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'रोना बंद करो एलन!', भारतीयों ने मस्क को जमकर लताड़ा, बोले- 'सस्ता नेट है, Starlink की जरूरत क्या?'

Elon Musk: भारत में Starlink की सेवा शुरू करने की मंजूरी और नियमों को लेकर उनके पोस्ट के बाद कई भारतीय यूजर्स ने उनसे सवाल पूछने शुरू कर दिए हैं. लोगों का कहना है कि अगर मस्क को भारत में नियमों और मंजूरी की प्रक्रिया से परेशानी है, तो उन्हें चीन के मामले में भी इसी तरह खुलकर अपनी बात रखनी चाहिए..

Image Source: IANS
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Starlink: दुनिया के सबसेअमीर लोगों में शामिल एलन मस्क इन दिनों भारत में अपनी सैटेलाइट इंटरनेट सेवा Starlink को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं. भारत में सेवा शुरू करने की मंजूरी और नियमों को लेकर उनके पोस्ट के बाद कई भारतीय यूजर्स ने उनसे सवाल पूछने शुरू कर दिए हैं. लोगों का कहना है कि अगर मस्क को भारत में नियमों और मंजूरी की प्रक्रिया से परेशानी है, तोउन्हें चीन के मामले में भी इसी तरह खुलकर अपनी बात रखनी चाहिए.. यूजर्स ने सवाल उठाया कि चीन में Starlink की सेवा उपलब्ध नहीं है, लेकिन मस्क वहां के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से इस मुद्दे पर सवाल क्यों नहीं पूछते?

इस बहस में कई लोगों ने मस्क पर कारोबरी फायदे के हिसाब से अलग-अलग देशों के लिए अलग रवैया अपनाने का आरोप लगाया. कुछ यूजर्स ने तो उन्हें सलाह दे दी कि भारत पर सवाल उठाने के बजाय पहले चीन में अपनी सेवा शुरू कराने की कोशिश करें.. हालांकि, सोशल मीडिया पर सामने आ रही ये प्रतिक्रियाएं यूजर्स की राय हैं और इन्हें मस्क के इरादों का प्रमाण नहीं माना जा सकता.

राजीव मल्होत्रा ने भी चीन को लेकर उठाया सवाल

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भारतीय मूल के लेखक और शोधकर्ता राजीव मल्होत्रा ने भी इस मुद्दे पर एलन मस्क से सवाल किया. उन्होंने पूछा कि चीन में Starlink को अब तक अनुमति क्यों नहीं मिली है और क्या वहां भी कोई ताकतवर कारोबारी इस सेवा के रास्ते में रुकावट बना हुआ है. मल्होत्रा ने चीन में मस्क के कारोबारी हितों का जिक्र करते हुए जानना चाहा कि वहां सेवा शुरू करने का रास्ता क्यों नहीं खुल पाया.

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'रोना बंद करो एलन', सोशल मीडिया पर यूजर्स ने सुनाई खरी-खरी

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X पर कई यूजर्स ने मस्क के रुख पर नाराजगी जताई. एक यूजर ने तंज कसते हुए लिखा, 'रोना बंद करो एलन, अब यह शर्मिंदगी भरा होता जा रहा है.' यूजर का कहना था कि भारत में पहले से सस्ते इंटरनेट प्लान मौजूद हैं, इसलिए Starlink को लेकर इतनी बहस क्यों हो रही है.

कुछ लोगों ने यह भी कहा कि किसी कंपनी को अपने प्रोडक्ट खरीदने के लिए ग्राहकों पर दबाव बनाने का अधिकार नहीं है. वहीं, Starlink के समर्थकों का मानना है कि सैटेलाइट इंटरनेट दूरदराज और ऐसे इलाकों में उपयोगी हो सकता है, जहां सामान्य इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाना मुश्किल है. यानी बहस का एक पक्ष बेहतर कनेक्टिविटी की जरूरत पर जोर दे रहा है, जबकि दूसरा पक्ष इसकी कीमत, जरूरत और कारोबारी रवैये पर सवाल उठा रहा है.

'हिम्मत है तो जिनपिंग से सवाल पूछो'

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कुछ भारतीय यूजर्स ने मस्क को सीधे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का नाम लेकर चुनौती दी. उनका तर्क था कि अलग-अलग देश अपनी सुरक्षा और कारोबारी नीतियों के हिसाब से विदेशी कंपनियों पर प्रतिबंध या शर्तें लगा सकते हैं.  ऐसे में भारत की मंजूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाने वालों को दूसरे देशों की नीतियों पर भी बात करनी चाहिए.

इस विवाद के बीच राहुल गांधी के बयान को लेकर भी सोशल मीडिया पर राजनीतिक तंज और मीम शेयर किए गए. हालांकि, इन प्रतिक्रियाओं से अलग Starlink की भारत में सेवा शुरू होने का मुद्दा सरकारी नियमों और जरूरी मंजूरियों से जुड़ा हुआ है.

भारत में Starlink को क्या मंजूरी मिली है?

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भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा शुरू करने के लिए Starlink के अलावा Jio Satellite Internet और Eutelsat OneWeb को भी लाइसेंस दिए जाने की जानकारी सामने आई है.लेकिन लाइसेंस मिलने का मतलब यह नहीं है कि कंपनियां तुरंत सेवा शुरू कर सकती है. इसके लिए सुरक्षा से जुड़ी शर्तों और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं को पूरा करना होता है.

फिलहाल, इस पूरे मामले ने एक नई बहस छेड़ दी है. सवाल सिर्फ Starlink की मंजूरी का नहीं, बल्कि भारत में विदेशी कंपनियों के कारोबार, सरकारी नियमों और सैटेलाइट इंटरनेट की वास्तविक जरूरत का भी है. अब देखना होगा कि भारत में Starlink की सेवा शुरू करने की प्रक्रिया आगे किस तरह बढ़ती है.

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