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UP चुनाव से पहले BJP-RSS का मास्टर प्लान... 80 हजार बैठकों के जरिए 42-43 बिरादरियों तक पहुंचने की तैयारी, जानें पूरी रणनीति
यूपी विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और RSS ने तैयारियां तेज कर दी हैं. सुल्तानपुर की समन्वय बैठक में कार्यकर्ताओं की नाराजगी और सरकारी निकायों में प्रतिनिधित्व की कमी का मुद्दा उठा. सूत्रों के मुताबिक, संघ ने फिलहाल मतभेदों के बजाय चुनावी तैयारियों और संगठन की मजबूती पर ध्यान देने का संदेश दिया है.
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उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए अब कुछ महीनों का समय बचा है. ऐसे में सत्ताधारी दल बीजेपी यो या विपक्ष की समाजवादी पार्टी समेत अन्य दल सभी चुनाव की तैयारियों में जुट गए हैं. ऐसे में बीजेपी इस चुनाव में प्रचंड बहुतमत के साथ जीत की हैट्रिक लगाने की कोशिश में पूरी ताकत के साथ मैदान में डटी हुई है. इस बीच बीजेपी के बैक बोन यानी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने बीजेपी के मिलकर अपनी तैयारियों को तेज कर दिया है. चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने, कार्यकर्ताओं की नाराजगी दूर करने और समाज के अलग-अलग वर्गों तक पहुंच बनाने पर जोर दिया जा रहा है. इसी कड़ी में संघ, बीजेपी और सहयोगी संगठनों के बीच बैठकों का दौर जारी है. इन बैठकों में चुनावी रणनीति के साथ संगठन के भीतर मौजूद असंतोष और जमीनी स्तर पर आ रही चुनौतियों पर भी चर्चा हो रही है.
टीवी 9 पर सूत्रों के हवाले से छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक, हाल ही में उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में हुई समन्वय बैठक में कार्यकर्ताओं की शिकायतें प्रमुखता से सामने आईं. कुछ कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार के विभिन्न निकायों, आयोगों और संस्थाओं में उन्हें अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिला है. वहीं, नगर पालिका जैसे स्थानीय निकायों में नामांकन कोटे के तहत नियुक्तियों में देरी को लेकर भी असंतोष की बात सामने आई है. बताया जा रहा है कि इन शिकायतों पर चर्चा के दौरान संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने फिलहाल चुनावी तैयारियों को प्राथमिकता देने का संदेश दिया. संगठन के सामने 2027 का विधानसभा चुनाव एक अहम चुनौती है, इसलिए अभी आपसी मतभेदों के बजाय संगठन की मजबूती और चुनाव की तैयारियों पर ध्यान केंद्रित करने की बात कही गई. हालांकि, कार्यकर्ताओं की नाराजगी को लेकर उठे सवालों का समाधान किस तरह और कब किया जाएगा, यह आगे की रणनीति में महत्वपूर्ण रहेगा.
80 हजार सर्व समाज बैठकों के जरिए बनेगी पहुंच
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बीजेपी और संघ की रणनीति में सर्व समाज बैठकों को खास जगह दी गई है. सूत्रों के अनुसार, पूरे उत्तर प्रदेश में करीब 80 हजार ऐसी बैठकें आयोजित करने की योजना है. इसके लिए लगभग 42 से 43 बिरादरियों की पहचान की गई है, जिनके बीच पहुंचकर संवाद स्थापित करने पर जोर रहेगा. इन बैठकों का उद्देश्य अलग-अलग जातियों, समुदायों और सामाजिक समूहों के लोगों से सीधे बातचीत करना है. बीजेपी शक्ति केंद्र स्तर पर भी ऐसी बैठकें आयोजित करेगी. सामान्य तौर पर तीन से पांच बूथों के समूह को शक्ति केंद्र कहा जाता है. इसके जरिए संगठन की पहुंच बूथ स्तर तक बढ़ाने की योजना है. शहरी इलाकों में इन बैठकों को 'ड्राइंग रूम बैठक' का नाम दिया गया है, ताकि स्थानीय लोगों के साथ छोटे समूहों में संवाद किया जा सके. इसके साथ ही 'ग्रामोदय से बूथोदय' की रणनीति पर भी काम किया जा रहा है. अगले चार महीनों में वैचारिक संगठनों और कार्यकर्ताओं को सक्रिय करके जमीनी स्तर पर संपर्क अभियान आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई है.
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जन-स्पर्श और जन-जागरण अभियान पर जोर
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चुनावी तैयारियों के तहत जन-स्पर्श अभियान के जरिए गांव-गांव जाकर आम लोगों, सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों और कमजोर वर्गों से सीधा संपर्क स्थापित करने की योजना है. इस दौरान स्थानीय लोगों और पारंपरिक समर्थकों की शिकायतें सुनने तथा उनकी समस्याओं को समझने पर भी ध्यान दिया जाएगा. वहीं, जन-जागरण अभियान के माध्यम से योगी आदित्यनाथ सरकार के विकास कार्यों, कल्याणकारी योजनाओं और प्रशासनिक पहलों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने की तैयारी है. इसका मकसद सरकार के कामकाज से जुड़ी जानकारी को ग्रामीण क्षेत्रों और स्थानीय समुदायों तक पहुंचाना है. संगठन-संवाद अभियान भी इस रणनीति का हिस्सा होगा. इसके तहत कार्यकर्ताओं, स्थानीय नेताओं और विधायकों के बीच समन्वय बेहतर करने की कोशिश की जाएगी. संगठन और सरकार के बीच संवाद में जहां दूरी महसूस की जा रही है, उसे कम करने पर जोर रहेगा. इससे कार्यकर्ताओं की बात नेतृत्व तक पहुंचाने और स्थानीय स्तर की समस्याओं को समझने में मदद मिल सकती है.
गांव से बूथ तक निगरानी की व्यवस्था
बीजेपी की योजना में ग्रामीण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है. ग्राम-स्पर्श अभियान के तहत गांवों में संगठन की सक्रियता बढ़ाने और लोगों के साथ नियमित संपर्क स्थापित करने पर जोर रहेगा. इसके साथ ही गांव, बूथ और शक्ति केंद्र स्तर पर कार्यकर्ताओं की भूमिका मजबूत करने की तैयारी है. अभियान को केवल बैठकों और कागजी योजनाओं तक सीमित न रखने के लिए निगरानी व्यवस्था बनाने पर भी जोर दिया गया है. सूत्रों के मुताबिक, जमीनी गतिविधियों की जानकारी तीन स्तरों वाले व्हाट्सएप समूहों और पार्टी के 'सरल' ऐप के जरिए जुटाने की व्यवस्था की जा रही है. जिला स्तर पर निगरानी के बाद लखनऊ स्थित वार रूम से भी गतिविधियों पर नजर रखी जाएगी.
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बहरहाल, 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और संघ की रणनीति में सामाजिक संपर्क, सरकारी योजनाओं का प्रचार, संगठनात्मक समन्वय और बूथ स्तर की सक्रियता प्रमुख विषय बनकर उभरे हैं. अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इन अभियानों के जरिए संगठन जमीनी शिकायतों को दूर करने और लोगों के साथ संवाद बढ़ाने में कितना आगे बढ़ पाता है.