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4 साल की उम्र में जेल, 17 साल का वनवास… तारिक रहमान के बांग्लादेश की गद्दी तक पहुंचने की कहानी

तारिक रहमान को राजनीति विरासत में मिली जरूर थी, लेकिन उनका सफर कांटों भरा रहा. अब बांग्लादेश चुनावों के नतीजों ने तारिक रहमान की शक्ति को साबित कर दिया.

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Tarique Rahman: 17 साल बाद जब तारिक रहमान ने ढाका की जमीं पर कदम रखा था तब उनके स्वागत में लाखों की तादाद में लोग जमा हो गए थे. ये भीड़ आज जनादेश में बदल गई, बांग्लादेश के आम चुनावों में तारिक रहमान की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) पार्टी ने इतिहास रच दिया और खत्म कर दिया तारिक रहमान का वनवास. जानें कौन हैं तारिक रहमान, जिन्होंने 17 साल निर्वासन में रहने के बाद बांग्लादेश लौटने ही इतिहास बदल दिया. 

बांग्लादेश चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने बड़ी जीत दर्ज की है. देश में करीब 20 साल बाद BNP की सरकार बनने जा रही है. अब देश की कमान उन हाथों में होगी जो यूं तो 17 साल दूर रहे लेकिन पार्टी की कमान थामें रखी. जो सात समंदर पार से भी बांग्लादेश के सियासी मिजाज को घड़ी-घड़ी भांपते रहे. 

तारिक रहमान: पुलिस हिरासत से वनवास तक 

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तारिक रहमान, बांग्लादेश की सियासत का वो चेहरा हैं जिन्हें राजनीति विरासत में मिली लेकिन सफर कांटों भरा रहा. मुकदमें, पुलिस हिरासत और अपने ही देश को छोड़ने पर मजबूर एक नेता. जो कई साल तक विदेश में निर्वासित रहे, लेकिन अब शासन उनके हाथों में होगा. तारिक रहमान ने लंदन से BNP का संचालन किया, दूर से पार्टी का नेतृत्व आलोचकों को रिमोट कंट्रोल लगा होगा, लेकिन असल में दूर बैठकर वह अपनी पार्टी को सींच रहे थे. 

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4 साल की उम्र में जेल 

तारिक रहमान बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं. उनका जन्म 1967 में उस समय हुआ था. उस समय बांग्लादेश को पूर्वी पाकिस्तान कहा जाता था, क्योंकि वह पाकिस्तान का ही हिस्सा था. बांग्लादेश की आजादी के जंग के समय तारिक रहमान महज 4 साल के ही थे. वह सबसे कम उम्र के युद्ध बंदी भी कहलाए. कुछ समय के लिए पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया था. 
तारिक रहमान के पिता जियाउर रहमान सेना में कमांडर थे, लेकिन 1975 में तख्तापलट के बाद उन्होंने सत्ता में अपनी पकड़ तेज कर दी. तारिक रहमान की मां खालिदा जिया तीन बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं. 

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तारिक रहमान जब 15 साल के थे जब उनके पिता जियाउर रहमान की हत्या कर दी गई. मां खालिदा ने बेटे को राजनीति की बारीकियां भी सिखाई. उस समय राजनीति दो बेगमों के बीच (खालिदा जिया और शेख हसीना) के बीच की थी. शेख हसीना के पिता और बांग्लादेश के संस्थापक नेता मुजीबुर रहमान की हत्या के बाद शेख हसीना ने ही पार्टी को संभाला. 
आगे चलकर सत्ता को लेकर शेख हसीना और जिया के बीच लगातार संघर्ष चलता रहा और दोनों ने एक-दूसरे को राजनीतिक रूप से चुनौती दी. तारिक रहमान खुद 23 साल की उम्र में BNP के साथ जुड़े. 

निर्वासन से सत्ता के शिखर तक

साल 2007 में तारिक रहमान को अरेस्ट किया गया. उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे, वह करीब एक साल जेल में रहे. BNP ने आरोप लगाया कि जेल में तारिक रहमान को मानसिक और शारीरिक तौर पर प्रताड़ित किया गया. कहा ये भी जाता है कि उनकी रिहाई भी देश छोड़ने की शर्त पर हुई थी. तारिक रहमान साल 2008 में रिहा हुए और देश छोड़कर लंदन चले गए. इसके बांग्लादेश में जब तक शेख हसीना सरकार का शासन रहा वह वापस नहीं लौटे. लंदन में रहते हुए भी तारिक रहमान को बांग्लादेश में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई.

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यह भी पढ़ें- बांग्लादेश में सत्ता परिवर्तन... भारत के लिए तारिक रहमान की ऐतिहासिक जीत के क्या हैं मायने? जानें 6 अहम फैक्टर

तारिक रहमान लगभग 17 साल के लंबे समय तक लंदन में निर्वासन (exile) में रहे. शेख हसीना की सरकार के दौरान उन पर कई मुकदमे चले, जिसमें 2004 के ढाका ग्रेनेड हमले का आरोप भी शामिल था. हालांकि बाद में उनकी सजा रद्द हो गई. दिसंबर 2025 में वे बांग्लादेश लौटे, मां खालिदा जिया की मौत के बाद उन्हें BNP का चीफ बनाया गया. अब आम चुनाव में BNP ने तारिक के नेतृत्व में प्रचंड जीत हासिल की. 

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तारिक रहमान ने दो सीटों पर चुनाव लड़ा था और दोनों पर जीत दर्ज की. बांग्लादेश में 36 साल बाद ऐसा होगा कि कोई पुरुष प्रधानमंत्री बनेगा. लेकिन तारिक रहमान की आगे की राह अभी भी इतनी आसान नहीं है, क्या वे बांग्लादेश को फिर से कट्टरवाद से निकालकर विकास की राह पर ला पाएंगे? क्या देश के लिए कुछ ताकतवर और ठोस नीतियां बना पाएंगे, क्या वह देश में अल्पसंख्यकों की रक्षा सुनिश्चित कर पाएंगे.? यूनुस शासन के बाद भारत-बांग्लादेश के बीच आई तल्खी को मिटा पाएंगे. फिलहाल चुनाव जीतने के बाद पूरी दुनिया की निगाहें तारिक रहमान के अगले कदम पर हैं. 

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