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आसमान में गूंजेगा अब ‘मेक इन इंडिया’, रूस के साथ मिलकर भारत रचेगा इतिहास, आ रहा है SJ-100, जानिए इसकी अहमियत

SJ-100: भारत और रूस मिलकर इतिहास रचने जा रहे हैं. जनवरी 2026 में Wings India एयर शो में HAL और रूस की UAC ने SJ-100 को भारत में बनाने का समझौता हुआ है.

भारत की एयरोस्पेस इंडस्ट्री अब और ऊंची उड़ान भरने को तैयार है. हैदराबाद में आयोजित विंग्स इंडिया 2026 एयर शो के दौरान हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) और रूस की यूनाइटेड एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (UAC) ने हाथ मिलाया है. इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य SJ-100 रीजनल पैसेंजर एयरक्राफ्ट का भारत में उत्पादन करन है, जिससे देश को आधुनिक यात्री विमानों के निर्माण में आत्मनिर्भरता मिलेगी.

आखिर क्या है SJ-100?

SJ-100 एक छोटा-मध्यम दूरी का रीजनल जेट है. यह मूल सुखई सुपरजेट 100 (SSJ100) का एक पूरी तरह से ‘स्वदेशी’ संस्करण है. SSJ100 के पुराने मॉडल में लगभग 70 प्रतिशत पुर्जे पश्चिमी देशों से आते थे. 2022 में अंतर्राष्ट्रीय प्रतिबंधों के बाद, रूस ने इसके सभी विदेशी हिस्सों को रूसी तकनीक से बदलने का फैसला लिया. इसी नए संस्करण को SJ-100 नाम दिया गया है.

HAL अब भारत में बनाएगा SJ-100

अक्टूबर 2025 में शुरु हुई बातचीत अब हकीकत बन गई है. जनवरी 2026 के विंग्स इंडिया कार्यक्रम में फाइनल एग्रीमेंट हुआ, जिसके तहत HAL अब भारत में SJ-100 विमान बना सकेगा, उन्हें बेच सकेगा और उनकी मरम्मत भी कर सकेगा.

रूस कैसे मदद करेगा?

रुस की कंपनी UAC भारत में फैक्ट्री लगाने, डिजाइन तैयार करने और विशेषज्ञों को भेजकर HAL की पूरी मदद करेगी. साथ ही, भारत में इस विमान को उड़ाने के जरुरी सर्टिफ़िकेट दिलाने में भी साथ देगी. 

इस डील से भारत को क्या फायदा होगा?

इस डील का सबसे बड़ा फायदा भारत के लिए आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी. भारत अब खुद के पैसेंजर जेट बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठा रहा है. इसके अलावा लोकल मैन्युफैक्चरिंग और मेंटेनेंस होने से विमानों की लागत कम होगी, और हवाई टिकट भी सस्ता हो सकता है. 

 

 

 

 

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