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'मान जाएं, वरना होगा 10 हजार करोड़ का नुकसान...', ज्ञानेश कुमार को घेरने चले राहुल गांधी CTI की चिट्ठी से खुद घिरे

अक्टूबर में प्रदर्शनों से आम लोगों और कारोबारियों को हुई परेशानी के बाद अब 1 नवंबर की प्रस्तावित कांग्रेस रैली पर सवाल उठ रहे हैं. CTI ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर दिवाली के व्यस्त सीजन का हवाला देते हुए रैली स्थगित करने की अपील की है. संगठन को आशंका है कि इससे दिल्ली के प्रमुख बाजारों के करीब 10 हजार करोड़ रुपये के कारोबार पर असर पड़ सकता है.

Image Source: IANS
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देश की राजधानी दिल्ली में अक्टूबर की शुरुआत में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफ़े की मांग को लेकर विपक्षी दलों के प्रदर्शन ने काफी हंगामा खड़ा किया था. कांग्रेस और सीजेपी के विरोध प्रदर्शनों के चलते सुरक्षा के मद्देनजर कई मेट्रो स्टेशनों को बंद करना पड़ा, जिससे आम लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई और कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ा. उस दौरान प्रदर्शन के कारण हुई परेशानियों को लेकर दिल्ली के लोगों और व्यापारियों ने विपक्ष के प्रति नाराजगी भी जाहिर की थी. ऐसे में अब एक बार फिर राहुल गांधी ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश में हैं, लेकिन इस बार भी उन्हें कारोबारियों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है. ऐसे में सवाल उठता है कि ज्ञानेश कुमार को निशाने पर लेने की विपक्ष की हर कोशिश के बीच आम जनता और कारोबारी अपनी रोजमर्रा की परेशानियों को लेकर विरोध क्यों रहे हैं?

दरअसल, 1 नवंबर को प्रस्तावित रैली को सफल बनाने के लिए कांग्रेस ने अपने सभी प्रदेश अध्यक्षों को अधिक से अधिक भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी सौंपी है. सूत्रों के मुताबिक, रैली की तैयारियों को लेकर दिल्ली में पार्टी स्तर पर बैठक भी की गई है. हालांकि, इन तैयारियों के बीच अब दिल्ली के कारोबारियों ने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से रैली को स्थगित करने की अपील की है. चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने इस संबंध में राहुल गांधी को पत्र लिखकर अपनी चिंता जाहिर की है. कारोबारियों का तर्क है कि रामलीला मैदान के आसपास करीब 20 बड़े थोक और खुदरा बाजार हैं, जहां रोजाना बड़ी संख्या में व्यापारी और ग्राहक पहुंचते हैं. ऐसे में रैली के कारण यातायात बाधित होने और लोगों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है, जिसका सीधा असर व्यापार पर पड़ सकता है. CTI के अनुसार, इससे करीब 10 हजार करोड़ रुपये के कारोबार पर असर पड़ने की आशंका है. ऐसे में रैली की तैयारियों के बीच कारोबारियों की यह अपील कांग्रेस के लिए एक नई चुनौती बनकर सामने आई है.

CTI ने पत्र में क्या लिखा?

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टीवी 9 की रिपोर्ट के मुताबिक, CTI के चेयरमैन बृजेश गोयल ने राहुल गांधी को लिखे पत्र में रैली की तारीख बदलने का आग्रह किया है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस की प्रस्तावित महारैली ऐसे समय आयोजित हो रही है, जब दिल्ली के बाजारों में दिवाली की खरीदारी अपने चरम पर होती है. ऐसे में कारोबार पर पड़ने वाले संभावित असर को देखते हुए रैली को 10 नवंबर यानी भैया दूज के बाद आयोजित करने पर विचार किया जाना चाहिए. पत्र में कारोबारियों की चिंता का कारण बताते हुए कहा गया है कि धनतेरस के अवसर पर दिल्ली में करीब 25 हजार करोड़ रुपये का व्यापार होता है. इस साल धनतेरस 6 नवंबर, शुक्रवार को और दीपावली 8 नवंबर को मनाई जाएगी, जबकि भैया दूज 10 नवंबर को है. कारोबारी संगठनों के मुताबिक, त्योहारों की खरीदारी लगभग एक सप्ताह पहले ही शुरू हो जाती है. सोना-चांदी, बर्तन, इलेक्ट्रॉनिक्स, कपड़े, ड्राई फ्रूट्स, मिठाई, ऑटोमोबाइल, प्रॉपर्टी और गिफ्ट आइटम जैसे कई क्षेत्रों में इस दौरान बड़े पैमाने पर लेन-देन होता है. CTI का कहना है कि यह कारोबार दिल्ली की अर्थव्यवस्था का अहम आधार है. ऐसे में त्योहारों के व्यस्त सीजन के दौरान रैली से यातायात और बाजारों की गतिविधियां प्रभावित होने की आशंका व्यापारियों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है.

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पिछले प्रदर्शन से हुए नुकसान का जिक्र किया

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CTI ने अपने पत्र में अक्टूबर के दौरान दिल्ली के व्यापारियों को हुए आर्थिक नुकसान का भी जिक्र किया है. संगठन के आकलन के मुताबिक, कनॉट प्लेस, इंडिया गेट और मध्य दिल्ली के अन्य इलाकों में लगातार आयोजित रैलियों, मार्च और सड़कों पर पाबंदियों के चलते व्यापारिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुईं. CTI का दावा है कि इन व्यवधानों की वजह से कारोबारियों को करीब 3 हजार करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा. हालात ऐसे रहे कि थोक बाजारों तक बाहर से माल की आपूर्ति बाधित हुई, जबकि खुदरा दुकानों पर ग्राहकों की आवाजाही भी घट गई. कारोबारियों का कहना है कि बाजारों तक पहुंच प्रभावित होने का सीधा असर बिक्री और व्यापार पर पड़ा. 

रैली से दिल्ली के प्रमुख बाजारों का कारोबार प्रभावित होने की आशंका

रामलीला मैदान के आसपास चांदनी चौक, सदर बाजार, खारी बावली, भागीरथ पैलेस, करोल बाग और कश्मीरी गेट समेत कई बड़े थोक और खुदरा बाजार मौजूद हैं. CTI के मुताबिक, इन बाजारों से देशभर में सामान की सप्लाई होती है. ऐसे में रैली के दौरान ट्रैफिक डायवर्जन, बैरिकेडिंग और मेट्रो सेवाओं पर संभावित पाबंदियों से व्यापार प्रभावित हो सकता है. CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने यह भी कहा कि पुरानी दिल्ली और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के नजदीक होने के कारण बड़ी संख्या में व्यापारी और खरीदार इन बाजारों तक पहुंचते हैं. रास्ते बाधित होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है. साथ ही उन्होने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लोकतांत्रिक अधिकार का सम्मान करते हुए राजनीतिक दलों से अपील की कि दिवाली के व्यस्त कारोबारी सीजन में धनतेरस, दीपावली और भैया दूज तक प्रमुख बाजार क्षेत्रों में बड़ी रैलियां आयोजित करने से बचें.

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बताते चलें कि ज्ञानेश कुमार के मुद्दे पर सरकार को घेरने की कांग्रेस की तैयारी के बीच कारोबारियों की रैली टालने की अपील ने एक नई बहस छेड़ दी है. अब देखना होगा कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी व्यापारियों की इन चिंताओं को कितनी गंभीरता से लेते हैं और क्या रैली की तारीख में बदलाव किया जाता है. बहरहाल, कारोबारियों की मांग साफ है कि राजनीतिक विरोध के बीच त्योहारों के सीजन में दिल्ली के व्यापार और आम लोगों की सहूलियत प्रभावित नहीं होनी चाहिए.

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