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VIDEO: “जो करेगा जात की बात, उसको मारूंगा कस के लात” - नितिन गडकरी ने खुले मंच से दिया सख्त संदेश, Video हुआ वायरल

Nitin Gadkari: गडकरी ने अपने अंदाज में समझाया कि जैसे गैस, पेट्रोल और डीजल सभी लोगों को एक ही कीमत पर मिलते हैं, चाहे उनका धर्म या जाति कुछ भी हो, वैसे ही बाकी सुविधाओं और विकास में भी कोई फर्क नहीं होना चाहिए

Image Source: Nitin Gadkari ScreenGrab
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Nitin Gadkari Video: नागपुर में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस के मौके पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया. अपने भाषण में उन्होंने कहा कि आज के समय में कुछ लोग समाज को जाति और धर्म के नाम पर बांटने की कोशिश करते हैं. लेकिन उनके अनुसार  ऐसी राजनीति से देश का कोई फायदा नहीं होता हैं.  उन्होंने साफ़ कहा कि विकास का लाभ सबको बराबर मिलना चाहिए और किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए..उनके मुताबिक, समाज को जोड़ने की जरूरत हैं, तोड़ने की नहीं..

महंगाई और सुविधाओं में बराबरी 

गडकरी ने अपने अंदाज में समझाया कि जैसे गैस, पेट्रोल और डीजल सभी लोगों को एक ही कीमत पर मिलते हैं, चाहे उनका धर्म या जाति कुछ भी हो, वैसे ही बाकी सुविधाओं और विकास में भी कोई फर्क नहीं होना चाहिए. उनका कहना था कि जब रोजमर्रा की चीजों में भेदभाव नहीं है, तो राजनीति में इसे मुद्दा बनाना सही नहीं है.

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नेताओं पर कसा तंज 

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अपने भाषण में उन्होंने कुछ नेताओं पर भी हल्के-फुल्के अंदाज में निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कई लोग मंच पर जाकर जाति और धर्म की बातें करते हैं, नारे लगाते हैं, लेकिन असल में जब निजी तौर पर मिलते हैं तो अपने परिवार के लिए ही फायदा चाहते हैं. उन्होंने ऐसे रवैये को दिखावटी बताया और कहा कि लोग अब ऐसे नेताओं को पहचानने लगे हैं. ऐसे ढोंगी नेताओं को जनता पहचान चुकी है. 'जो करेगा जात की बात, उसको मारूंगा कस के लात.' 

अपने खुले और साफ बोलने के अंदाज पर बात

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गडकरी ने यह भी कहा कि वे हमेशा साफ और सीधी बात करते हैं और अपने विचारों पर अडिग रहते हैं. उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा कि जो भी वह बोलते हैं, उसे खुले तौर पर बोलते हैं और अपनी बातों से पीछे नहीं हटते.

मजदूरों के योगदान की सराहना

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अपने संबोधन के अंत में उन्होंने मजदूरों की मेहनत को देश की प्रगति का सबसे बड़ा आधार बताया. उनका कहना था कि भारत की तरक्की सिर्फ मशीनों या तकनीक से नहीं हुई, बल्कि इसके पीछे लाखों मजदूरों की मेहनत और समर्पण भी है.

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