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देश में हाइब्रिड आतंकी नेटवर्क का बड़ा खुलासा, 12 राज्यों तक फैला जाल, खुफिया एजेंसियां सतर्क

देश के करीब दर्जनभर राज्यों में आईएसआई और आतंकी संगठनों का नेटवर्क सक्रिय पाया गया है, जहां हाइब्रिड आतंकी तैयार किए जा रहे हैं. दिल्ली-एनसीआर में सोलर कैमरों से रेकी और अंबाला में आरडीएक्स सप्लाई के दौरान गिरफ्तारी के बाद यह खुलासा हुआ.

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देश की सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आई है. खुफिया एजेंसियों और एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में यह खुलासा हुआ है कि देश के करीब एक दर्जन राज्य आतंकी संगठनों और आईएसआई के निशाने पर हैं. इन इलाकों में 'हाइब्रिड आतंकी' तैयार किए जा रहे हैं, जो स्थानीय होने के कारण सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बनते जा रहे हैं.

सोलर कैमरों से हो रही थी रेकी

जांच में सामने आया है कि दिल्ली-एनसीआर समेत कई संवेदनशील इलाकों में सोलर कैमरे लगाकर रेकी करवाई जा रही थी. इन कैमरों के जरिए महत्वपूर्ण स्थानों की जानकारी और वीडियो पाकिस्तान भेजे जा रहे थे. यह खुलासा तब हुआ जब अंबाला में आरडीएक्स की सप्लाई के दौरान तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया.

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अंबाला और गाजियाबाद में गिरफ्तारी

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गिरफ्तार आरोपियों में अकबर अली (अजमेर), अनस (मेरठ) और जगबीर (अंबाला) शामिल हैं. ये तीनों पाकिस्तानी गैंगस्टर और आईएसआई के लिए काम करने वाले शहजाद भट्टी के संपर्क में थे. वहीं चौथा आरोपी मक्खनदीप, जो पंजाब का रहने वाला है, अभी फरार बताया जा रहा है. इसी दिन गाजियाबाद की कौशांबी पुलिस ने भी खुफिया इनपुट के आधार पर सुहेल मलिक समेत छह अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया.

युवाओं को बनाया जा रहा निशाना

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जांच में यह भी सामने आया कि पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के निर्देश पर सुहेल ने दिल्ली और आसपास के इलाकों में सोलर कैमरे लगवाए थे. इस नेटवर्क से जुड़े नौ आरोपियों को 20 मार्च को गिरफ्तार किया गया, जिनमें पांच किशोर भी शामिल हैं. इससे साफ है कि युवाओं को बहकाकर इस खतरनाक नेटवर्क का हिस्सा बनाया जा रहा है.

वीडियो कॉल से जुड़ा था नेटवर्क

इसी कड़ी में 18 मार्च को हापुड़ से अजीम राणा और मेरठ के आजाद राजपूत को भी गिरफ्तार किया गया. दोनों का संपर्क शहजाद भट्टी से वीडियो कॉल के जरिए था. खुफिया एजेंसियां, आईबी, एटीएस और आर्मी इंटेलिजेंस अब इन सभी मॉड्यूल्स को जोड़कर पूरे नेटवर्क की तह तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं.

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12 राज्यों में फैला नेटवर्क

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यह नेटवर्क केवल एक या दो राज्यों तक सीमित नहीं है. जांच में सामने आया है कि बिहार, झारखंड, आंध्रप्रदेश, केरल, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, राजस्थान और कश्मीर समेत 12 से ज्यादा राज्यों में इसकी जड़ें फैल चुकी हैं. इन जगहों पर ऐसे लोगों को तैयार किया जा रहा है जिनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, जिससे उन पर शक करना मुश्किल हो जाता है.

स्थानीय युवाओं को बनाया जा रहा आतंकी

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बिजनौर निवासी सुहेल को भी इसी रणनीति के तहत नेटवर्क में शामिल किया गया था. उसने स्थानीय युवाओं को जोड़कर दिल्ली-एनसीआर में कई जगहों पर कैमरे लगवाए. ये कैमरे आम नजर में सामान्य लगते हैं, लेकिन इनके जरिए संवेदनशील जानकारियां जुटाई जा रही थीं. दूसरी ओर, देवबंद क्षेत्र में एक मौलाना को लेकर भी हलचल मच गई. जानकारी के अनुसार, यूपी एटीएस ने उन्हें पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था. हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक करीब चार घंटे पूछताछ के बाद उन्हें छोड़ दिया गया. बताया जा रहा है कि वह हाल ही में ईरान से पढ़ाई पूरी कर लौटे थे.

नौशाद की अहम भूमिका

जांच में एक और अहम नाम सामने आया है, बिहार निवासी नौशाद का. उसे पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले नेटवर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला माना जा रहा है. नौशाद को झारखंड के देवघर स्थित मंदिर की वीडियो और लोकेशन जुटाने का टास्क दिया गया था. वह अपने साथियों की मदद से संवेदनशील स्थानों की जानकारी इकट्ठा कर पाकिस्तान भेजता था.

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रेल जिहाद का एंगल सामने आया

इस पूरे मामले में 'रेल जिहाद' का एंगल भी सामने आया है. कुछ समय पहले देश में रेल हादसों की साजिश की खबरें आई थीं, जिसमें पटरियों को नुकसान पहुंचाने और ट्रेनों को पटरी से उतारने की कोशिश की गई थी. अब जांच एजेंसियों को शक है कि यह नेटवर्क रेलवे और मेट्रो स्टेशनों की रेकी कर बड़े हमले की तैयारी में था. गाजियाबाद से पकड़े गए मॉड्यूल ने यह भी कबूल किया है कि कई रेलवे स्टेशन और मेट्रो-रैपिड स्टेशनों पर कैमरे लगाए गए थे और उनकी वीडियो पाकिस्तान भेजी जा रही थी. इससे साफ है कि यह नेटवर्क सिर्फ जासूसी तक सीमित नहीं, बल्कि बड़े हमलों की साजिश भी रच रहा था.

एजेंसियां सतर्क, खतरा बरकरार

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खुफिया एजेंसियां अब पूरी सतर्कता के साथ इस नेटवर्क को जड़ से खत्म करने में जुटी हैं. लगातार हो रही गिरफ्तारियां इस बात का संकेत हैं कि सुरक्षा एजेंसियां सक्रिय हैं, लेकिन यह भी सच है कि खतरा अभी पूरी तरह टला नहीं है. ऐसे में आम नागरिकों की जागरूकता भी उतनी ही जरूरी हो जाती है.

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बताते चलें कि देश के सामने यह एक नई तरह की चुनौती है, जहां दुश्मन अब सीधे हमला नहीं करता, बल्कि भीतर से सिस्टम को कमजोर करने की कोशिश करता है. यही वजह है कि हाइब्रिड आतंकी मॉडल को सबसे खतरनाक माना जा रहा है.

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