चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध के बीच BJP नेता ने ही कर दी दोबारा SIR की मांग, बंगाल में क्यों उठे सवाल?
समिक भट्टाचार्य ने दावा किया कि बंगाल में चुनावों से पहले हुई SIR प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली और गड़बड़ी हुई थी.
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एक तरफ विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोला है. दूसरी ओर BJP शासित राज्य में ही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को फिर से करवाने की मांग की जा रही है. ये मांग किसी और ने नहीं बल्कि बंगाल BJP अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने की है.
समिक भट्टाचार्य ने दावा किया कि बंगाल में चुनावों से पहले हुई SIR प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली और गड़बड़ी हुई थी. उन्होंने आरोप लगाए कि पिछली SIR प्रक्रिया के दौरान तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शासनकाल में बड़े पैमाने पर हिंसा, डराने-धमकाने और दस्तावेजों को जलाने की घटनाएं हुई थीं. जिसके कारण सभी घुसपैठियों और अवैध वोटरों के नाम लिस्ट से नहीं हटाए जा सके.
TMC पर SIR को प्रभावित करने के आरोप
BJP अध्यक्ष ने SIR के दौरान हुए कई घटनाक्रमों का जिक्र किया. उन्होंने कहा,
‘पिछली SIR प्रक्रिया हिंसा से प्रभावित थी. हमारे बूथ-स्तरीय प्रतिनिधियों (BLAs) की पिटाई की गई और वोटर दस्तावेजों में आग लगा दी गई. मालदा के मोथाबाड़ी में तो उग्र प्रदर्शनकारियों ने न्यायिक अधिकारियों तक को बंधक बना लिया था.’समिक भट्टाचार्य ने दावा किया कि उस समय BJP विधायक अग्निमित्रा पॉल पर भी हमला किया गया था. उनके हाथ से कागज भी छीनकर जला दिए गए थे. उन्होंने दावा किया कि पिछली SIR प्रक्रिया हिंसा की भेंट चढ़ गई थी. अगर निष्पक्ष तरीके से काम हुआ होता तो और लाखों अवैध घुसपैठी वोटर लिस्ट से बाहर होते. BJP का मानना है कि SIR प्रक्रिया में सबसे ज्यादा नुकसान रोहिंग्याओं और बांग्लादेशी घुसपैठियों को हुआ.
BJP ने ज्ञानेश कुमार को बताया ‘हीरो’
समिक भट्टाचार्य ने विपक्ष पर निशाना साधा और CEC ज्ञानेश कुमार का बचाव किया. उन्होंने कहा, ‘बंगाल में तमाम हिंसा और बाधाओं के बावजूद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने बिना किसी चुनावी हिंसा के अभूतपूर्व और निष्पक्ष चुनाव का उपहार दिया है. इसीलिए बंगाल की जनता उन्हें एक हीरो के रूप में देखती है. जिन विपक्षी नेताओं का बंगाल में जनाधार खत्म हो चुका है, वे अब दिल्ली जाकर कॉकरोचों और छिपकलियों के साथ हाथ मिला रहे हैं.’
बंगाल में SIR के बाद कितने नाम कटे?
पश्चिम बंगाल में SIR प्रक्रिया के दौरान करीब 27 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए थे. चुनाव के बाद सितंबर 2026 में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि 22 लाख से ज्यादा मतदाताओं की अपीलें ट्रिब्यूनल के सामने पेंडिंग हैं. केस पेंडिंग होने की वजह से हाल ही में हुए नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव में कई मतदाता वोट नहीं कर सके थे.
CPM ने किया पलटवार
समिक भट्टाचार्य के दावे पर CPM के वरिष्ठ नेता सुजान चक्रवर्ती न पलटवार किया है. उन्होंने कहा, SIR के बाद बंगाल की वोटर लिस्ट से एक करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्याओं के नाम हटेंगे. अब नया SIR मांगने से पहले BJP नेताओं को देश के सामने आंकड़ा रखना चाहिए कि आखिर कितने घुसपैठिए पकड़े गए. उन्होंने आरोप लगाए कि BJP नेता ज्ञानेश कुमार का बचाव इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि ज्ञानेश कुमार ही नरेंद्र मोदी की राजनीतिक साख के संरक्षक हैं.’
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