देहरादून अर्जुन हत्याकांड: 24 घंटे में दबोचे गए शहीद के बेटे के हत्यारे, पुलिस ने किया एनकाउंटर
अर्जुन शर्मा को मारने के लिए दोनों शूटर्स को 15 लाख की सुपारी दी गई थी. अर्जुन का अपनी मां के साथ ही लंबे समय से विवाद चल रहा था. उनकी पत्नी ने सास समेत 4 लोगों पर केस दर्ज करवाया है.
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Arjun Murder Case: देहरादून (Dehradun) में शहीद कर्नल आरसी शर्मा के बेटे और गैस एजेंसी संचालक अर्जुन शर्मा की हत्या का खुलासा हो गया है. पुलिस ने 24 घंटे में आरोपी का एनकाउंटर करते हुए दो आरोपियों को धर दबोचा. बताया जा रहा है दोनों को अर्जुन को मारने के लिए सुपारी दी गई थी.
जानकारी के मुताबिक, लाडपुर जंगल में पुलिस और एक आरोपी के बीच मुठभेड़ हो गई थी. इस दौरान पुलिस ने आरोपियों की घेराबंदी. घेराबंदी के दौरान दोनों आरोपियों ने पुलिस पर फायरिंग कर दी. जवाब में पुलिस ने भी फायरिंग की. जिसमें गोली एक आरोपी के पैर में जा लगी. वहीं, दूसरे आरोपी की गिरफ्तारी एक खंडहर फैक्ट्री से की गई थी. फैक्ट्री में छापेमारी के दौरान दूसरे आरोपी ने भी पुलिस पर फायरिंग की कोशिश की थी.
पूछताछ में आरोपियों ने क्या बताया
दोनों घायल शूटर को कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती कराया गया है. पुलिस के मुताबिक, शुरुआती पूछताछ में दोनों आरोपियों ने अर्जुन शर्मा की हत्या में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है. इनके कब्जे से दो देशी तमंचे और वारदात में इस्तेमाल स्कूटी जब्त की गई है.
बताया जा रहा है अर्जुन को मारने के लिए दोनों को 15 लाख की सुपारी दी गई थी. अर्जुन की पत्नी अभिलाषा ने अर्जुन की मां पर ही हत्या का शक जताते हुए 4 लोगों के खिलाफ नामजद तहरीर दी है. बताया जा रहा है मां और बेटे में 5 साल से संपत्ति को लेकर विवाद चल रहा था. पत्नी अभिलाषा का आरोप है कि उनकी सास बीना शर्मा, विनोद उनियाल, संगीता उनियाल और डॉ. अजय खन्ना के साथ मिलकर पैसों का लेनदेन कर रही थीं. हालांकि, पूरे घटनाक्रम और साजिश के पहलुओं की गहनता से जांच की जा रही है.
बीच बाजार अर्जुन को मारी गोली
मामला बुधवार 11 फरवरी का है. जब तिब्बती मार्केट और परेड ग्राउंड के पास भारत गैस एजेंसी के संचालक 42 वर्षीय अर्जुन शर्मा की स्कूटी सवार हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. उस समय अर्जुन अपनी गाड़ी में बैठने जा रहे थे. जैसे ही वह वापस गाड़ी की ओर बढ़े, दो बदमाशों ने उन्हें गोली मारकर लहूलुहान कर दिया. गोली अर्जुन के सीने में जा लगी और मौके पर ही मौत हो गई. जबकि हमलावर मौके से फरार हो गए.
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अर्जुन के पिता रमेश चंद शर्मा भारतीय सेना में कर्नल के पद पर तैनात थे. जो 38 साल पहले शहीद हो गए थे. उस समय अर्जुन नाबालिग थे. सरकार ने उनके बलिदान के बाद परिवार को अजीविका के तौर पर गैस एजेंसी दी थी.
हमलावरों ने की थी रेकी
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पुलिस के मुताबिक, वारदात को अंजाम देने से पहले हमलावरों ने रेकी की थी. अर्जुन उस समय टेनिस खेलने के बाद घर जा रहे थे. अर्जुन ने पहले टेनिस किट गाड़ी में रखी, फिर पास के ठेले से फल कटवाए और गाड़ी की ओर बढ़े. हमलावरों को उनका पूरा शेड्यूल पता था.
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