सही मार्गदर्शन सुनिश्चित करेंगे.
STEM शिक्षा को मिलेगा मजबूत आधार
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अटल टिंकरिंग लैब का पूरा ढांचा STEM (साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित) शिक्षा पर आधारित है. अक्सर देखा गया है कि सरकारी स्कूलों के बच्चे गणित और विज्ञान से डरते हैं. लेकिन जब यह विषय प्रयोगात्मक तरीके से पढ़ाए जाएंगे, तो उनकी रुचि बढ़ेगी.
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह पहल छात्रों को केवल नौकरी खोजने वाला बनने की बजाय ‘जॉब क्रिएटर’ बनने की प्रेरणा देगी. इसके अलावा, ग्रामीण इलाकों के बच्चे नए-नए स्टार्टअप आइडियाज और इनोवेशन लेकर सामने आ सकते हैं.
अब नजर टिकी है जमीन पर
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अब यह देखने वाली बात होगी कि ये लैब कितनी जल्दी सभी स्कूलों में लागू होती हैं. हरियाणा के सरकारी स्कूलों से कितने ‘नन्हे वैज्ञानिक’ देश-दुनिया में प्रदेश का नाम रोशन करते हैं, यह आने वाले समय में साफ नजर आएगा.