छठ पूजा पर भारतीय रेलवे की खास पहल, स्टेशनों पर गूंज रहे भक्ति गीत

यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए रेलवे ने आरपीएफ कर्मियों की अतिरिक्त तैनाती की है.सभी प्लेटफॉर्म और मुख्य द्वारों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है.सफाई व्यवस्था को भी दुरुस्त किया गया है ताकि स्टेशन परिसर में स्वच्छता और पवित्रता बनी रहे.

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25 Oct 2025
( Updated: 11 Dec 2025
04:13 AM )
छठ पूजा पर भारतीय रेलवे की खास पहल, स्टेशनों पर गूंज रहे भक्ति गीत

आस्था के महापर्व छठ पूजा के शुभ अवसर पर भारतीय रेलवे ने यात्रियों के लिए एक विशेष पहल की है.अब देश के कई प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर छठ गीतों का प्रसारण किया जा रहा है.इस कदम का उद्देश्य न केवल यात्रियों को त्योहार की भावना से जोड़ना है, बल्कि उनके सफर को भी भक्ति और उल्लास से भर देना है.

छठ पूजा पर भारतीय रेलवे की अनोखी पहल

छठ पूजा के दौरान रेलवे स्टेशनों पर गूंजते ये पारंपरिक और भक्तिपूर्ण गीत श्रद्धालुओं के बीच एक पवित्र और भावनात्मक माहौल का निर्माण कर रहे हैं.जब यात्री प्लेटफॉर्म पर कदम रखते हैं, तो 'उठल सवेरवा, अरघ दिहीं सूर्य भगवान' और 'कांच ही बांस के बहंगिया' जैसे मधुर गीतों की धुन उनके मन को छू जाती है.इससे यात्रियों को अपने गांव-घर और संस्कृति की सुगंध का अहसास हो रहा है.

रेलवे प्रशासन ने किए यात्रियों की सुरक्षा के विशेष इंतजाम

रेलवे की यह पहल पटना, दानापुर, हाजीपुर, भागलपुर, जमालपुर, सोनपुर, नई दिल्ली, गाज़ियाबाद और आनंद विहार टर्मिनल जैसे प्रमुख स्टेशनों पर लागू की गई है.इन स्टेशनों पर छठ पूजा के दौरान यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने कई विशेष इंतजाम भी किए हैं.स्टेशनों पर यात्रियों के ठहरने के लिए होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं, जहां वे आराम से अपनी ट्रेन का इंतजार कर सकते हैं.

रेलवे ने सभी स्टेशन पर की आरपीएफ कर्मियों की अतिरिक्त तैनाती

यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के लिए रेलवे ने आरपीएफ कर्मियों की अतिरिक्त तैनाती की है.सभी प्लेटफॉर्म और मुख्य द्वारों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है.सफाई व्यवस्था को भी दुरुस्त किया गया है ताकि स्टेशन परिसर में स्वच्छता और पवित्रता बनी रहे.

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रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह पहल यात्रियों के अनुभव को और भी यादगार बनाएगी.त्योहार के मौसम में जब हजारों लोग अपने घर लौटते हैं, तब स्टेशनों पर छठ गीतों की गूंज उन्हें अपनी जड़ों से जोड़ती है.यह पहल न केवल सांस्कृतिक परंपरा को सम्मान देती है, बल्कि यात्रियों के मन में घर जैसी आत्मीयता भी जगाती है.

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