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पाकिस्तान में जिंदा हुई भारतीय संस्कृति… कहीं ‘कृष्ण’ की गूंज, तो कहीं बाबरी की जगह जैन मंदिर
पाकिस्तान के लाहौर में ब्रिटिश और मुगलिया विरासत को मिटाकर फिर से हिंदू संस्कृति को जीवंत किया जा रहा है. यहां 9 जगहों के इस्लामी नाम बदलकर फिर से हिंदू देवी-देवताओं के नाम पर रखे जा रहे हैं.
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पाकिस्तान का पंजाब, जहां की हूकुमत पूर्व प्रधानमंत्री बेटी नवाज शरीफ बेटी मरियम नवाज शरीफ के हाथ में हैं. जो भारत के पंजाब से महज 50 किलोमीटर दूर है, लेकिन अब यहां भी भारतीय संस्कृति नजर आएगी, देवी-देवताओं के नाम गूंजेंगे. क्योंकि मरियम कैबिनेट ने फैसला लिया है कि पाकिस्तान की इस्लामी जगहें अब हिंदू नामों से जानी जाएंगी.
मरियम कैबिनेट में लिए गए फैसले के मुताबिक, दो महीने के भीतर लाहौर में 9 जगहों के इस्लामी नाम फिर से मूल या पुराने हिंदू नामों से जाने जाएंगे. इनमें इस्लामपुरा कहलाएगा कृष्णनगर, बाबरी मस्जिद चौक हो जाएगा जैन मंदिर चौक. इन जगहों का आधिकारिक रूप से नाम परिवर्तन हो जाएगा.
इन 9 जगहों का होगा हिंदू नामकरण
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- इस्लामपुरा- कृष्णनगर
- सुनतनगर- संतनगर
- मौलाना जफर चौक- लक्ष्मी चौक
- बाबरी मस्जिद चौक- जैन मंदिर चौक
- मुस्तफाबाद- धर्मपुरा
- सर आगा खान चौक- डेविस रोड
- अल्लामा इकबाल रोड- जेल रोड
- फातिमा जिन्ना रोड- क्वींस रोड
- बाग-ए-जिन्ना- लॉरेंस रोड
ऐसा नहीं है कि पाकिस्तान में पहली बार किसी जगह का नाम बदला है, दरअसल, जिन इस्लामी जगहों का नाम बदला गया है वो पहले हिंदू नामों से ही जानें जाते थे, यानी इन जगहों के मूल नाम भारतीय संस्कृति और ब्रिटिश काल से ही जुड़े थे. अब मरियम नवाज शरीफ ने इन्हें वापस इनकी पहचान मूल स्वरूप में लाने का फैसला लिया है. उन्होंने लाहौर की पुरानी संस्कृति को सहेजने और वापस लौटाने की पहल की है.
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हिंदू नामकरण के खिलाफ नहीं उठी विरोध की आवाज
पाकिस्तान में जहां कई जगहों पर हिंदुओं के धर्म परिवर्तन और ईशनिंदा से जुड़े मामलों पर सख्त सजा दी जाती है, वहीं सवाल उठता है कि क्या इस्लामी जगहों का नाम बदलने पर किसी को दिक्कत नहीं हुई. असल में इस बदलाव के खिलाफ लाहौर में किसी कट्टरपंथी ने मोर्चा नहीं खोला, या यूं कहे, उन्हें ऐसा करने ही नहीं दिया गया.
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दरअसल, पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ ने कट्टरपंथ के नाम पर सड़कों पर उतार मचाने के लिए कुखरात तहरीक-लब्बैक पाकिस्तान (TLP) को बैन कर रखा है.
मरियम नवाज शरीफ का अगला टारगेट पाकिस्तान के सिंध और खैबर पख्तूनख्वाह प्रांतों में भी कई जगहों के नाम उनके मूल नामों पर है.
पाकिस्तान में यह नाम परिवर्तन न केवल एक प्रशासनिक फैसला है, बल्कि यह उस चाहत को पूरा करने जैसा है, जो लोगों के दिलों में कई साल से दबी हुई थी. यह उस विरासत का हिस्सा है, जिसकी झलक चौक-चोराहों और पीढ़ियों में नजर आती है.
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जब 1990 के दशक में जैन मंदिर चौक का नाम बदलकर बाबरी मस्जिद चौक किया गया था, तो लोगों ने इसे स्वीकार नहीं किया, यह इलाका जैन मंदिर ही कहलाया. कागजों में भले ही इसे बाबरी नाम दिया गया हो.
पाकिस्तान में किसने किया था हिंदू नामों का इस्लामीकरण?
लाहौर में नाम बदलने की कवायद 1990 के दशक में उस वक्त हुई जब भारत में बाबरी मस्जिद का ढांचा गिराया गया था. उस वक्त नवाज शरीफ की सरकार थी. अब उन्हीं की बेटी नवाज शरीफ इन जगहों को उनकी वास्तविक पहचान से रुबरू करवा रही हैं.
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बताया जा रहा है पिता नवाज शरीफ के साथ ही मरियम नवाज शरीफ ने मीटिंग की थी. जिसमें लाहौर हेरिटेज एरिया रिवाइवल प्रोजेक्ट के तहत नए नामों को फिर से पुराने हिंदू और ब्रिटिश विरासत पर रखने का फैसला लिया गया.
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नवाज शरीफ का कहना है कि हमें यूरोप से सीख लेने चाहिए. वे ऐतिहासिक से छेड़छाड़ नों करते हैं. लाहौर के पुरले नाम हमारा इतिहास है, इसे हमें सहेजना है, बदलना नहीं है. वहीं, मुख्यमंत्री मरियम नवाज शरीफ ने बताया कि लाहौर का इतिहास और संस्कृति इनके पुरानों नामों से जुड़ी है. मरियम के इस फैसले से लाहौर के लोग बेहद खुश हैं.