जिस पर देशकरता है भरोसा
Advertisement

यूसुफ पठान की जिस जमीन पर 15 साल से चल रहा था विवाद, सरकार के फैसले से अब रास्ता साफ, मिल गई मंजूरी

इस विवादित प्लॉट के पास ही पठान परिवार का घर है. गुजरात सरकार ने उन्हें 978 वर्ग मीटर के प्लॉट की मंजूरी दे दी है. जबकि वडोदरा महानगरपालिका (वीएमसी) को मुआवजे के रूप में दूसरी जमीन आवंटित की जाएगी.

Author
20 Oct 2026
( Updated: 20 Oct 2026
12:15 PM )
यूसुफ पठान की जिस जमीन पर 15 साल से चल रहा था विवाद, सरकार के फैसले से अब रास्ता साफ, मिल गई मंजूरी
Image Source- IANS
Advertisement

पूर्व क्रिकेटर और लोकसभा सांसद यूसुफ पठान को गुजरात सरकार से बड़ी राहत मिली है. जिस प्लॉट को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था, उसे सरकार ने यूसुफ को अवांटित करने की मंजूरी दे दी है. 

राज्य सरकार ने तांदलजा क्षेत्र में स्थित 978 वर्ग मीटर के प्लॉट, जिसकी कीमत 20.53 करोड़ रुपये है, उसको यूसुफ को अवांटित करने की हरी झंडी दी है. कुल 978 वर्ग मीटर जमीन में से 500 वर्ग मीटर जमीन यूसुफ पठान को आवासीय उद्देश्य से निःशुल्क उपहार के रूप में दी जाएगी. बाकी की 478 वर्ग मीटर जमीन निर्धारित मूल्य पर 45 प्रतिशत की छूट के साथ हस्तांतरित की जाएगी. राज्य सरकार ने स्पष्ट किया कि यह निर्णय केवल विशेष मामले के रूप में लिया गया है और इसे भविष्य के लिए मिसाल नहीं माना जाएगा. 

साल 2012 से चल रहा था विवाद

Advertisement

राजस्व विभाग इस जमीन के मूल्य के बराबर दूसरी जमीन वडोदरा महानगरपालिका (वीएमसी) को मुआवजे के रूप में आवंटित करेगा. प्लॉट आवंटन को लेकर वडोदरा महानगरपालिका की स्थायी समिति और सामान्य सभा की मंजूरी के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा. इस विवादित प्लॉट के पास ही पठान परिवार का घर स्थित है. गौरतलब है कि यूसुफ हाल ही में तृणमूल कांग्रेस पार्टी को छोड़कर नेशनलिस्ट सिटजिन्स पार्टी ऑफ इंडिया में शामिल हुए हैं. 

दरअसल, साल 2012 में यूसुफ पठान ने वडोदरा नगर निगम (वीएमसी) से बिना नीलामी के एक प्लॉट 99 साल की लीज पर देने की मांग की थी. अपने आवेदन में उन्होंने पूर्व क्रिकेटर होने और सुरक्षा कारणों का हवाला दिया था. वीएमसी ने इस प्रस्ताव पर सहमति भी जता दी थी और उस समय प्लॉट की कीमत करीब 5.6 करोड़ रुपये आंकी गई थी, जिसे चुकाने के लिए पठान तैयार थे. हालांकि, बिना नीलामी के जमीन आवंटित करने के लिए राज्य सरकार की मंजूरी जरूरी थी, बाद में 2014 में गुजरात के शहरी विकास विभाग ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देने से इनकार कर दिया था. इसके बावजूद नगर निगम का आरोप था कि प्रस्ताव रद्द होने के बाद भी पठान ने जमीन के चारों ओर घेराबंदी कर ली थी. 

यूसुफ पठान को 2024 में जारी हुआ था नोटिस

इसके बाद 2024 में नगर निगम ने कथित अतिक्रमण हटाने के लिए पठान को नोटिस जारी किया. इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए उन्होंने गुजरात हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया. हालांकि, अगस्त 2025 में हाईकोर्ट ने सरकार के उस फैसले को सही ठहराया, जिसमें जमीन का आवंटन खारिज किया गया था. वहीं, जून 2026 में सुनवाई के दौरान अदालत ने भी यह सवाल उठाया कि जब न तो जमीन का आवंटन हुआ और न ही उसके लिए कोई भुगतान या आवश्यक औपचारिकताएं पूरी की गईं, तो किसी व्यक्ति का उस जमीन पर अधिकार कैसे माना जा सकता है. इसके बाद 31 अगस्त 2026 को यूसुफ ने हाई कोर्ट से बिना शर्त अपनी याचिका वापस ले ली थी. 

यह भी पढे़ं- ‘न ऐसा पहले हुआ है, न आगे होगा’, ‘रिजीम चेंज’ का नारा लगाने वालों को RSS प्रमुख भागवत का करारा जवाब

Advertisement

यह भी पढ़ें

15 साल से चल रहे विवाद की कहानी तो खत्म हो गई, लेकिन यूसुफ पठान को लेकर नई चर्चा भी शुरू हो गई. क्योंकि जमीन मामले में पूर्व क्रिकेटर को राहत तब मिली है जब वह TMC छोड़ NCPI में शामिल हो गए. क्योंकि इस मामले में पहले कोर्ट में कई सुनवाई हुई, याचिकाएं दायर की गईं, लेकिन आखिरकार मामले का निपटारा सरकार की मंजूरी के बाद ही खत्म हुआ. ऐसे में केस की टाइमिंग की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है. यूसुफ पठान बंगाल के बहरामपुर से सांसद हैं. उन्होंने TMC के सिंबल पर चुनाव लड़ा था, बाद में जब TMC बंगाल चुनाव हार गई तो बागी विधायकों और सांसदों के साथ NCPI में चले गए. 

Tags

Advertisement
टिप्पणियाँ 0
G
Guest (अतिथि)
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
Advertisement
शॉर्ट्स
वेब स्टोरीज़
होम वीडियो खोजें