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ट्रंप का ‘मास्टस्ट्रोक’? मादुरो आउट, लौरा डोगू की एंट्री.., क्या अब वेनेजुएला के तेल पर होगा अमेरिका का राज?

वेनेजुएला में सत्ता परिवर्तन होते ही अमेरिका एक्टिव मोड में दिखाई देने लगा है. ट्रंप सरकार ने अपनी विशेष प्रतिनिधि को वेनेजुएला भेजा है.

वेनेजुएला में जैसे ही सत्ता के समीकरण बदले, वैसे ही अब अमेरिका की सक्रियता सामने आने लगी है. अमेरिका सरकार की विशेष प्रतिनिधि वेनेजुएला पहुंच चुकी है. इसकी जानकारी वेनेजुएला के विदेश मंत्री ईवान गिल ने दी है. उन्होंने बताया कि लौरा डोगू वेनेजुएला पहुंच गई हैं. यह यात्रा दोनों देशों के बीच चल रहे वर्किंग एजेंडा का हिस्सा है.  

टेलीग्राम के माध्यम से साझा की जानकारी

जानकारी के अनुसार, ईवान गिल ने यह जानकारी टेलीग्राम के माध्यम से साझा की. उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच होने वाली बातचीत का मकसद आपसी हित से जुड़े मुद्दों पर आगे की रूपरेखा तय करना है. साथ ही, जो मतभेद पहले से मौजूद हैं, उन्हें कूटनीतिक बातचीत के जरिए सुलझाने की कोशिश की जाएगी.

‘वेनेजुएला से तेल निर्यात फिर से शुरु होगा’

विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि पूरी प्रक्रिया आपसी सम्मान और अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार पर चल रही है. यही सिद्धांत दोनों देशों के रिश्तों की दिशा तय करते हैं. इससे पहले शुक्रवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वेनेजुएला को लेकर अमेरिका की अगुवाई में चल रही कोशिशें सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं. उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका के समर्थन से एक व्यवस्था बनने के बाद वेनेजुएला से तेल का निर्यात फिर से शुरू हो सकता है.

‘जल्द ही कई देश वेनेजुएला से तेल लेना शुरु करेंगे’

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला के मौजूदा हालात में वहां का नेतृत्व अच्छा काम कर रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया में शामिल लोगों के साथ अमेरिका के रिश्ते काफी अच्छे हैं. ट्रंप के मुताबिक, जल्द ही कई देश वेनेजुएला से तेल लेना शुरू करेंगे और इसमें अमेरिका की भूमिका अहम होगी. उन्होंने कहा कि दुनिया के देशों को इसके लिए आमंत्रित किया जा रहा है और वे तेल लेना शुरू करेंगे.

ट्रंप के दावों में कई अनसुलझे सवाल 

अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि अब तक यह योजना बिना किसी बड़ी अड़चन के आगे बढ़ी है और सब कुछ ठीक तरह से चल रहा है. हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने यह साफ नहीं किया कि इस योजना में कौन-कौन से देश शामिल होंगे, तेल का समझौता किस तरह का होगा, तेल कब से निर्यात होगा और उसकी कीमत क्या तय की जाएगी. 

 

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