झारखंड पुलिस में बड़ा फेरबदल, अनुराग गुप्ता की जगह तदाशा मिश्रा प्रभारी डीजीपी नियुक्त

डीजीपी पद से ऐच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले अनुराग गुप्ता ने मंगलवार देर शाम मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर इस आशय का आवेदन सौंपा था. सरकार ने गुरुवार को इसकी स्वीकृति दी.

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07 Nov 2025
( Updated: 11 Dec 2025
05:16 AM )
झारखंड पुलिस में बड़ा फेरबदल, अनुराग गुप्ता की जगह तदाशा मिश्रा प्रभारी डीजीपी नियुक्त

झारखंड सरकार ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) अनुराग गुप्ता की ऐच्छिक सेवानिवृत्ति को मंजूरी दे दी है. सरकार ने उनके स्थान पर 1994 बैच की आईपीएस अधिकारी तदाशा मिश्रा को राज्य का प्रभारी डीजीपी नियुक्त किया है. 

आईपीएस तदाशा मिश्रा बनीं प्रभारी डीजीपी

इससे पहले तदाशा मिश्रा गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत थीं. इस संबंध में गृह, कारा एवं आपदा विभाग की ओर से गुरुवार की देर शाम अधिसूचना जारी की गई.

मूल रूप से ओडिशा की रहने वाली तदाशा मिश्रा को करीब एक साल पहले डीजी रैंक में प्रोन्नति दी गई थी. वह झारखंड पुलिस में एडीजी, आईजी, रांची में सिटी एसपी सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुकी हैं. 

सरकार ने स्वीकार किया अनुराग गुप्ता का इस्तीफा 

डीजीपी पद से ऐच्छिक सेवानिवृत्ति लेने वाले अनुराग गुप्ता ने मंगलवार देर शाम मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर इस आशय का आवेदन सौंपा था. सरकार ने गुरुवार को इसकी स्वीकृति दी.

1990 बैच के आईपीएस थे अनुराग गुप्ता

अनुराग गुप्ता 1990 बैच के आईपीएस थे. उन्हें वर्ष 2022 में डीजी के पद पर पदोन्नति मिली थी और 26 जुलाई 2024 को प्रभारी डीजीपी बनाया गया था. विधानसभा चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने उन्हें पद से हटा दिया था, लेकिन चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने के बाद 28 नवंबर 2024 को हेमंत सोरेन सरकार ने उन्हें दोबारा प्रभारी डीजीपी नियुक्त किया था. 

राज्य सरकार ने इस वर्ष फरवरी में डीजीपी नियुक्ति के लिए नई नियमावली लागू की थी, जिसके तहत अनुराग गुप्ता को दो वर्ष के कार्यकाल के लिए नियमित डीजीपी के रूप में नियुक्त किया गया था. 

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से गुप्ता को पद से हटाने की थी सिफारिश

हालांकि, केंद्र सरकार और यूपीएससी ने इस नियुक्ति पर आपत्ति जताई थी. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार को दो बार पत्र लिखकर गुप्ता को पद से हटाने की सिफारिश की थी, लेकिन राज्य सरकार ने अपनी नियमावली का हवाला देकर उन्हें पद पर बनाए रखा था. 

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सितंबर माह में सरकार ने उनसे एसीबी का प्रभार वापस ले लिया था, जिसके बाद उनके हटाए जाने की चर्चाएं तेज हो गई थीं. अब उनकी ऐच्छिक सेवानिवृत्ति को मंजूरी मिलने के साथ ही उस पर औपचारिक मुहर लग गई है.

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