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'सवाल पूछो तो विदेशी एजेंट बता देते हैं...', CJP के समर्थन में बोले अन्नामलाई, मोदी सरकार पर उठाए सवाल; BJP ने भी किया पलटवार
बीजेपी से अलग होने के बाद के. अन्नामलाई ने केंद्र की मोदी सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने CJP के विरोध करने के अधिकार का समर्थन किया, हालांकि उसके प्रदर्शन के तरीकों से असहमति जताई. उनके बयान से बीजेपी के साथ जुबानी टकराव तेज हो गया है.
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दक्षिण की राजनीति में अपनी जमीनी पकड़ मजबूत करने के लिए बीजेपी ने के. अन्नामलाई पर भरोसा जताते हुए उन्हें तमिलनाडु प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी थी. उस दौर में के. अन्नामलाई एक फायरब्रांड नेता के तौर पर विपक्षी दलों पर लगातार हमलावर रहते थे. लेकिन अब बीजेपी से उनकी राहें अलग हो चुकी हैं. पार्टी से अलग होने के बाद के. अन्नामलाई ने पहली बार केंद्र की मोदी सरकार पर सवाल उठाए हैं. इतना ही नहीं, उन्होंने एक तरह से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के रुख का समर्थन भी कर दिया है.
दरअसल, अन्नामलाई ने अब केंद्र की मोदी सरकार और दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं के खिलाफ हुई कार्रवाई को लेकर अन्नामलाई ने कहा कि लोकतंत्र में किसी मुद्दे पर सवाल उठाना और विरोध करना नागरिकों का अधिकार है. हालांकि, उन्होंने CJP के प्रदर्शन के तरीकों से असहमति भी जताई है. उनके इस बयान के बाद बीजेपी और अन्नामलाई के बीच जुबानी टकराव तेज हो गया है.
CJP के समर्थन में क्या बोले अन्नामलाई?
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तमिलनाडु बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष के. अन्नामलाई ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अगर कोई कानून की प्रक्रिया के उल्लंघन पर सवाल उठाता है, तो उसे कई तरह के नाम दिए जाते हैं. यहां तक कि विरोध करने वालों को विदेशी एजेंट तक कह दिया जाता है. अन्नामलाई की यह टिप्पणी उस बयान के एक दिन बाद आई, जिसमें उन्होंने CJP के खिलाफ दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को नुकसान पहुंचाने वाला कदम बताया था. उनका कहना था कि किसी संगठन के प्रदर्शन के तरीके गलत हो सकते हैं, लेकिन इससे उसके सवाल उठाने और विरोध करने के अधिकार को खत्म नहीं किया जा सकता. उन्होंने केंद्र सरकार से यह भी कहा कि CJP की ओर से उठाए गए सवालों का जवाब दिया जाना चाहिए. किसी प्रदर्शन को राष्ट्रविरोधी बताने से उन सवालों का समाधान नहीं होगा, जिन पर बहस की मांग की जा रही है.
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बीजेपी छोड़ने की तारीख भी याद दिलाई
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अन्नामलाई ने बीजेपी के उन नेताओं पर भी निशाना साधा, जो उनके बयान की आलोचना कर रहे हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि वह 5 जून 2026 को बीजेपी छोड़ चुके हैं. उन्होंने कहा कि CJP के विरोध प्रदर्शन के कई तरीकों से वह सहमत नहीं हैं और उन्हें संगठन की कुछ गतिविधियां गलत लगती हैं. इसके बावजूद, किसी महत्वपूर्ण मुद्दे पर प्रदर्शन करने, बहस करने और अपनी बात रखने का अधिकार सभी को है. अन्नामलाई के इस बयान का मुख्य संदेश यही था कि किसी संगठन के तरीकों से असहमति होने का मतलब यह नहीं है कि उसके सवालों को सुना ही न जाए. उन्होंने केंद्र सरकार से असहज करने वाले सवालों का जवाब देने की अपील की.
केंद्र सरकार से पूछे पांच सवाल
CJP के मामले में अन्नामलाई ने केंद्र सरकार के सामने पांच प्रमुख सवाल रखे. इनमें जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की अधिसूचित सूची से हटाने, विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के रूप में पुलिस अधिकारियों की भूमिका और गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की जमानत प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे शामिल हैं. उन्होंने सवाल किया कि CJP की ओर से प्रदर्शन की अनुमति मांगने के लिए पत्र दिए जाने के बाद जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने का फैसला कैसे लिया गया. उन्होंने यह भी पूछा कि जब दिल्ली पुलिस किसी मामले में शिकायतकर्ता हो, तब पुलिस अधिकारी का विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के रूप में हिरासत से जुड़े मामले पर फैसला करना निष्पक्षता को लेकर सवाल क्यों नहीं खड़े करता. इसके अलावा, उन्होंने 13 अक्टूबर को गिरफ्तार CJP सदस्यों की जमानत सुनवाई, आठ जमानतदारों को अस्वीकार किए जाने और सुनवाई के दौरान सामने आई परिस्थितियों पर सवाल उठाए. अन्नामलाई ने NEET परीक्षाओं से जुड़े प्रदर्शनों के दौरान पेलेट गन के कथित इस्तेमाल और मानक संचालन प्रक्रिया के पालन को लेकर भी जवाब मांगा. जानकारी देते चलें कि ये अन्नामलाई की ओर से उठाए गए सवाल और आरोप हैं. इन सभी मुद्दों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष और उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड देखना जरूरी है.
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बीजेपी ने अन्नामलाई को क्यों घेरा?
अन्नामलाई के बयान पर बीजेपी ने भी पलटवार किया. तमिलनाडु बीजेपी के मुख्य प्रवक्ता नारायणन तिरुपति ने उन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि अन्नामलाई पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का समर्थन करते थे, लेकिन अब उनका रुख बदल गया है. तिरुपति ने मई 2026 में कांग्रेस नेता शशि थरूर के साथ अन्नामलाई की सार्वजनिक बहस का हवाला देते हुए कहा कि उस समय उन्होंने SIR को निष्पक्ष और जरूरी बताया था. बीजेपी प्रवक्ता के मुताबिक, अन्नामलाई पहले मतदाता सूची से फर्जी मतदाताओं को हटाने की जरूरत पर जोर देते थे, लेकिन पार्टी छोड़ने के बाद उनके बयान बदल गए हैं. बीजेपी ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर उनके सवाल उठाने की भी आलोचना की. पार्टी का कहना है कि यदि प्रदर्शनकारी कानून की सीमाओं का उल्लंघन करते हैं और निर्देशों के बावजूद नहीं हटते, तो पुलिस को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई करनी पड़ सकती है.
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क्या अन्नामलाई और बीजेपी के बीच बढ़ेगी दूरी?
इस पूरे विवाद ने अन्नामलाई और बीजेपी के बीच वैचारिक मतभेदों को फिर चर्चा में ला दिया है. एक ओर अन्नामलाई विरोध करने के अधिकार और कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, तो दूसरी ओर बीजेपी उनके पुराने बयानों के आधार पर उनके रुख पर सवाल कर रही है.
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बहरहाल, अन्नामलाई ने CJP के सभी तरीकों का समर्थन नहीं किया है, बल्कि उसके सवाल उठाने के अधिकार का बचाव किया है. अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इन मुद्दों पर क्या जवाब देती है और बीजेपी इस विवाद को आगे किस तरह उठाती है. इतना जरूर है कि CJP के प्रदर्शन को लेकर शुरू हुई बहस अब राजनीतिक बयानबाजी तक पहुंच गई है.