Advertisement
'भारत संभल जाए...', अल्बानिया की सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शनकारियों ने लगाई आग, संजय राउत ने दी सीखने की नसीहत, मचा बवाल
अल्बानिया में PM के इस्तीफे की मांग को लेकर छात्रों का प्रदर्शन हिंसक होता जा रहा है. इसी बीच प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट को आग के हवाले कर दिया. इसका वीडियो शेयर करते हुए संजय राउत ने भारत को भी सीख लेने की नसीहत दी, जिस पर खूब बवाल मचा है.
Advertisement
अल्बानिया में पिछले तीन दिनों से छात्र सड़क पर सरकार विरोधी प्रदर्शन कर रहे हैं. राजधानी तिराना में लगातार तीसरे दिन प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़पें हुईं, जिसमें सैकड़ों पुलिसकर्मी घायल हो गए. प्रदर्शनकारी प्रधानमंत्री के इस्तीफे और छात्रों के लिए अधिक सुविधाओं की मांग कर रहे हैं. इसी बीच प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट में आग लगा दी, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. प्रदर्शनकारी छात्रों का आरोप है कि कोर्ट और सरकार मिली हुई है, जज कथित करप्ट प्रधानमंत्री को बचा रहे हैं और दोनों की सांठगांठ है.
अल्बानिया में प्रदर्शनकारियों ने लगाई सुप्रीम कोर्ट में आग!
इसी बीच अल्बानिया में लगी आग की चिंगारी भारत तक पहुंच गई है. इसकी लपटें भारतीय सियासत को भी अपनी चपेट में लेना शुरू कर चुकी हैं. कुछ दल ऐसे हैं जो अल्बानिया की सुप्रीम कोर्ट में लगी आग के बहाने भारत की अदालतों पर तंज कस रहे हैं, अपना सियासी हित साधने के लिए टिप्पणियां कर रहे हैं. इसी कड़ी में शिवसेना UBT के नेता संजय राउत ने कुछ ऐसा कह दिया है जिस पर बवाल मच गया है.
Advertisement
संजय राउत ने भारत को सीख लेने की दी नसीहत!
Advertisement
संजय राउत ने अल्बानिया की सुप्रीम कोर्ट में लगी आग से संबंधित एक पोस्ट को कोट करते हुए लिखा कि, "अल्बानिया के लोगों ने सुप्रीम कोर्ट को जला दिया है. लोग इसलिए गुस्से में थे क्योंकि सुप्रीम कोर्ट भ्रष्ट प्रधानमंत्रियों की मदद कर रहा था. प्रदर्शन कर रही जनता ने संसद, सरकारी दफ्तरों और मंत्रियों के घरों पर भी हमला किया है. सभी देशों को इन घटनाओं से सबक लेना चाहिए. खासकर 🇮🇳 को."
अल्बानियात लोकांनी सर्वोच्च न्यायालय जाळून टाकले. सर्वोच्च न्यायालय भ्रष्ट पंतप्रधानांना मदत करत असल्याने लोक भडकले होते. आंदोलक जनतेने संसद आणि सरकारी कार्यालयांवर,मंत्र्यांच्या घरांवर देखील हल्ले केले आहेत. सर्व देशांनी या घटनांपासून धडा घेतला पाहिजे. विशेषतः 🇮🇳 https://t.co/3JSMJCMjXA
— Sanjay Raut (@rautsanjay61) ?ref_src=twsrc%5Etfw">October 19, 2026Advertisement
Loading Ad...
'भारत में भी अराजकता फैलना तय'
इसके बाद उन्होंने अपने एक बयान में कहा कि "अगर यह सरकार सत्ता में बनी रहती है, तो अराजकता फैलना तय है; मैं बस यही कह रहा हूँ. सुप्रीम कोर्ट को इस पर ध्यान देना चाहिए...हमें सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा है, और केवल सुप्रीम कोर्ट ही देश को बचा सकता है...अगर हम अपने ही देश में तिरंगा नहीं फहरा सकते, तो फिर हम क्या कर सकते हैं?...इससे अराजकता फैलेगी...सुप्रीम कोर्ट को इस मामले को देखना चाहिए...".
#WATCH | Mumbai, Maharashtra | Shiv Sena (UBT) MP Sanjay Raut says, "If this government remains in power, chaos will inevitably spread; that is what I am saying. The Supreme Court should take note... We have faith in the Supreme Court, and it is the Supreme Court alone that can save the nation... If we cannot hoist the Tricolour in our own country, then what can we do?... This will lead to chaos... The Supreme Court must look into this..."
— ANI (@ANI) ?ref_src=twsrc%5Etfw">October 20, 2026Advertisement
Loading Ad...
"अराजकता भारत की जनता बर्दाश्त नहीं करेगी"
संजय राउत के इस बयान के बाद बीजेपी ने तगड़ा पलटवार किया है. महाराष्ट्र बीजेपी के नेता और पूर्व सांसद किरीट सोमैया ने राउत पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि, "संजय राउत अल्बानिया में सुप्रीम कोर्ट को जलाए जाने का स्वागत और समर्थन करते हैं. वे अराजकता चाहते हैं. पहले उन्होंने राष्ट्रपति, फिर चुनाव आयोग और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का अपमान किया और उन्हें अपशब्द कहे. अब वे चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट को जला दिया जाए. भारत की जनता अराजकता बर्दाश्त नहीं करेगी. सुप्रीम कोर्ट में संजय राउत के खिलाफ अवमानना याचिका चल रही है, और उन्हें वहीं इसका जवाब मिलेगा."
संजय राउत अल्बानिया में सुप्रीम कोर्ट जला दिया उसका स्वागत करते हैं, समर्थन करते हैं उन्हें अराजकता चाहिए पहले राष्ट्रपति जी, फिर चुनाव आयोग, फिर सर्वोच्च न्यायालय के चीफ जस्टिस, इन सबका अपमान किया, गालियां दि अब वो चाहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट जला दिया जाए? हिंदुस्तान की जनता अराजकता सहन नहीं करेगी,संजय राउत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमान याचिका चल रही है, वहां उसको जवाब मिलेगा।
— Kirit Somaiya (@KiritSomaiya) ?ref_src=twsrc%5Etfw">October 20, 2026Advertisement
Loading Ad...
भारत को किसी से सीखने की जरूरत नहीं: प्रियंका चतुर्वेदी
वहीं संजय राउत को अपनी ही पार्टी से पलटवार का सामना करना पड़ा. शिवसेना UBT की नेत्री और पूर्व सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने राउत के बयान से पार्टी को अलग करने की कोशिश की और लिखा कि भारत को किसी से सीखने की जरूरत नहीं है. चतुर्वेदी ने कहा, "भारत को किसी दूसरे देश से सीखने की जरूरत नहीं है. अल्बानिया एक छोटा देश है, जिसने कम्युनिस्ट तानाशाही के तहत कई साल बिताए. लोगों का कानून अपने हाथ में लेना, व्यवस्था को बाधित करना और सुप्रीम कोर्ट या संसद जैसी संस्थाओं को अस्थिर करना पूरी तरह अस्वीकार्य है.
'बांग्लादेश से प्रेरणा लेने की वकालत अफसोसजनक'
Advertisement
जो लोग भारत में सत्ता परिवर्तन के लिए बांग्लादेश के विरोध प्रदर्शनों से प्रेरणा लेने की बात करते हैं, वह बेहद अफसोसजनक है. उन प्रदर्शनों का नेतृत्व सिर्फ छात्रों ने नहीं किया था, बल्कि बाद में एक इस्लामवादी आंदोलन ने उन्हें अपने कब्जे में ले लिया. इसके बाद हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों पर हमले हुए. किसी भी लोकतंत्र में हिंसक तरीके से सत्ता परिवर्तन की जगह नहीं है. हमें अल्बानिया, पेरिस या ऐसी दूसरी घटनाओं से सीख लेने की जरूरत नहीं है."
अल्बानिया स्टेट पुलिस के हवाले से मीडिया आउटलेट अल्बानिया डेली न्यूज ने बताया कि पुलिसकर्मियों, सार्वजनिक संस्थानों, और सार्वजनिक व निजी संपत्ति पर कथित हमलों के सिलसिले में दर्जनों प्रदर्शनकारियों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है. पुलिस महानिदेशक स्केंडर हिता ने ट्रॉमा अस्पताल जाकर घायल अधिकारियों का हाल जाना. पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन में शामिल नकाबपोश लोगों ने अधिकारियों पर पत्थर, भारी चीजें और मोलोटोव कॉकटेल (पेट्रोल बम) फेंके. हालांकि पुलिस की कार्रवाई का प्रदर्शनकारियों पर कोई असर नहीं पड़ रहा है. हिंसा और तोड़फोड़ की आग और उग्र होती जा रही है. सरकारी कार्यालयों, बिल्डिंग्स के बाद अब सुप्रीम कोर्ट भी हिंसा की चपेट में आ गया है.
वहीं, पुलिस ने तिराना की कई प्रमुख सड़कों पर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया. राजधानी के अलावा देश के अन्य शहरों में भी विरोध प्रदर्शन फैल गए हैं. प्रदर्शनकारी विश्वविद्यालयों की बदहाली और अधिक फीस का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री इदी रामा के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं.
Advertisement
समाचार एजेंसी रॉयटर्स को लिखित जवाब में रामा ने कहा कि उनकी सरकार को पिछले साल हुए लोकतांत्रिक चुनावों में जनादेश मिला था और सरकार का बदलाव चुनावों के जरिए ही होना चाहिए. उन्होंने कहा, “मेरे इस्तीफे की मांग के संबंध में कहना चाहूंगा कि सरकारें लोकतांत्रिक चुनावों के माध्यम से बदली जाती हैं. पिछले साल चुनाव हुए थे, क्रांति नहीं.”
रामा ने कहा कि उनकी जिम्मेदारी लोगों की चिंताओं को सुनना, जायज मांगों पर ध्यान देना और अल्बानिया को आगे बढ़ाना है. उन्होंने कहा कि इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता अपनाना उन अल्बानियाई नागरिकों के जनादेश के साथ विश्वासघात होगा, जिन्होंने उन्हें यूरोपीय संघ (ईयू) की सदस्यता के लिए बातचीत पूरी करने की जिम्मेदारी सौंपी है.
My message in this post was for those who claim they are inspired by Bangladesh Protests, but for those trolling, if the shoe fits, wear it, Cinderella ;-)
— Priyanka Chaturvedi🇮🇳 (@priyankac19) ?ref_src=twsrc%5Etfw">October 19, 2026Advertisement
Loading Ad...
अल्बानिया में पिछले साल ही हुए थे चुनाव!
प्रधानमंत्री ने शिक्षा की बढ़ती लागत पर बातचीत करने की इच्छा जताई, लेकिन सार्वजनिक संस्थानों पर हमले, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और लोगों की सुरक्षा को खतरे में डालने की घटनाओं की आलोचना की. उन्होंने कहा कि ऐसी गतिविधियों का छात्रों की जायज मांगों से कोई संबंध नहीं है.
PM इदी रमा के लिए अब तक की सबसे बड़ी चुनौती
Advertisement
तिराना में मंगलवार और बुधवार को पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच कई घंटे तक हिंसक झड़पें हुईं. इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने कई सरकारी इमारतों में जबरन प्रवेश किया और कम से कम एक इमारत में आग लगा दी. पिछले साल चौथी बार प्रधानमंत्री बने रामा के सामने इन प्रदर्शनों को अब तक की सबसे बड़ी चुनौती के रूप में देखा जा रहा है.
मौजूदा अशांति से पहले भी देश में कई महीनों तक विरोध प्रदर्शन होते रहे हैं. इनका प्रमुख कारण अल्बानिया के दक्षिणी तट पर एक लग्जरी रिसॉर्ट बनाने की योजना रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर के समर्थन वाली इस परियोजना को लेकर कानूनी चुनौतियां भी सामने आई हैं.
EU में शामिल होना चाह रहा अल्बानिया!
Advertisement
रामा ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कहा कि इससे निपटना आवश्यक है और यूरोपीय संघ ने भी हाल में इस दिशा में अल्बानिया के प्रयासों को स्वीकार किया है.
उन्होंने कहा कि संभव है कि देश और विदेश में कुछ ताकतें अल्बानिया को यूरोपीय संघ की सदस्यता की दिशा में आगे बढ़ते नहीं देखना चाहती हों, लेकिन वह हिंसा को देश के यूरोपीय भविष्य के रास्ते में बाधा नहीं बनने देंगे.
ये भी पढ़ें: यूसुफ पठान की जिस जमीन पर 15 साल से चल रहा था विवाद, सरकार के फैसले से अब रास्ता साफ, मिल गई मंजूरी
Advertisement
इस बीच, तिराना स्थित यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल ने तनाव कम करने की अपील दोहराई. उसने प्रदर्शन के दौरान हिंसा बढ़ने और सार्वजनिक तथा निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाए जाने की कड़ी निंदा की. प्रतिनिधिमंडल ने अपने बयान में प्रदर्शनकारियों से संयम बरतने और हिंसा से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि लोकतंत्र में हिंसा की कोई जगह नहीं है.
यह भी पढ़ें
अल्बानिया और मोंटेनेग्रो बाल्कन क्षेत्र के उन देशों में शामिल हैं, जो यूरोपीय संघ में शामिल होने की प्रक्रिया में आगे बढ़ रहे हैं. अल्बानिया का लक्ष्य 2028 तक ईयू की सदस्यता हासिल करना है.