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Bihar का गुमनाम हीरो! ड्यूटी संभालते ही BJP की जीत पक्की, पहले हिमाचल अब बंगाल में भी धमाल
इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन का अहम रोल था,लेकिन इस जीत के पीछे एक और नेता का हाथ है, जो शयद सुर्खिया में नहीं रहा, लेकिन पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ. वह नेता हैं बिहार BJP के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री, मंगल पांडेय.
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पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP ) की जीत को सुनिश्चित करने में कई बड़े नेताओं का योगदान रहा है. इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन का अहम रोल था,लेकिन इस जीत के पीछे एक और नेता का हाथ है, जो शयद सुर्खिया में नहीं रहा, लेकिन पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ. वह नेता हैं बिहार BJP के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री, मंगल पांडेय. आइए जानते है कौन है मोदी का वो धुरंधर...
मंगल पांडेय का योगदान: बंगाल में बीजेपी की रणनीति
जब बीजेपी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी अपने प्रमुख नेताओं से लेकर राज्य-स्तरीय नेताओं तक बांटी, तो मंगल पांडेय को राज्य का प्रभारी बनाया गया. उनका काम सिर्फ चुनावी रणनीति बनाना और उसे लागू करना था, लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत और ईमानदारी से इस काम को इस कदर अंजाम दिया कि बीजेपी को बंगाल में भारी जीत मिली. पांडेय ने अपने स्तर पर यह सुनिश्चित किया कि हर सीट पर सही रणनीति लागू हो, और किस नेता को कौन सी जिम्मेदारी दी जाए, यह फैसला भी उन्होंने ध्यान से किया.
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हिमाचल में भी किया कमाल
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मंगल पांडेय की राजनीति में यह पहली बार नहीं था जब उन्होंने किसी चुनाव को अपनी मेहनत से जीत दिलाई हो. 2017 में हिमाचल प्रदेश चुनाव में उन्हें बीजेपी का प्रभारी बनाया गया था. उस समय हिमाचल में कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन पांडेय ने अपनी मेहनत और सही रणनीतियों से बीजेपी को जीत दिलाई. तब भी जब उनसे उनकी सफलता का श्रेय पूछा गया, तो उन्होंने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह की नेतृत्व क्षमता को दिया.
चुपचाप काम करने वाले नेता- मंगल पांडेय की सादगी
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मंगल पांडेय की राजनीति में एक अलग ही पहचान है. वह किसी तरह की लाइमलाइट से दूर रहते हुए काम करने में विश्वास रखते हैं. उनकी छवि एक ऐसे नेता के रूप में है, जो ज्यादा बातें नहीं करते, लेकिन जो भी जिम्मेदारी मिलती है, उसे पूरी निष्ठा से निभाते हैं. बिहार में उनकी पहचान एक "चुप्पा नेता" के तौर पर है. उन्होंने कभी भी अपने काम को लेकर ज्यादा हंगामा नहीं किया और न ही मीडिया से ज्यादा बात की.
स्वास्थ्य मंत्रालय से लेकर चुनावी जिम्मेदारी तक
बिहार के राजनीति में अपनी सधी हुई भूमिका के लिए मशहूर मंगल पांडेय ने विधान परिषद के सदस्य के रूप में कई बार स्वास्थ्य मंत्रालय संभाला था. इस दौरान उन्होंने कई अहम फैसले लिए, जो बिहार के स्वास्थ्य विभाग के लिए फायदेमंद रहे. इसके बाद जब पार्टी ने उन्हें 2025 के विधानसभा चुनाव में सिवान सीट से उम्मीदवार बनाने का फैसला लिया, तो उन्होंने बिना किसी शोरगुल के अपनी चुनावी लड़ाई लड़ी और जीत हासिल की.
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चुप रहते हुए अपनी जिम्मेदारी निभाना
मंगल पांडेय को बिहार विधानसभा में भी ज्यादा बोलने का शौक नहीं है. यही कारण है कि विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने कई बार उनके ऊपर तंज कसे हैं, लेकिन पांडेय ने कभी भी इन पर पलटवार नहीं किया. वह समझते हैं कि राजनीति में काम बोलता है, और ज्यादा शोर मचाने से कोई फायदा नहीं होता। इसी शांति और अनुशासन के साथ उन्होंने बंगाल चुनाव में भी बीजेपी की जीत सुनिश्चित की.
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मंगल पांडेय उन नेताओं में से एक हैं, जिनका काम बोलता है, लेकिन उन्हें उतनी पहचान नहीं मिलती जितनी मिलनी चाहिए. फिर भी, बीजेपी की जीत में उनका योगदान महत्वपूर्ण है. उनकी मेहनत, सादगी और रणनीतिक सोच ने पार्टी को सफलता दिलाई, और यह साबित कर दिया कि असल में राजनीति में काम करने वालों की कोई कमी नहीं होती, बस जरूरत होती है सही समय और सही जगह पर मेहनत करने की ...