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जेडी वेंस ने अमेरिका में काम करने वाले प्रवासियों को कहा ‘बंधुआ मजदूर’, भारत ने तगड़ा पलटवार कर याद दिला दिया इतिहास

जेडी वेंस का आरोप है कि माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों को निकालकर उनकी जगह सस्ते विदेशी कर्मचारियों को रख रही हैं. जिसमें भारतीय कर्मचारी भी शामिल हैं.

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09 Oct 2026
( Updated: 09 Oct 2026
04:09 PM )
जेडी वेंस ने अमेरिका में काम करने वाले प्रवासियों को कहा ‘बंधुआ मजदूर’, भारत ने तगड़ा पलटवार कर याद दिला दिया इतिहास
Image Source- IANS/X
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अमेरिका में वीजा पर रहकर काम कर रहे कर्मचारियों पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने आक्रामक टिप्पणी की है. उन्होंने H-1B वीजा धारकों की तुलना बंधुआ मजदूरों से की है. जेडी वेंस ने अमेरिका ने 8 टेक्नोलॉजी कंपनियों को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन कार्यक्रम (PERM) से बाहर करने के फ़ैसले का समर्थन किया है.

जेडी वेंस का आरोप है कि माइक्रोसॉफ्ट जैसी कंपनियां अमेरिकी कर्मचारियों को निकालकर उनकी जगह सस्ते विदेशी कर्मचारियों को रख रही हैं. इसके एक दिन पहले उन्होंने इसे धोखाधड़ी बताते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. भारत के हजारों कर्मचारी भी H-1B वीजा पर अमेरिका में काम कर रहे हैं. ऐसे में भारत ने वेंस की इस टिप्पणी को अनुचित करार दिया. 

भारत ने जताई कड़ी आपत्ति 

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की ओर से विदेशी कर्मचारियों को 'फॉरेन इंडेंचर्ड सर्वेंट्स' (विदेशी बंधुआ मजदूर) कहे जाने पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताई है. यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब ट्रंप प्रशासन ने परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (पीईआरएम) कार्यक्रम को निलंबित करने का फैसला किया है. 

MEA ने सोशल मीडिया पर एक लिखित बयान में कहा, ‘हमारा मानना है कि इस तरह के बयान अनुचित हैं और इस तथ्य को नजरअंदाज करते हैं कि अमेरिका में काम कर रहे भारतीय पेशेवर उच्च शिक्षित और कुशल लोग हैं, जो वहां की अर्थव्यवस्था और नवाचार तंत्र में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं.’

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भारत ने अमेरिका को याद दिलाया इतिहास 

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, ‘खुद अमेरिका का इतिहास भी ऐसे प्रवासियों की पीढ़ियों से बना है, जिनके श्रम, उद्यम और नवाचार ने उसकी प्रगति और समृद्धि में अहम भूमिका निभाई है.  ऐसे शब्दों का इस्तेमाल, जिनसे ऐतिहासिक और औपनिवेशिक दौर की पीड़ादायक यादें जुड़ी हों, बेहद आपत्तिजनक है.’

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दरअसल, अमेरिका में शुरुआती दौर में 1860 में प्रवासी मजदूरों को गुलाम बनाकर रखा जाता था. इतिहास गवाह है जब अफ्रीका के लोगों को जबरन अमेरिका लाकर उन्हें दास बनाकर रखा गया था. अफ्रीका के लाखों मजदूर अमेरिका के बंधक बनकर यहां कि कपास, तंबाकू, चावल और चीनी के बागानों पर काम करते थे. 

जेंडी वेंस के बयान के बाद भारत ने अमेरिका को उसके इसी काले अतीत की याद दिलाई. जेडी वेंस ने माइक्रोसॉफ्ट पर अमेरिकी कर्मचारियों की जगह विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने का आरोप लगाया था. उनका कहना था कि कंपनी को विदेशी कर्मचारियों की बजाय अमेरिकी नागरिकों को प्राथमिकता देनी चाहिए. 

वेंस ने अपने आरोपों के समर्थन में माइक्रोसॉफ्ट की ओर से कर्मचारियों की छंटनी और एच-1बी वीजा और ग्रीन कार्ड के इस्तेमाल का हवाला दिया. 

जेडी वेंस ने क्या कहा था? 

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अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा था, ‘पिछले एक साल में माइक्रोसॉफ्ट ने 6,000 अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की.  इसी दौरान कंपनी को 6,300 H-1B वीजा और लगभग 3,000 ग्रीन कार्ड मिले. अगर आप गणना करें, तो कंपनी ने जितने अमेरिकी कर्मचारियों की छंटनी की, उनकी जगह लगभग डेढ़ गुना विदेशी ‘इंडेंचर्ड सर्वेंट्स’ को लेकर आई.’

क्या है PERM कार्यक्रम?

ट्रंप प्रशासन के फैसले के तहत कई बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों की पीईआरएम कार्यक्रम में भागीदारी निलंबित कर दी गई है. यह कार्यक्रम कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों के लिए रोजगार आधारित ग्रीन कार्ड प्रक्रिया के तहत स्थायी श्रम प्रमाणन प्राप्त करने की अनुमति देता है. 

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इस फैसले के बाद संबंधित कंपनियां नए PERM आवेदन दाखिल नहीं कर सकेंगी और पहले से लंबित आवेदनों की प्रक्रिया भी रोक दी गई है. अमेरिकी श्रम मंत्री कीथ सोंडरलिंग ने जेडी वेंस की मौजूदगी में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस फैसले की घोषणा की थी. उन्होंने कहा कि यह कदम चल रही आपराधिक और संघीय जांचों के आधार पर उठाया गया है. 

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सोंडरलिंग ने कहा, ‘श्रम विभाग के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डीएस्पोसिटो की अगुवाई में चल रही आपराधिक जांच के कारण मैं दुनिया की कुछ सबसे बड़ी आईटी आउटसोर्सिंग कंपनियों कॉग्निजेंट, इन्फोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी को परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन (पीईआरएम) कार्यक्रम से निलंबित कर रहा हूं.’

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