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‘अब ‘हाई पावर डेमोग्राफी मिशन' होगा शुरु…’ आदिवासियों और घुसपैठियों के लिए पीएम मोदी का न्या प्लान, जानिए डिटेल
Independence Day 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ये घुसपैठिए मेरे देश के नौजवानों की रोजी रोटी छीन रहे हैं, ये घुसपैठिए मेरे देश की बहन बेटियों को निशाना बना रहे हैं ये बर्दाश्त नहीं होगा. उन्होंने इससे निपटने के लिए हाई पावर डेमोग्राफी मिशन की शुरूआत करने की बात कही. क्या है ये, जानिए
स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई मुद्दों पर अपनी बातों को रखा. इसी बीच देश की डेमोग्राफी बदलने में जुटे घुसपैठिओं को भी पीएम मोदी ने आड़े हाथ लिया और देश का ध्यान इनपर दिलाया. पीएम मोदी ने इसे रोकने के लिए एक कार्यक्रम लॉन्च करने की भी घोषणा की. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भगवान बिरसा मुंडा को भी याद किया.
'हाई पावर डेमोग्राफी मिशन' देश में होगा लॉन्च
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा- 'मैं आज एक चिंता और चुनौती के संबंध में आगाह करना चाहता हूं. सोची समझी साजिश के तहत देश की डेमोग्रॉफी को बदला जा रहा है, एक नए संकट के बीज बोए जा रहे हैं ये घुसपैठिए मेरे देश के नौजवानों की रोजी रोटी छीन रहे हैं, ये घुसपैठिए मेरे देश की बहन बेटियों को निशाना बना रहे हैं ये बर्दाश्त नहीं होगा.'
उन्होंने कहा कि ये घुसपैठिये भोले-भाले आदिसवासियों को भ्रमित करके उनकी जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं. ये देश सहन नहीं करेगा. इसलिए जब डेमोग्रॉफी परिवर्तन होता है सीमा के क्षेत्र में ये होता है तो राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए संकट पैदा होता है. सामाजिक तनाव के बीच बो देता है, कोई देश अपना देश घुसपैठियों के हवाले नहीं कर सकता है, तो हम भारत को कैसे कर सकते हैं. हमारे पूर्वजों ने त्याग और बलिदान से आजादी पाई है. उन महापुरुषों के लिए सच्ची श्रद्धा ये है कि हम घुसपैठियों को स्वीकार नहीं करें. यही उनको सच्ची श्रद्दांजलि होगी, इसलिए मैं आज लाल किले की प्राचीर से कहना चाहता हूं कि हमने एक 'हाई पावर डेमोग्राफी मिशन' शुरू करने का निर्णय किया है, इस मिशन के जरिए जो भीषण संकट नजर आ रहा है, उसको निपटाने के लिए तय समय में अपने कार्य को करेगा.
नक्सलवाद पर पीएम मोदी का तगड़ा प्रहार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले से कहा कि कभी 125 जिलों में नक्सलवाद अपनी जड़े जमा चुका था. माओवाद की चंगुल में हमारे जनजातीय क्षेत्र हमारे जनजातीय नौजवान फंसे हुए थे. आज 125 जिलों में कम होते होते हम 20 पर ले आए हैं. उन जनजातीय समाज की सबसे बड़ी हमने सेवा की है. एक जमाना था जब बस्तर को याद करते ही माओवाद, नक्सलवाद, बम बंदूक की आवाज सुनाई देती थी. उसी बस्तर में माओवाद नक्सल से मुक्त होने के बाद बस्तर के नौजवान ओलंपिक करते हैं.
उन्होंने कहा कि हजारो नौजवाना भारत माता की जय बोलकर खेल के मैदान में उतरते हैं, जो क्षेत्र कभी रेड कॉरडोर के रूप में जाने जाते थे. वो आज विकास की ग्रीन कॉरिडोर बन रहे हैं, भारत के जिन क्षेत्र को लाल रंग से रंग दिया था हमने वहां संविधान, कानून और विकास का तिरंगा फहरा दिया है.
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