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'एक आतंकी देश मुझसे ये सवाल पूछ रहा है...', पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल पर विदेश मंत्री जयशंकर का करारा जवाब, VIDEO वायरल

न्यूयॉर्क में प्रेस बातचीत के दौरान पाकिस्तानी पत्रकार ने भारत पर आतंकवाद को समर्थन देने का आरोप लगाते हुए एस. जयशंकर से सवाल किया, जिसके बाद विदेश मंत्री के जवाब ने माहौल गरमा दिया.

Image Source: Screengrab
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एक तरफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ हैं, जो भारतीय पत्रकार के सवालों से बचते हुए नजरें झुकाकर निकलते दिखाई देते हैं, तो दूसरी तरफ भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर हैं, जो अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को उसी की भाषा में जवाब देने से पीछे नहीं हटते. पाकिस्तान की आतंकवाद-परस्त नीति हो या दुनिया को गुमराह करने की कोशिश, जयशंकर हर बार तथ्यों के साथ उसकी पोल खोलते नजर आते हैं. अब संयुक्त राष्ट्र के एक कार्यक्रम में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जब एक पाकिस्तानी पत्रकार ने सवाल के नाम पर बड़बोलेपन की कोशिश की, लेकिन एस. जयशंकर के जवाब ने उसकी बोलती बंद कर दी. जयशंकर ने ऐसा पलटवार किया कि यह जवाब पाकिस्तान के लिए लंबे समय तक याद रखने वाला बन गया.

दरअसल, विदेश मंत्री एस जयशंकर इन दिनों 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) सत्र में शामिल होने के लिए न्यूयॉर्क में हैं. इस दौरान एक प्रेस इंटरैक्शन के दौरान एस. जयशंकर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे. इसी बीच पाकिस्तान के एक पत्रकार ने बीच में दखल देते हुए आतंकवाद से जुड़ा सवाल उठाया. उसका लहजा भी सामान्य सवाल-जवाब से अलग नजर आया. पत्रकार ने भारत पर ही पाकिस्तान में आतंकवाद को बढ़ावा देने और प्रॉक्सी टेररिज्म को कथित तौर पर समर्थन देने का आरोप लगाते हुए जयशंकर से पूछा कि भारत सरकार आखिर पाकिस्तान में ऐसी गतिविधियों को कब बंद करेगी. प्रेस बातचीत के बीच अचानक आए इस सवाल ने माहौल को कुछ देर के लिए गरमा दिया.
 
जयशंकर ने पाकिस्तानी पत्रकार को दिया तगड़ा जवाब 

पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल पर एस. जयशंकर ने बिना किसी हड़बड़ी के उसकी बात सुनी और फिर बेहद स्पष्ट अंदाज में जवाब दिया. विदेश मंत्री ने कहा, 'एक आतंकी देश मुझसे ये सवाल पूछ रहा है.' इतना कहने के बाद जयशंकर मुस्कुराए और वहां से चले गए. इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. इससे पहले जयशंकर न्यूयॉर्क में नाविकों की सुरक्षा से जुड़े एक सम्मेलन में भी शामिल हुए थे. इस दौरान भारत ने समुद्र में नाविकों को निशाना बनाकर होने वाले हमलों को हर हाल में रोकने की जरूरत पर जोर दिया.

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समुद्र में नाविकों की सुरक्षा पर भारत का जोर

एस. जयशंकर ने समुद्र में नाविकों और समुद्री कर्मचारियों पर होने वाले हमलों को लेकर भारत का रुख स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की हिंसा और उससे होने वाले जान-माल के नुकसान को जायज नहीं ठहराया जा सकता. भारत का सीधा मत है कि समुद्री कर्मचारियों को निशाना बनाने वाली ऐसी घटनाएं तत्काल बंद होनी चाहिए. दुनिया में बड़ी संख्या में सीफेयरर्स उपलब्ध कराने वाले प्रमुख देशों में शामिल भारत ने इस मुद्दे पर लाइबेरिया के साथ मिलकर पहल की है. लाइबेरिया के पास टनेज के आधार पर दुनिया की सबसे बड़ी शिपिंग रजिस्ट्रियों में से एक है.

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ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स की बैठक में कितने देशों ने लिया हिस्सा?

विदेश मंत्री के मुताबिक, इस पहल को व्यापक बनाने के लिए समान हित रखने वाले कई देशों और प्रमुख जहाज मालिकों को भी साथ लाया गया है. उन्होंने बताया कि 'ग्रुप ऑफ फ्रेंड्स' की पहली बैठक में 25 देशों ने हिस्सा लिया. इस प्रयास का उद्देश्य समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा के साथ-साथ कमर्शियल शिपिंग इंडस्ट्री के सामने मौजूद चुनौतियों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक ध्यान केंद्रित करना है. दुनिया का मर्चेंट फ्लीट करीब 20 लाख समुद्री कर्मचारियों के सहयोग से संचालित होता है, जो अक्सर कठिन और जोखिम भरी परिस्थितियों में अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ब्रिक्स बैठक के दौरान नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा उठा चुके हैं.

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बताते चलें कि न्यूयॉर्क में एस. जयशंकर के बयान और समुद्री सुरक्षा को लेकर भारत की पहल दोनों ही चर्चा में हैं. एक तरफ पाकिस्तान के सवाल पर जयशंकर का जवाब सुर्खियां बटोर रहा है, तो दूसरी तरफ नाविकों की सुरक्षा को लेकर भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी आवाज बुलंद कर रहा है.

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