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175 एकड़ का 'अपैरल पार्क'...UP में गारमेंट इंडस्ट्री को मिला नया हब, जेवर एयरपोर्ट से कनेक्ट, महिलाओं के लिए बढ़ेंगे रोजगार के अवसर

UP: उत्तर प्रदेश निवेश और उद्योग के लिए अनुकूल प्रदेश के रूप में उभर रहा है. जब यह परियोजना पूरी तरह कार्यान्वित होगी, तो यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी और प्रदेश की औद्योगिक छवि मजबूत होगी.

Image Source: Social Media

UP Apparel Park: उत्तर प्रदेश सरकार यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र को निर्यात केंद्रित औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने के प्रयास तेजी से कर रही है. इसी रणनीति के तहत यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) के सेक्टर-29 में लगभग 175 एकड़ में अपैरल पार्क विकसित किया जा रहा है. यह परियोजना प्रदेश को गारमेंट इंडस्ट्री के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी. अपैरल पार्क से न केवल उद्योग को बढ़ावा मिलेगा बल्कि महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे, जिससे उनके सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को मजबूती मिलेगी. यह पहल उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नीति, भारत सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ मिशन, ‘मेक इन यूपी’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियानों के उद्देश्यों के अनुरूप है.

अपैरल पार्क का उद्देश्य और संरचना

सेक्टर-29 में स्थापित होने वाला अपैरल पार्क विशेष रूप से रेडीमेड गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग की निर्यात इकाइयों को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है. यहाँ लगभग 100 उत्पादन-आधारित इकाइयाँ स्थापित होंगी, जो न केवल घरेलू बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए भी वस्त्र तैयार करेंगी. इस पार्क का विकास क्लस्टर मॉडल पर किया जा रहा है, ताकि उद्योग साझा सुविधाओं का लाभ उठा सकें और उत्पादन लागत को कम किया जा सके.

अपैरल पार्क की लोकेशन को रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है. यह यमुना एक्सप्रेस-वे से सीधे जुड़ा हुआ है और नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के नजदीक स्थित है. एयरपोर्ट के संचालन के बाद गारमेंट उत्पादों के निर्यात में तेजी आएगी. इसके अलावा, दिल्ली-एनसीआर के समीप होने के कारण लॉजिस्टिक्स की लागत घटेगी और निर्यातकों को समय पर डिलीवरी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी, जो वैश्विक प्रतिस्पर्धा में लाभकारी है.

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कॉमन फैसिलिटी सेंटर और साझा संसाधन

अपैरल पार्क में ‘कॉमन फैसिलिटी सेंटर’ की स्थापना की जाएगी. इसमें डिजाइन सेंटर, प्रशिक्षण केंद्र, यूनिट टेस्टिंग लैब और क्वालिटी कंट्रोल जैसी सुविधाएँ शामिल होंगी. इसके साथ ही रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) सेंटर, मार्केटिंग सपोर्ट सिस्टम और अन्य आवश्यक सेवाएं भी निर्यातक इकाइयों को उपलब्ध कराई जाएंगी. सरकार का उद्देश्य यह है कि छोटे और मध्यम उद्यमों को महंगे इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश न करना पड़े और वे साझा संसाधनों का उपयोग करके अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ा सकें. इस व्यवस्था से उत्पादन लागत घटेगी और व्यवसायिक दक्षता में सुधार आएगा.

रोजगार सृजन और स्थानीय विकास

अपैरल पार्क केवल औद्योगिक विकास तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह रोजगार सृजन में भी अहम योगदान देगा. सिलाई, डिजाइन पैटर्न मेकिंग, पैकेजिंग, क्वालिटी कंट्रोल और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे. इस परियोजना के माध्यम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार की संख्या में वृद्धि होगी, जो प्रदेश की आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.

योगी सरकार का दृष्टिकोण केवल कच्चे माल आधारित उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि वैल्यू एडेड मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देना है. अपैरल पार्क के जरिए प्रदेश में टेक्सटाइल इंडस्ट्री की पूरी वैल्यू चेन विकसित की जाएगी, जिससे किसानों, हथकरघा कारीगरों और छोटे उद्यमियों को भी लाभ मिलेगा. इस प्रकार उत्तर प्रदेश निवेश और उद्योग के लिए अनुकूल प्रदेश के रूप में उभर रहा है. जब यह परियोजना पूरी तरह कार्यान्वित होगी, तो यमुना एक्सप्रेस-वे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को नई दिशा मिलेगी और प्रदेश की औद्योगिक छवि मजबूत होगी.

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