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CM योगी ने भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में UP के टॉप-10 स्कूलों को किया पुरस्कृत, कहा- एक भारत-श्रेष्ठ भारत चाहिए
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में आयोजित प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला को संबोधित किया. यहां उन्होंने कहा, समाज को बांटने वाले तत्व आज भी सक्रिय हैं.
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय में अखिल विश्व गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष के प्रांतीय शिक्षक गरिमा कार्यशाला में शामिल हुए. इस दौरान उन्होंने मां गायत्री, पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य और माता भगवती देवी की फोटो पर दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. इस मौके पर CM योगी ने स्मारिका का विमोचन और भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा में उत्तर प्रदेश के शीर्ष-10 विद्यालयों को पुरस्कृत भी किया.
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गायत्री परिवार की प्रतियोगिता में 11 लाख से अधिक छात्र-छात्राएं जुड़े. आज का युवा ही भारत का भाग्य विधाता बनने वाला है. हम बिखरा-बंटा, जातीय खेमों में लड़ता भारत नहीं चाहते. ऐसा सोचने वाले पूर्वजों के प्रति श्रद्धा नहीं रखते हैं. हम ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ चाहते हैं, प्रधानमंत्री मोदी जी ने भी हम सबको ऐसे भारत के लिए कार्य करने के लिए कहा है.
‘गायत्री परिवार ने यज्ञों की वेदी पर साथ बैठाकर सर्वसमाज को जोड़ा’
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CM योगी ने कहा कि गायत्री परिवार के पास डॉ. प्रणव पंड्या का मार्गदर्शन और डॉ. चिन्मय पंडया जैसे दूरदर्शी नायक हैं. इसलिए परिवार को अगले 100 वर्ष के लिए लक्ष्य तय करना है. गायत्री परिवार को तनावग्रस्त, संघर्ष में उलझी, अस्तित्व के जूझती मानवता के जीवन में नया उजाला लाना है. उन्होंने कहा,
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‘जब देश पराधीन था और व्यक्ति हताश-निराश था, लोगों को लगता था कि गुलामी नियति बन चुकी है. तब ब्रजभूमि आगरा में जन्म लेकर भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्यों और परंपरा के प्रति अगाध निष्ठा रखने वाले एक ऋषि का प्रादुर्भाव होता है.’
CM योगी ने कहा, पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य ने मथुरा में प्रारंभिक साधना को बढ़ाते हुए हरिद्वार में जिस गायत्री परिवार की स्थापना की, उसने यज्ञों के माध्यम से सर्वसमाज को एक वेदी पर बैठाकर सामाजिक एकता का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया.
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'तीन साल में तीन संस्थाएं, सबका लक्ष्य एक'
मुख्यमंत्री ने कहा कि 1923 में गोरखपुर में गीताप्रेस, 1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और 1926 में अखिल विश्व गायत्री परिवार की स्थापना हुई. तीनों के रास्ते, जगह भले अलग हैं, लेकिन लक्ष्य एक है. तीनों संगठनों ने समाज की सुप्त चेतना को जागृत किया और उन्हें सनातन मूल्यों के साथ जोड़ा. भारत-भारतीयता का अहसास करके युवाओं को देश की आजादी के लिए कार्य करने को प्रेरित किया.
आजादी के आंदोलन से जुड़े आचार्य जी
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CM योगी ने कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा स्वाधीनता संग्राम सेनानी के रूप में आजादी के आंदोलन से जुड़े रहे. आजादी के आंदोलन से जुड़े अनेक ऋषियों ने इसमें सक्रिय योगदान दिया, लेकिन उन्हें लगा कि सफलता के लिए भौतिक ताकत के साथ आध्यात्मिक शक्ति की भी आवश्यकता है, तो साधना के माध्यम से उसे आगे बढ़ाया.
विचार पर चलने वाला संगठन तय करता है लंबी दूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि महर्षि विश्वामित्र की ओर से रचित सृष्टि का पहला मंत्र ‘गायत्री मंत्र’ परमपिता के तेज से जोड़ने का आह्वान करता है. जिसने भी इसकी शक्ति को अंगीकार किया, उसका कल्याण हो गया. पं. श्रीराम शर्मा जी इस संगठन को अपना नाम दे सकते थे, लेकिन उनका मानना था कि व्यक्ति से बड़ा परिवार होता है. इसलिए इसे गायत्री परिवार नाम दिया। व्यक्ति के नाम पर चलने वाला संगठन कुछ वर्षों के बाद धराशायी हो जाता है, लेकिन विचार के नाम पर चलने वाला संगठन लंबी दूरी तय करता है. 100 वर्ष की यह साधना इसका प्रमाण है. शब्द ब्रह्म है, विचार कभी नहीं मरते, इसी का प्रतीक है अखिल विश्व गायत्री परिवार.
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संकट का मिलकर सामना करता था संयुक्त परिवार
CM योगी ने कहा कि यज्ञों की वेदी पर ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना से समाज को जोड़ने का काम पवित्र है. पहले संसाधन कम थे, लेकिन परिवार हमारी ताकत था. सभी भाई-उनके बच्चे संयुक्त परिवार की परंपरा में रहते थे. हर कोई मिलकर संकट का सामना करता था. आज परिवार सीमित हो गए. छत भले एक हो, लेकिन पांच परिवारों के मुख अलग-अलग दिशा में हैं. गायत्री परिवार जैसी संस्थाओं के कारण अवश्य स्थिति कुछ संतोषजनक है. दुनिया में बिखर रहे समाज और तबाह हो रहे परिवारों को बचाने के लिए मंत्रालय गठित करना पड़ा. एक मंत्री देख रहा है कि तनाव से बचने के लिए क्या करना है.
बिखराव रोकने का दायित्व उठाए गायत्री परिवार
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मुख्यमंत्री ने गायत्री परिवार की सराहना करते हुए कहा कि इस परिवार की वजह से आज हर बच्चा गायत्री मंत्र सुना देता है. तुतलाती भाषा में बच्चों के मुख से गायत्री मंत्र सुनकर बहुत अच्छा लगता है. समाज में बिखराव को रोकने का दायित्व भी गायत्री परिवार को उठाना पड़ेगा. पं. श्रीराम शर्मा उन महापुरुषों में से हैं, जिन्होंने धर्म को विज्ञान से जोड़ा. धर्म और विज्ञान एक दूसरे के सहयोगी हैं. डॉ. चिन्मय पंड्या भी मॉडर्न मेडिसिन के चिकित्सक हैं, लेकिन अखिल विश्व गायत्री परिवार को आगे बढ़ा रहे हैं.
समाज की चेतना और युगनिर्माता हैं शिक्षक
CM योगी ने शिक्षकों को समाज की चेतना और युगनिर्माता बताया. उन्होंने कहा कि जब शिक्षक जागृत होता है और ईमानदारी से दायित्वों का निर्वहन करता है तो भारत को विश्वगुरु बनने में देर नहीं लगती. जब दुनिया अज्ञानता के अंधकार में थी, तब भारत में श्रेष्ठ आचार्यों की परंपरा ने तक्षशिला और नालंदा जैसे श्रेष्ठ विश्वविद्यालय दिए. गुरुकुल और ऋषि परंपरा का नाम लेकर सीएम ने महर्षि वशिष्ठ-श्रीराम, महर्षि सांदिपनी-श्रीकृष्ण, चाणक्य-चंद्रगुप्त का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इस परंपरा को फिर से जीवित करने की आवश्यकता है.
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बांटने की प्रवृत्ति भारत माता और पूर्वजों के प्रति अपराध
मुख्यमंत्री ने कहा कि गुलामी के दौर में एक तबका समाज को विभाजित तो एक तबका समाज को जोड़ रहा था. बांटने वाले स्वाधीनता का विरोध करते थे और समाज को विभाजित करते थे. आज भी बांटने वाले तत्व क्षेत्र, जाति, भाषा के नाम पर समाज की एकता को छिन्न-भिन्न कर रहे हैं. यह भारत माता व पूर्वजों के प्रति अपराध है. भारत की स्वाधीनता को खतरे में डालने की शरारतपूर्ण चेष्टा है. जब राष्ट्र पर संकट आता है तो शिक्षकों की जिम्मेदारी बड़ी हो जाती है. उन्हें विभाजनकारी ताकतों को सफल नहीं होने देना है. यज्ञ की वेदी हमें ‘यह मेरा नहीं’ के भाव से जोड़ती है. प्रकृति, पेड़, जल स्रोत, गंगा मैया, सूर्य नारायण कभी किसी के साथ भेदभाव नहीं करते.
सरकार ने लगाए 275 करोड़ पौधे
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CM योगी ने कहा कि यज्ञकुंड में समिधा डालने का भाव जोड़ना, आगे बढ़ाना और सामाजिक एकता के माध्यम से राष्ट्रीय एकता को मजबूती प्रदान करना है. उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘एक पेड़ मां के नाम’ के भाव की चर्चा करते हुए कहा कि हमारी सरकार ने 2017 से 2026 तक UP में 275 करोड़ पौधरोपण किए हैं.
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस साल सरकार ने 35 करोड़ पौधे लगाए हैं. उनके संरक्षण और सुरक्षा के उपाय भी किए गए हैं. देहरादून फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट देहरादून और गुरु घासीदास विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ हमें थर्ड पार्टी के रूप में इसकी रिपोर्ट देते हैं. रिपोर्ट के अनुसार जवाबदेही तय होती है. इसके पीछे हमारा ध्येय है कि भावी पीढ़ी को सुखद और सुंदर माहौल दे सकें.
शरीर में धमनियों जैसी नदियों की भूमिका
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि आज हर नदी प्रदूषित हो गई है. स्वार्थ के लिए नदी संस्कृति को नष्ट कर दिया गया. जीवनदायिनी नदियां नहीं रहेंगी तो जीवन सृष्टि के सामने संकट खड़ा होगा. नदियों की भूमिका वैसे ही है, जैसे शरीर में धमनियों की. हमें नदियों को बचाकर उन्हें अविरल-निर्मल करना होगा। एक नदी दशकों पहले सूख गई थी. हमने सेटेलाइट मैपिंग से उसके इमेज निकाले, उसकी खुदाई प्रारंभ कराई. कार्य संपन्न होने के बाद बरसात में वहां जल धारा फूट पड़ी. इससे पूर्वजों की तपस्या साकार हुई. जिन लोगों ने उस नदी का जल ग्रहण किया होगा, नदी के पुनर्जीवित होने पर उन्हें आशीर्वाद प्राप्त होगा.
हर व्यक्ति कर्तव्य के प्रति ईमानदार हो- CM योगी
CM योगी ने योग दिवस को मान्यता दिलाने के लिए PM नरेंद्र मोदी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि 21 जून को 190 से अधिक देश योग से जुडकर ऋषि परंपरा के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हैं. आजादी के शताब्दी महोत्सव के हमारे संकल्प स्पष्ट हैं, गुलामी की मानसिकता को त्यागना, विरासत पर गौरव की अनुभूति, सामाजिक समता के लिए काम करना, विकसित भारत की संकल्पना को आगे बढ़ाना, नागरिक कर्तव्यों का अहसास करना और अधिकार से अधिक कर्तव्य को महत्व देना. हर व्यक्ति कर्तव्य के प्रति ईमानदार हो जाए तो भारत को कोई आंख नहीं दिखा सकता, बल्कि भारत दुनिया को नेतृत्व देगा। 2047 हम सभी को अभिभूत करेगा. कार्यक्रम में भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के टॉप-10 स्कूलों को सम्मानित किया गया.
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भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा के टॉप-10 स्कूल सम्मानित
- सीतापुर के सीतापुर इंटर कॉलेज
- आशुतोष बृज मोहन लाल मेमोरियल कॉलेज
- रायबरेली का चंद्रशेखर मेमोरियल पब्लिक स्कूल
- लखनऊ के लखनऊ पब्लिक स्कूल और सिटी मॉन्टेसरी स्कूल
- गाजियाबाद का डॉ. केएन मोदी साइंस एंड कॉमर्स इंटर कॉलेज
- अमेठी का शिव प्रताप इंटर कॉलेज
- बुलंदशहर का अमर सिंह इंटर कॉलेज
- चित्रकूट का चित्रकूट इंटर कॉलेज
- मुजफ्फरनगर का एमजी पब्लिक स्कूल शामिल है
नई पीढ़ी में स्थापित हों भारतीय मूल्य: डॉ. चिन्मय पंड्या
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कार्यशाला में डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि काम, क्रोध, लोभ, स्वार्थ और संकीर्णता आज मनुष्य के भीतर की चुनौती हैं. धर्म, न्याय, नीति, मूल्य और सदाचार को मजबूत करना होगा. भारतीय संस्कृति ज्ञान परीक्षा का उद्देश्य नई पीढ़ी में भारतीय संस्कृति के मूल भाव को स्थापित करना है. इस अवसर पर जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, विधान परिषद सदस्य डॉ. महेंद्र सिंह, विधायक राजेश्वर सिंह, केंद्रीय जोन प्रभारी परमानंद द्विवेदी, समन्वयक रामयश तिवारी, गायत्री परिवार के स्वयंसेवक और प्रदेशभर से आए शिक्षक मौजूद रहे.