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कौन हैं रूबल नागी? जिन्होंने बदली झुग्गियों के बच्चों की तकदीर, दुबई के क्राउन प्रिंस से मिला ग्लोबल टीचर का सम्मान

रूबल नागी ने उन बच्चों तक शिक्षा पहुंचाई जो कभी स्कूल नहीं जा पाए. उन्होंने दीवारों से शिक्षा का कॉन्सेप्ट बदल दिया. 800 से ओपन ज्यादा लर्निंग सेंटर बनाए. उनकी कलात्मक मुहिम क्रांतिकारी बदलाव लेकर आई.

Who is Rouble Nagi: ‘शिक्षक वह दीपक है जो खुद जलकर दूसरों की जिंदगी को रोशन करता है’ भारत की एक महिला शिक्षक ने न केवल दूसरों की जिंदगी में उजाला किया है बल्कि झुग्गी मलिन बस्तियों के भविष्य को गढ़कर इस लाइन को सच भी साबित किया. हम बात कर रहे हैं भारतीय टीचर और सामाजिक कार्यकर्ता रुबल नागी की. जिन्हें दुबई में ग्लोबल टीचर के रूप में सम्मानित किया गया है. 

भारतीय शिक्षिका रूबल नागी को दुबई में हुए 'वर्ल्ड गवर्नमेंट समिट' में प्रतिष्ठित 'ग्लोबल टीचर प्राइज 2026' से नवाजा गया है. दुबई के क्राउन प्रिंस शेख हमदान बिन मोहम्मद बिन राशिद अल मकतूम ने उन्हें ये ग्लोबल प्राइज दिया. रूबल ने बस्तियों-झुग्गियों में शिक्षा की ऐसी अलख जगाई कि उन्हें जीवंत लर्निंग स्पेस में बदल दिया. शिक्षा में नई पहल, सामाजिक कल्याण और अनोखे प्रयास के लिए रूबल नागी को ग्लोबल टीचर के अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है. 

दुनियाभर के 5 हजार से ज्यादा शिक्षकों में चुनी गईं 

रूबल नागी को इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए 139 देशों से आए 5,000 से ज्यादा शिक्षकों में से चुना गया है. दुनियाभर में भारत का मान बढ़ाने वालीं रूबल को'ग्लोबल टीचर प्राइज' के साथ 1 मिलियन डॉलर (9 करोड़ रुपये से ज्यादा) की इनामी राशि दी गई है.

कौन हैं रूबल नागी? 

रूबल नागी का जन्म 8 जुलाई 1980 में जम्मू-कश्मीर में हुआ था.  उन्होंने राजनीति विज्ञान में बी.ए. किया. इसके बाद लंदन के स्लेड स्कूल ऑफ फाइन आर्ट (Slade School of Fine Art) से फाइन आर्ट्स में पढ़ाई की और सोथबीज़ लंदन से यूरोपीय कला का अध्ययन किया. वे मूर्तिकला (sculptures), पेंटिंग, आर्ट इंस्टॉलेशन और विशेष रूप से म्यूरल्स (भित्तिचित्र) बनाने के लिए जानी जाती हैं.  उन्होंने 800 से ज्यादा म्यूरल्स बनाए हैं और 150+ प्रदर्शनियां की हैं. 

झुग्गियों में कैसे जलाई शिक्षा की अलख? 

विदेश में मिली कला शिक्षा ने रूबल नागी को सामाजिक बदलाव की दिशा दे दी थी. रूबल नागी ने वंचितों और गरीब वर्ग के बच्चों तक बेहद ही क्रिएटिव और यूनीक तरीके से शिक्षा पहुंचाई. उन्होंने रूबल नागी आर्ट फाउंडेशन (RNAF) की स्थापना की थी. 24 साल पहले उनकी शुरुआत एक छोटे से कमरे से की थी. उनके फाउंडेशन ने दो दशकों से भारत के 100 से ज्यादा गांवों और बस्तियों में 800 से ज्यादा लर्निंग सेंटर बनाए. 

दीवारों से बदल दिया शिक्षा का कॉन्सेप्ट 

रूबल नागी ने न केवल बस्तियों के गरीब बच्चों तक शिक्षा पहुंचाई, साथ ही उनकी सोच और क्रिएटिविटी को नया मोड़ दे दिया. उन्होंने ‘Living Walls of Learning’ कॉन्सेप्ट से बेकार दीवारों को भी स्मार्ट क्लास बना दिया. जहां गणित के फॉर्मूले और विज्ञान के अविष्कारों ने बच्चों को शिक्षा से जोड़ा. उनकी क्लास में केवल किताबी ज्ञान नहीं बल्कि सामाजिक मूल्य और नैतिक शिक्षा भी दी जाती है. रूबल नागी की ओपन लर्निंग क्लास पहल ने समाज को भी शिक्षा से जोड़ा. उनके प्रयास से बच्चों की पढ़ाई में रूचि बढ़ी. रूबल नागी के फाउंडेशन ने 600 से ज्यादा शिक्षकों को भी नए पैटर्न की ट्रेनिंग दी. फिर इन शिक्षकों ने नए मॉडल से लाखों बच्चों को प्रैक्टिकल और क्रिएटिव एजुकेशन से जोड़ा. उनकी इस सराहनीय पहल को देश ही नहीं अब दुनिया ने भी सराहा है. 

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साल 2017 में रूबल नागी को राष्ट्रपति भवन संग्रहालय में कलाकार के रूप में इन्वाइट किया गया था. साल 2022 में रूबल नागी की की किताब 'द स्लम क्वीन' प्रकाशित हुई थी. जिसमें उन्होंने अपने अनुभव और इनोवेटिव शिक्षा के आइडियाज बताए थे. सब्जेक्ट कोई भी हो, उन्होंने दीवारों, कमरों और खुले आसमान के नीचे खेल-खेल में हर विषय को आसान बना दिया. 

ओपन लर्निंग क्लास से बदली बस्ती के बच्चों की तकदीर

कौन देता है ग्लोबल टीचर प्राइज? 

ग्लोबल टीचर प्राइज वर्की फाउंडेशन की ओर से दिया जाता है. इसके संस्थापक सनी वर्की हैं. इस बार इस प्राइज का 10वां संस्करण मुंबई में हुआ. यह सम्मान दुनियाभर के उन शिक्षकों को दिया जाता है. जो समाज में अपने प्रयास से क्रांतिकारी बदलाव की मिसाल कायम की हो. 

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