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चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी की हाईकोर्ट एंट्री, पूर्व जस्टिस काटजू ने जताई नाराजगी!

Mamata Banerjee: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने पब्लिसिटी पाने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया.

Image Source: IANS/Kuntal Chakrabarty
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Supreme Court: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी हाला ही मई सुर्खियों में हैं. उन्होंने काले कोट और वकील का गाउन पहनकर कलकत्ता हाई कोर्ट का रुख किया.यह कदम विधानसभा चुनाव में हार के बाद आया, और इसे लेकर राजनीति और मीडिया में खूब चर्चा हो रही हैं. कोर्ट से बाहर निकलते समय कुछ लोग ममता के खिलाफ नारे भी लगाए. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ममता ने कोर्ट में कहा कि बंगाल ''कोई बुल्डोजर राज्य नहीं हैं '. उनका यह कहना इस बात की तरफ इशारा था कि चुनाव के बाद उनके पार्टी कार्यालयों और कार्यकर्ताओं पर हमले हुए....

जस्टिस काटजू ने लगाए आरोप

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज मार्कंडेय काटजू ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने पब्लिसिटी पाने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया. उनका कहना था कि विधानसभा चुनाव हारने के बाद ममता अब विधानसभा में नहीं चिल्ला सकतीं, इसलिए उन्होंने कोर्ट का सहारा लिया.
जस्टिस काटजू ने सोशल मीडिया पर लिखा, “ममता बनर्जी ने तो हद कर दी थी. उन्हें कहीं ऐसा होना चाहिए जहां वह सुर्खियों में बनी रह सकें. इसलिए उन्होंने हाईकोर्ट चुना.”

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BCI ने मांगा जवाब

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इस बीच, भारतीय विधिज्ञ परिषद (BCI) ने भी ममता से जवाब मांगा है. उनका कहना है कि किसी संवैधानिक पद पर रहने वाले व्यक्ति को बार लाइसेंस की स्थिति ठीक से दर्ज करनी होती है.
BCI ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल से 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट मांगी है, जिसमें ममता का पंजीकरण, वकालत का निलंबन और फिर से चालू करने की स्थिति बताई जाए. क्योंकि ममता ने 2011 से 2026 तक मुख्यमंत्री के रूप में काम किया, इस दौरान उनके संवैधानिक पद के चलते यह जरूरी है कि उनका बार रिकॉर्ड सत्यापित किया जाए.

कोर्ट में मामला

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ममता बनर्जी का यह कदम जनहित याचिका से जुड़ा है. यह याचिका वकील शीर्षन्या बंद्योपाध्याय ने दायर की थी. इसमें 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी कार्यालयों पर हमलों और उनके कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा का आरोप लगाया गया.
ममता के साथ इस दिन तृणमूल कांग्रेस की वरिष्ठ नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य और कल्याण बनर्जी भी मौजूद थे. मामला मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और जस्टिस पार्थसारथी सेन की खंडपीठ के सामने आया.

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