Advertisement
फ्रांस में हिंसा से निपटने का योगी मॉडल! जिन्होंने किया उपद्रव, तोड़-फोड़, वही करेंगे भरपाई, मैक्रों का सख्त रुख
फ्रांस में हिंसक प्रदर्शनों के बाद राष्ट्रपति मैक्रों ने बेहद सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने कहा, जिन्होंने नुकसान किया है वही इसकी भरपाई भी करेंगे. प्रदर्शन की आड़ में लूटपाट और हिंसा बर्दाश्त नहीं.
Advertisement
फ्रांस के कई शहरों में प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और झड़पों के बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सख्त रुख अख्तियार किया है. उन्होंने उपद्रवियों से निपटने के लिए भारतीय नेता और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का फॉर्मूला अपनाया है. मैक्रों ने कहा, जिन लोगों ने देश की व्यवस्था को कमजोर करने या गिराने की कोशिश की, उन्हें अपने किए का जवाब देना होगा.
मैक्रों ने योगी आदित्यनाथ के अंदाज में कहा जिन लोगों ने देश की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया है, अब वही लोग इस नुकसान की भरपाई करेंगे. यानी फ्रांसीसी सरकार दंगाइयों से ही नुकसान वसूलने की तैयारी में है.
लूटपाट का हर्जाना भरना होगा- मैक्रों
Advertisement
हालांकि राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वालों को उपद्रवियों से अलग बताया. उन्होंने कहा, शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वाले आम नागरिकों को हमें उन लोगों के साथ नहीं मिलाना चाहिए जिन्होंने तोड़फोड़ की, लूटपाट की और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया.
Advertisement
समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, टेलीविजन पर दिए अपने संबोधन में मैक्रों ने कहा, ‘जिन लोगों ने नुकसान पहुंचाया है, उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी. जिन्होंने लूटपाट की है, उन्हें उसका हर्जाना भरना होगा.’
उन्होंने कहा कि हिंसा से प्रभावित पुलिसकर्मियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और दुकानदारों के साथ सरकार खड़ी है. सिन्हुआ के अुनसार, राष्ट्रपति ने सरकार से कहा कि वह शनिवार की घटनाओं से सबक लें और खासतौर पर खुफिया जानकारी जुटाने और पहले से तैयारी करने की व्यवस्था की समीक्षा करें, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों.
Advertisement
प्रदर्शनकारियों की मांग पर फ्रांस सरकार ने क्या फैसला लिया?
फ्रांस में महंगाई के खिलाफ लाखों लोग सड़कों पर उतर आए हैं. स्कूली छात्रों के लिए बेहतर सुविधाओं और सरकारी सेवाओं में सुधार की मांग को लेकर शुरू हुआ ये प्रदर्शन बड़े आंदोलन में बदल गया है. इस पर राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि हाल के हफ्तों में स्कूलों और विश्वविद्यालयों के छात्रों की ओर से जताई गई चिंताओं को वह समझते हैं. उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में सरकार छात्रों, शिक्षकों, ट्रेड यूनियनों, नियोक्ता संगठनों और सरकारी अधिकारियों के साथ बातचीत करेगी, ताकि युवाओं की समस्याओं का समाधान खोजा जा सके.
सिन्हुआ के अुनसार, उन्होंने माना कि इन प्रदर्शनों के पीछे महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों को लेकर लोगों की चिंता भी एक बड़ा कारण है. मैक्रों ने कहा कि सरकार लोगों की क्रय शक्ति (खरीदने की क्षमता) बढ़ाने और आम लोगों पर आर्थिक बोझ कम करने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है.
लाखों लोगों ने खोला मोर्चा
Advertisement
शनिवार को पूरे फ्रांस में करीब 5.5 लाख लोग प्रदर्शनों में शामिल हुए. स्थानीय मीडिया के अनुसार, इन प्रदर्शनों में किसान, जलवायु कार्यकर्ता, ट्रेड यूनियन सदस्य और छात्र शामिल थे. प्रदर्शनकारियों ने ईंधन की कीमतों, बढ़ती महंगाई, शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं से जुड़े मुद्दे उठाए.
हालांकि, कई जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हो गए. फ्रांस के गृह मंत्रालय के मुताबिक, इन घटनाओं के दौरान 2,397 लोगों को गिरफ्तार किया गया. हिंसा में 997 पुलिसकर्मी और सुरक्षा बल के सदस्य घायल हुए, जिनमें से सात की हालत गंभीर बताई गई है.
यह भी पढ़ें- क्यों जल रहे फ्रांस, इटली और पुर्तगाल? सड़कों पर हजारों लोग, आगजनी पथराव और जनाक्रोश, अमेरिका को भी सताई चिंता
Advertisement
यह भी पढ़ें
सिन्हुआ के अुनसार, सितंबर से फ्रांस में छात्रों के कई बड़े प्रदर्शन हो चुके हैं. छात्र बेहतर शिक्षा सुविधाओं और पढ़ाई की परिस्थितियों में सुधार की मांग कर रहे हैं. फ्रांस में महंगाई, ईंधन की कीमतें, शिक्षा और सार्वजनिक सेवाओं को लेकर लोगों की नाराजगी लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है.